PMLA ट्रिब्यूनल ने ED द्वारा RCOM और उसकी सहायक कंपनियों की संपत्तियों पर की गई अटैचमेंट को बरकरार रखा। जानिए पूरी डिटेल और इसका कंपनी पर असर।
मुंबई: भारत की टेलीकॉम सेक्टर की एक समय की प्रमुख कंपनी Reliance Communications एक बार फिर बड़े कानूनी और वित्तीय संकट में घिर गई है। कंपनी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में पुष्टि की है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने उसके और उसकी सहायक कंपनियों की संपत्तियों पर Enforcement Directorate (ED) द्वारा जारी किए गए प्रावधिक अटैचमेंट आदेशों (Provisional Attachment Orders – PAOs) को बरकरार रखा है।
यह आदेश 10 अप्रैल 2026 को जारी किए गए, जबकि मूल कार्रवाई नवंबर 2025 में ED द्वारा की गई थी। यह पूरा मामला कथित “अवैध धन” यानी proceeds of crime से जुड़ी जांच का हिस्सा है।
मामला आखिर शुरू कैसे हुआ?
इस पूरे विवाद की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई थी, जब ED ने PMLA के तहत RCOM और उससे जुड़ी कई कंपनियों की संपत्तियों पर प्रावधिक कुर्की (provisional attachment) की कार्रवाई की थी।
ED का आरोप था कि कंपनी समूह से जुड़े वित्तीय लेन-देन में अनियमितताएं हो सकती हैं और इसी आधार पर कई महत्वपूर्ण संपत्तियों को जांच के दायरे में लिया गया।
अब एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इन शुरुआती आदेशों को मंजूरी देकर मामले को और गंभीर बना दिया है।
किन आदेशों को मिली पुष्टि?
ट्रिब्यूनल द्वारा जिन आदेशों को बरकरार रखा गया है, उनमें शामिल हैं:
- PAO No. 32/2025
- PAO No. 36/2025
- PAO No. 40/2025
इन आदेशों के तहत कंपनी और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों Campion Properties Ltd (CPL) और Reliance Realty Ltd (RRL) की कई संपत्तियों को अटैच किया गया है।
कौन-कौन सी संपत्तियां जांच के दायरे में आईं?
ED की कार्रवाई का दायरा काफी व्यापक है और इसमें देश के कई बड़े शहरों की प्रॉपर्टी शामिल हैं।
1. दिल्ली की प्राइम प्रॉपर्टी
सबसे महत्वपूर्ण संपत्तियों में से एक नई दिल्ली के महाराजा रणजीत सिंह मार्ग पर स्थित 3.7 एकड़ का लीजहोल्ड प्लॉट है।
यह वही स्थान है जहां “Reliance Centre” स्थित है, जो Campion Properties Ltd के अधीन आता है।
दिल्ली का यह एरिया बिजनेस और कॉर्पोरेट गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है, जिससे इस संपत्ति की रणनीतिक वैल्यू और बढ़ जाती है।
2. महाराष्ट्र का बड़ा औद्योगिक प्लॉट
दूसरी बड़ी संपत्ति महाराष्ट्र के Trans Thane Creek Industrial Area में स्थित है।
यह लगभग 132.07 एकड़ (5,34,468.32 वर्ग मीटर) का विशाल औद्योगिक भूखंड है, जो Reliance Realty Ltd के अधीन बताया गया है।
इतनी बड़ी औद्योगिक जमीन किसी भी कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति मानी जाती है और इसका सीधा असर कंपनी की बैलेंस शीट पर पड़ सकता है।
3. अन्य शहरों की संपत्तियां
इसके अलावा कई अन्य स्थानों पर भी संपत्तियां इस आदेश के दायरे में आई हैं:
- भुवनेश्वर में ऑफिस स्पेस
- चेन्नई में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी
- पुणे में भूमि के कई टुकड़े
- नवी मुंबई में Millennium Business Park की इमारतें
- Dhirubhai Ambani Knowledge City के भीतर कई संरचनाएं
इन सभी संपत्तियों का मिलाजुला नेटवर्क कंपनी के रियल एस्टेट पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा माना जाता है।
कंपनी पर क्या असर पड़ेगा?
Reliance Communications ने अपनी फाइलिंग में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि इस कार्रवाई का उसके कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
कंपनी के अनुसार:
- संपत्तियों पर अटैचमेंट रहने तक बिजनेस ऑपरेशंस प्रभावित हो सकते हैं
- सहायक कंपनियों की संपत्तियों पर कार्रवाई से निवेश मूल्य घट सकता है
- ग्रुप की कुल वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है
चूंकि CPL और RRL पूरी तरह से RCOM की सहायक कंपनियां हैं, इसलिए इनकी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई का सीधा असर RCOM के कुल एसेट वैल्यू पर पड़ता है।
मौजूदा वित्तीय स्थिति और दिवालिया प्रक्रिया
RCOM पहले से ही गंभीर वित्तीय संकट और कर्ज दबाव से जूझ रही है।
कंपनी फिलहाल Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत दिवालिया प्रक्रिया में है। इसके तहत:
- कंपनी की संपत्तियों का प्रबंधन एक Resolution Professional के हाथ में है
- सभी वित्तीय और कानूनी निर्णय निगरानी में लिए जा रहे हैं
- कंपनी के पुनर्गठन की प्रक्रिया अभी जारी है
इस स्थिति में ED की यह कार्रवाई कंपनी के लिए एक और बड़ा झटका मानी जा रही है।
कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहने के आसार
कंपनी ने यह भी कहा है कि वह इस आदेश के खिलाफ आगे की कानूनी सलाह ले रही है और अगले कदम पर विचार कर रही है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, PMLA मामलों में संपत्ति की अटैचमेंट को चुनौती देना एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है, जिसमें अपील और उच्च न्यायालयों तक मामला जा सकता है।
सेक्टर पर संभावित असर
टेलीकॉम और कॉर्पोरेट सेक्टर के विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि वित्तीय जांच एजेंसियां बड़े कॉर्पोरेट ग्रुप्स पर लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं।
ऐसे मामलों का असर निवेशक विश्वास और बैंकिंग सेक्टर की जोखिम धारणा पर भी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
PMLA ट्रिब्यूनल द्वारा ED की कार्रवाई को बरकरार रखना Reliance Communications के लिए एक गंभीर कानूनी और वित्तीय झटका है।
जहां एक ओर कंपनी पहले से ही दिवालिया प्रक्रिया में है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की संपत्ति अटैचमेंट्स उसकी रिकवरी और पुनर्गठन की संभावनाओं को और जटिल बना देती हैं।
अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि कंपनी इस आदेश के खिलाफ क्या कानूनी रणनीति अपनाती है और आने वाले महीनों में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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