नई दिल्ली: नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) ने करीब 14 साल बाद काली मिर्च (Black Pepper) के वायदा कारोबार (Futures Trading) को दोबारा शुरू करने की घोषणा की है। 15 जुलाई 2026 से काली मिर्च के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग शुरू होगी। इस कदम से किसानों, व्यापारियों, प्रोसेसर्स और निर्यातकों को कीमतों की पारदर्शी खोज (Price Discovery) और जोखिम प्रबंधन (Hedging) के लिए एक रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म मिलेगा।
भारत दुनिया के प्रमुख काली मिर्च उत्पादकों, उपभोक्ताओं और प्रोसेसर्स में शामिल है, लेकिन पिछले कई वर्षों से इस मसाले के लिए कोई सक्रिय डेरिवेटिव बेंचमार्क उपलब्ध नहीं था। NCDEX का मानना है कि नए कॉन्ट्रैक्ट के जरिए भारत एक बार फिर वैश्विक काली मिर्च मूल्य निर्धारण (Global Price Discovery) में अपनी मजबूत भूमिका स्थापित कर सकेगा।
कोच्चि होगा डिलीवरी सेंटर
नए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का डिलीवरी सेंटर कोच्चि (केरल) को बनाया गया है, जिसे भारत में मसालों के सबसे बड़े ट्रेडिंग और प्रोसेसिंग हब के रूप में जाना जाता है। एक्सचेंज का कहना है कि यह व्यवस्था डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगी।
काली मिर्च फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की प्रमुख विशेषताएं
| फीचर | विवरण |
|---|---|
| बेसिस सेंटर | एक्स-वेयरहाउस, कोच्चि (GST अलग) |
| ट्रेडिंग यूनिट | 1 मीट्रिक टन (1000 किलोग्राम) |
| डिलीवरी यूनिट | 1 मीट्रिक टन |
| मूल्य उद्धरण | रुपये प्रति किलोग्राम |
| टिक साइज | 10 पैसे |
| डिलीवरी सेंटर | कोच्चि (नगर निगम सीमा से 60 किमी के दायरे में) |
| अतिरिक्त डिलीवरी सेंटर | कोई नहीं |
| डिलीवरी व्यवस्था | अनिवार्य (Compulsory Delivery) |
किसानों और व्यापारियों को क्या होगा फायदा?
काली मिर्च के वायदा कारोबार की वापसी से किसानों और व्यापारियों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से बचाव का प्रभावी साधन मिलेगा। फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के जरिए वे पहले से कीमत तय कर सकेंगे, जिससे आय और कारोबार में अनिश्चितता कम होगी। साथ ही, निर्यातकों और प्रोसेसर्स को भी बेहतर मूल्य संकेत (Price Signals) मिलेंगे, जिससे व्यापारिक फैसले अधिक सटीक हो सकेंगे।
पहले भी रहा था अच्छा रिस्पॉन्स
NCDEX के अनुसार, जब पहले काली मिर्च का वायदा कारोबार संचालित होता था, तब किसानों, व्यापारियों, प्रोसेसर्स और निर्यातकों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली थी। कई कॉन्ट्रैक्ट्स में एक्सपायरी के समय डिलीवरी लगभग 100% तक पहुंच जाती थी। इसी अनुभव के आधार पर एक्सचेंज को इस बार भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है।
NCDEX के MD-CEO ने क्या कहा?
NCDEX के प्रबंध निदेशक एवं CEO डॉ. अरुण रास्ते ने कहा कि भारत काली मिर्च का बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता होने के बावजूद धीरे-धीरे वैश्विक प्राइस डिस्कवरी में अपनी भूमिका खो चुका था। नए वायदा कॉन्ट्रैक्ट से देश को पारदर्शी और विश्वसनीय मूल्य निर्धारण का मंच मिलेगा, जिससे किसान, प्रोसेसर, एक्सपोर्टर और ट्रेडर्स कीमतों में उतार-चढ़ाव का बेहतर तरीके से प्रबंधन कर सकेंगे।
वहीं, चीफ बिजनेस ऑफिसर केदार देशपांडे ने कहा कि फिलहाल दुनिया में काली मिर्च के लिए कोई सक्रिय डेरिवेटिव बेंचमार्क नहीं है। ऐसे में NCDEX की यह पहल लंबे समय से महसूस की जा रही कमी को दूर करेगी और वैश्विक मसाला व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत बनाएगी।
मल्टी-एसेट एक्सचेंज बनने की दिशा में बढ़ रहा NCDEX
NCDEX ने कोच्चि में अपने ‘हर घर इन्वेस्टर’ अभियान का भी विस्तार किया है, जिसका उद्देश्य बड़े शहरों से बाहर भी निवेशकों को रेगुलेटेड वित्तीय बाजारों से जोड़ना है।
इसके अलावा, SEBI से इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स कारोबार शुरू करने की सैद्धांतिक मंजूरी तथा 770 करोड़ रुपये की फंडिंग मिलने के बाद NCDEX अब मल्टी-एसेट एक्सचेंज बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


