नई दिल्ली: आज भारत के लगभग हर बड़े शहर में आपको कॉफी कैफे आसानी से मिल जाएंगे। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब देश में मॉडर्न कैफे कल्चर लगभग न के बराबर था। उस दौर में एक उद्यमी ने न सिर्फ भारतीयों की कॉफी पीने की आदत बदली, बल्कि युवाओं के मिलने-जुलने की संस्कृति को भी नई पहचान दी। यह शख्स थे वी.जी. सिद्धार्थ (वीरप्पा गंगैया सिद्धार्थ हेगड़े), जिन्हें भारत का ‘कॉफी किंग’ कहा जाता है।
1996 में जब भारत में Starbucks जैसी अंतरराष्ट्रीय कॉफी चेन मौजूद नहीं थी, तब सिद्धार्थ ने कैफे कॉफी डे (CCD) की शुरुआत की। उनका मशहूर स्लोगन “A Lot Can Happen Over Coffee” देखते ही देखते युवाओं की जिंदगी का हिस्सा बन गया।
कॉफी बागानों से शुरू हुआ सफर
वी.जी. सिद्धार्थ का जन्म कर्नाटक के एक ऐसे परिवार में हुआ, जो पीढ़ियों से कॉफी बागानों के कारोबार से जुड़ा था। शुरुआती दिनों में उन्होंने कॉफी ट्रेडिंग और एक्सपोर्ट का व्यवसाय संभाला। हालांकि, उनका सपना केवल कॉफी बेचने तक सीमित नहीं था।
उन्होंने महसूस किया कि भारत के युवाओं को एक ऐसी जगह की जरूरत है, जहां वे दोस्तों के साथ समय बिता सकें, कॉफी का आनंद लें, पढ़ाई या काम कर सकें और आधुनिक कैफे का अनुभव हासिल कर सकें। इसी सोच ने भारत में कैफे कल्चर की नींव रखी।
1996 में खुला पहला कैफे
साल 1996 में बेंगलुरु के ब्रिगेड रोड पर पहला कैफे कॉफी डे आउटलेट खोला गया। उस समय यह एक नया प्रयोग था, लेकिन लोगों ने इसे तेजी से अपनाया।
कुछ ही वर्षों में CCD देश की सबसे बड़ी कॉफी चेन बन गई। अपने चरम दौर में कंपनी के देशभर में 1,000 से 1,700 के बीच आउटलेट्स थे। सिर्फ महानगर ही नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों तक भी इसकी पहुंच बन गई।
भारत में लोकप्रिय बनाई प्रीमियम कॉफी
भारत को लंबे समय तक चाय प्रधान देश माना जाता रहा है। ऐसे माहौल में सिद्धार्थ ने एस्प्रेसो, कैप्पुचीनो, लाटे और फ्लेवर्ड कॉफी जैसी आधुनिक कॉफी को आम लोगों तक पहुंचाया।
CCD केवल कॉफी बेचने की जगह नहीं थी, बल्कि यह युवाओं के मिलने, पढ़ाई करने, बिजनेस मीटिंग और सामाजिक मेल-जोल का लोकप्रिय केंद्र बन गई।
अरबों का कारोबार और हजारों नौकरियां
कैफे कॉफी डे की सफलता के साथ कॉफी डे एंटरप्राइजेज ने तेजी से विस्तार किया। कंपनी के अपने कॉफी बागान, प्रोसेसिंग यूनिट और सप्लाई चेन थी। इस बिजनेस मॉडल ने हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दिया।
साल 2015 में कंपनी ने अपना IPO लॉन्च किया, जिसके बाद इसकी वैल्यूएशन अरबों रुपये तक पहुंच गई। वी.जी. सिद्धार्थ भारतीय स्टार्टअप और रिटेल सेक्टर के सबसे सफल उद्यमियों में गिने जाने लगे।
चुनौतियों के बीच दुखद अंत
हालांकि सफलता के साथ चुनौतियां भी बढ़ती गईं। बढ़ते कर्ज और कारोबारी दबाव के बीच 2019 में 60 वर्ष की उम्र में वी.जी. सिद्धार्थ का निधन हो गया। उनकी मौत ने पूरे उद्योग जगत को झकझोर दिया।
इसके बाद उनकी पत्नी मालविका हेगड़े ने कंपनी की कमान संभाली। उन्होंने कर्ज कम करने, कारोबार को स्थिर करने और कंपनी को फिर से पटरी पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज भी कायम है उनकी विरासत
आज भारतीय बाजार में कई घरेलू और वैश्विक कॉफी ब्रांड मौजूद हैं, लेकिन कैफे कॉफी डे का नाम अब भी भारतीय कैफे संस्कृति का पर्याय माना जाता है।
वी.जी. सिद्धार्थ की कहानी सिर्फ एक सफल कारोबारी की नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी उद्यमी की है जिसने चाय पसंद करने वाले देश में कॉफी को नई पहचान दी और भारत में आधुनिक कैफे संस्कृति की मजबूत नींव रखी। उनके विजन ने लाखों युवाओं की जीवनशैली बदली और भारतीय रिटेल उद्योग में एक नया अध्याय जोड़ा।


