नई दिल्ली: भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के मामले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की ‘विश्व निवेश रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) 44 प्रतिशत बढ़कर 39 अरब डॉलर पहुंच गया। इस बढ़ोतरी के साथ भारत ने दुनिया के प्रमुख निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।
हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर नए निवेश प्रोजेक्ट्स पर दिखाई दिया है। इसके बावजूद सेवा (Services) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे क्षेत्रों में निवेश मजबूत बना हुआ है।
Highlights
- 2025 में भारत का FDI 44% बढ़कर 39 अरब डॉलर पहुंचा।
- UNCTAD ने भारत को प्रमुख वैश्विक निवेश गंतव्य बताया।
- दक्षिण एशिया में FDI बढ़कर 46 अरब डॉलर हुआ।
- सेवा और ICT सेक्टर में निवेश मजबूत बना रहा।
- वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते नए प्रोजेक्ट्स और मैन्युफैक्चरिंग निवेश में गिरावट दर्ज हुई।
वैश्विक स्तर पर भी बढ़ा विदेशी निवेश
UNCTAD की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में वैश्विक FDI प्रवाह 6 प्रतिशत बढ़कर 1.6 ट्रिलियन डॉलर हो गया। विकसित देशों में विदेशी निवेश 11 प्रतिशत और विकासशील देशों में 2 प्रतिशत बढ़ा।
दक्षिण एशिया में FDI 34 अरब डॉलर से बढ़कर 46 अरब डॉलर पहुंचा, जिसमें सबसे बड़ा योगदान भारत का रहा। भारत में 39 अरब डॉलर का निवेश इस क्षेत्र की मजबूत आर्थिक संभावनाओं को दर्शाता है।
भारत क्यों बन रहा है निवेशकों की पसंद?
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने निवेश आकर्षित करने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार किए हैं। इनमें प्रमुख हैं—
- प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना
- मेक इन इंडिया अभियान
- स्टार्ट-अप इंडिया
- नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम
इन पहलों की मदद से इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अन्य उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिला है।
कारोबार करना हुआ आसान
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार द्वारा लागू किए गए कई सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। इनमें शामिल हैं—
- नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम
- इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक
- नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना
- प्रोजेक्ट डेवलपमेंट सेल
- प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप
इन व्यवस्थाओं ने विदेशी कंपनियों के लिए मंजूरी प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया है, जिससे निवेश का माहौल बेहतर हुआ है।
नए प्रोजेक्ट्स में आई सुस्ती
हालांकि कुल FDI में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार नए निवेश प्रोजेक्ट्स की रफ्तार कुछ धीमी रही।
- 2024 में नए प्रोजेक्ट्स का कुल मूल्य 111 अरब डॉलर था।
- 2025 में यह घटकर करीब 74 अरब डॉलर रह गया।
- नए प्रोजेक्ट्स की संख्या में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई।
UNCTAD का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, व्यापारिक तनाव, सप्लाई चेन में बदलाव और निवेशकों की सतर्क रणनीति का परिणाम है।
मैन्युफैक्चरिंग में गिरावट, ICT सेक्टर बना सबसे मजबूत
रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में घोषित निवेश का मूल्य 2024 के लगभग 65 अरब डॉलर से घटकर 2025 में 27 अरब डॉलर रह गया।
इसके विपरीत, इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) सेक्टर सबसे मजबूत निवेश आकर्षित करने वाला क्षेत्र बनकर उभरा। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, क्लाउड टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेवाओं में लगातार बढ़ते निवेश ने इस क्षेत्र को नई मजबूती दी।
इसके अलावा वित्तीय सेवाओं (Financial Services) में भी निवेश गतिविधियां बढ़ती हुई दिखाई दीं।
आगे क्या है चुनौती?
UNCTAD का कहना है कि टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं, वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और कमजोर वैश्विक निवेश माहौल आने वाले समय में बड़े मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गति को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद भारत की नीतिगत स्थिरता, डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुधारों की दिशा विदेशी निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


