भारत का सरकारी गोल्ड रिजर्व लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। सोने की कीमतों में तेज उछाल और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लगातार खरीदारी के चलते देश के आधिकारिक गोल्ड रिजर्व का मूल्य बढ़कर 115.8 अरब डॉलर (करीब ₹10 लाख करोड़) पहुंच गया है। इसके साथ ही भारत के पास मौजूद सरकारी सोने का भंडार 880.5 टन हो गया है।
सोना अब केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक सुरक्षा और विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
RBI के पास है भारत का सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व
भारत के सरकारी सोने का पूरा भंडार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास सुरक्षित रहता है। आरबीआई देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का प्रबंधन करता है और उसी के तहत गोल्ड रिजर्व भी रखा जाता है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार:
- सरकारी गोल्ड रिजर्व: 880.5 टन
- कुल अनुमानित मूल्य: 115.8 अरब डॉलर (लगभग ₹10 लाख करोड़)
- विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी: 17%
- एक साल पहले यह हिस्सेदारी: 12%
दो साल में लगभग दोगुनी हुई वैल्यू
सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में जबरदस्त तेजी ने भारत के गोल्ड रिजर्व की कीमत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।
- 2024 की शुरुआत में सोने की कीमत लगभग 2,000 डॉलर प्रति औंस थी।
- 2026 में यह बढ़कर 4,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई।
यानी कीमतों में आई इस तेजी ने बिना अतिरिक्त खरीदारी के भी आरबीआई के गोल्ड रिजर्व की डॉलर वैल्यू को काफी बढ़ा दिया।
लगातार बढ़ा रहा है गोल्ड रिजर्व
आरबीआई कई वर्षों से अपनी रिजर्व डाइवर्सिफिकेशन रणनीति के तहत सोने का भंडार बढ़ा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक:
| वर्ष | गोल्ड रिजर्व |
|---|---|
| 2015 की पहली तिमाही | 557.8 टन |
| 2026 की पहली तिमाही | 880.5 टन |
यानी पिछले एक दशक में भारत ने करीब 323 टन अतिरिक्त सोना खरीदा है, जो लगभग 58% की बढ़ोतरी है।
क्यों खरीद रहे हैं सेंट्रल बैंक इतना सोना?
रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बावजूद भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं (Emerging Markets) के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं।
- भू-राजनीतिक तनाव से सुरक्षा
- वैश्विक वित्तीय प्रतिबंधों का जोखिम कम करना
- डॉलर जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता घटाना
- विदेशी मुद्रा भंडार को अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाना
- लंबे समय में सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset)
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेज हुई खरीदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने अपनी रिजर्व रणनीति पर दोबारा विचार किया। कई देशों ने विदेशी मुद्रा के बजाय सोने को अधिक सुरक्षित संपत्ति माना, जिसके बाद गोल्ड खरीदने की रफ्तार तेज हो गई।
भारत ने भी इसी दौरान अपने गोल्ड रिजर्व में लगातार इजाफा किया।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है गोल्ड रिजर्व?
सरकारी गोल्ड रिजर्व किसी भी देश की वित्तीय मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। मजबूत गोल्ड रिजर्व से:
- विदेशी मुद्रा भंडार अधिक सुरक्षित होता है।
- आर्थिक संकट के समय अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।
- वैश्विक अनिश्चितता के दौरान जोखिम कम होता है।
- निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है।
- देश की वित्तीय स्थिरता को समर्थन मिलता है।
निष्कर्ष
सोने की रिकॉर्ड कीमतों और आरबीआई की लगातार खरीदारी के कारण भारत का सरकारी गोल्ड रिजर्व अब 880.5 टन तक पहुंच चुका है, जिसकी अनुमानित कीमत 115.8 अरब डॉलर (करीब ₹10 लाख करोड़) है। बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक माहौल में सोना भारत की रिजर्व रणनीति का अहम स्तंभ बन गया है और आने वाले समय में भी इसकी भूमिका और मजबूत रहने की संभावना है।


