नई दिल्ली, 13 अप्रैल: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Mohammad Fathali ने भारत को एक “विश्वसनीय और संवेदनशील साझेदार” बताते हुए कहा है कि ईरान भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना चाहता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब Strait of Hormuz को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी हुई है और समुद्री व्यापार पर इसका असर साफ दिखने लगा है।
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरानी राजदूत ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच मजबूत कूटनीतिक और लोगों के स्तर पर संबंध हैं, और मौजूदा संकट के दौरान भी यह भरोसा कायम है। उन्होंने कहा कि ईरान भारतीय जहाजों के लिए बेहतर तैयारी और सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत-ईरान संबंधों की मजबूती पर जोर
राजदूत फथाली ने अपने बयान में भारत को उन देशों में शामिल बताया जिन्हें ईरान “दोस्त” मानता है। उन्होंने भारतीय सरकार और जनता दोनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में भारत ने सहयोग और संवेदनशीलता दिखाई है।
यह बयान केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि वर्तमान संकट में एक रणनीतिक संकेत भी है। भारत, जो ऊर्जा आयात के लिए मध्य पूर्व पर काफी निर्भर है, उसके लिए ईरान के साथ स्थिर संबंध बेहद महत्वपूर्ण हैं।
Strait of Hormuz क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करता है।
ईरानी राजदूत ने इस जलमार्ग को अपने “क्षेत्रीय अधिकार” का हिस्सा बताते हुए कहा कि ईरान इसकी सुरक्षा और नियंत्रण के प्रति गंभीर है। उनका यह बयान उस समय आया है जब इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव गहराता जा रहा है।
अमेरिका और इजरायल पर लगाए आरोप
राजदूत फथाली ने अपने बयान में United States और Israel पर समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान ने बातचीत का रास्ता अपनाया, लेकिन बाहरी ताकतों की कार्रवाई के कारण हालात बिगड़े।
उन्होंने “12 दिनों के युद्ध” का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान पर हमले किए गए, जबकि वह बातचीत की प्रक्रिया में शामिल था। यह बयान क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ते अविश्वास और तनाव को दर्शाता है।
भारतीय जहाजों की आवाजाही: Jag Vikram का उदाहरण
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच एक सकारात्मक संकेत भी सामने आया है। भारतीय झंडा लगा LPG टैंकर Jag Vikram सफलतापूर्वक इस जलमार्ग को पार कर चुका है और भारत की ओर बढ़ रहा है।
यह जहाज 24 भारतीय क्रू सदस्यों के साथ पर्शियन गल्फ क्षेत्र से निकला और सुरक्षित रूप से Gulf of Oman तक पहुंच गया। इस घटनाक्रम की पुष्टि Sarbananda Sonowal ने की, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राहत की खबर है।
अन्य भारतीय जहाज भी सुरक्षित
Jag Vikram अकेला जहाज नहीं है। इससे पहले भी कई भारतीय जहाज इस क्षेत्र से सुरक्षित निकल चुके हैं, जिनमें MT Shivalik, MT Nanda Devi, Pine Gas, Jag Vasant, BW TYR, BW ELM, Green Asha और Green Sanvi शामिल हैं।
यह दर्शाता है कि भले ही क्षेत्र में तनाव है, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों और समन्वय के जरिए भारत अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रहा है।
भारत सरकार की कूटनीतिक भूमिका
S Jaishankar ने पहले ही स्पष्ट किया था कि भारतीय जहाजों के लिए कोई “blanket arrangement” नहीं है, लेकिन जरूरत के अनुसार ईरान के साथ सीधे संवाद किया जा रहा है।
इसका मतलब है कि हर जहाज के लिए अलग-अलग स्तर पर बातचीत और समन्वय किया जा रहा है, जो भारत की सक्रिय कूटनीति को दर्शाता है।
Donald Trump के बयान से बढ़ी चिंता
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब Donald Trump ने Strait of Hormuz में नौसैनिक नाकाबंदी (naval blockade) की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना किसी भी ऐसे जहाज को रोक सकती है जो इस क्षेत्र से गुजरने की कोशिश करेगा।
यह बयान वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। यदि यह नाकाबंदी पूरी तरह लागू होती है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
भारत के लिए क्या हैं जोखिम?
भारत के लिए यह स्थिति कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण है:
- ऊर्जा सुरक्षा पर असर
- तेल की कीमतों में बढ़ोतरी
- शिपिंग लागत में वृद्धि
- व्यापार में बाधा
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात के जरिए पूरा करता है, और इसका एक बड़ा भाग इसी मार्ग से आता है। ऐसे में Strait of Hormuz में किसी भी तरह की रुकावट भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
क्या समाधान संभव है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति का एकमात्र समाधान कूटनीति और संवाद है। यदि अमेरिका, ईरान और अन्य संबंधित देश बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं, तो स्थिति सामान्य हो सकती है।
भारत जैसे देशों के लिए संतुलित विदेश नीति (balanced foreign policy) ही सबसे बड़ा हथियार है, जिससे वह दोनों पक्षों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों की रक्षा कर सकता है।
निष्कर्ष
ईरान द्वारा भारत को “reliable partner” बताया जाना केवल एक बयान नहीं, बल्कि मौजूदा वैश्विक संकट में भारत की बढ़ती कूटनीतिक अहमियत का संकेत है। हालांकि, Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव और अमेरिकी नीतियां आने वाले दिनों में स्थिति को और जटिल बना सकती हैं।
ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि वह अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए सावधानी और संतुलन के साथ आगे बढ़े।
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