नई दिल्ली: भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और यहां उगाए जाने वाले कई प्रीमियम आम विदेशी बाजारों में भी बेहद लोकप्रिय हैं। भारतीय आमों की बढ़ती वैश्विक मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एयर इंडिया ने मार्च से मई 2026 के बीच 1,000 टन से अधिक आमों का निर्यात किया। एयरलाइन के अनुसार इस दौरान कुल 3,300 टन से अधिक नाशवंत कृषि और समुद्री उत्पादों का परिवहन किया गया, जिसमें आमों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही।
भारतीय आमों की मांग खासतौर पर यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया के देशों में तेजी से बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो गर्मियों के मौसम में भारतीय आमों को प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि एयर कार्गो कंपनियां भी अब आमों के निर्यात के लिए विशेष कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही हैं।
अल्फांसो और केसर आम की विदेशों में सबसे ज्यादा मांग
भारत में आम की हजारों किस्में उगाई जाती हैं, लेकिन विदेशी बाजारों में कुछ चुनिंदा प्रीमियम किस्मों की मांग सबसे अधिक रहती है। एयर इंडिया के अनुसार इस वर्ष निर्यात किए गए आमों में मुख्य रूप से अल्फांसो (Alphonso) और केसर (Kesar) किस्मों की हिस्सेदारी रही।
अल्फांसो आम मुख्य रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी, देवगढ़ और कोंकण क्षेत्र में उगाया जाता है। इसे आमों का राजा भी कहा जाता है। इसकी मिठास, सुगंध और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण यह यूरोप और अमेरिका में बेहद लोकप्रिय है।
वहीं गुजरात के गिर और जूनागढ़ क्षेत्रों में उगाया जाने वाला केसर आम भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान रखता है। इसका गूदा गाढ़ा, मीठा और कम रेशेदार होता है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
मुंबई बना आम निर्यात का सबसे बड़ा केंद्र
महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख आम उत्पादक राज्यों के नजदीक होने के कारण मुंबई भारतीय आमों के निर्यात का सबसे बड़ा हब बनकर उभरा है। एयर इंडिया के अनुसार व्यस्त सीजन के दौरान मुंबई से लंदन हीथ्रो एयरपोर्ट तक हर सप्ताह लगभग 180 टन आम भेजे गए।
इसके अलावा जर्मनी के फ्रैंकफर्ट के लिए करीब 40 टन प्रति सप्ताह और दुबई, नेवार्क तथा न्यूयॉर्क के जॉन एफ. केनेडी (JFK) एयरपोर्ट के लिए लगभग 30 टन प्रति सप्ताह आमों का निर्यात किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयर कार्गो के जरिए निर्यात होने से आमों की गुणवत्ता और ताजगी बरकरार रहती है, जिससे विदेशी बाजारों में भारतीय आमों की प्रतिष्ठा और मजबूत होती है।
कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा निवेश
फल और सब्जियों के निर्यात में सबसे बड़ी चुनौती उनकी ताजगी बनाए रखना होती है। इसे ध्यान में रखते हुए एयर इंडिया ने देश और विदेश के कई एयरपोर्ट पर कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार किया है।
एयरलाइन ने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लंदन हीथ्रो, फ्रैंकफर्ट, जेएफके और नेवार्क समेत कुल 14 हवाई अड्डों पर कोल्ड स्टोरेज और एक्टिव कंटेनर क्षमता विकसित की है।
इसके अलावा आमों को परिवहन के दौरान सुरक्षित रखने के लिए कूल डॉली, तापमान नियंत्रित कंटेनर और थर्मल ब्लैंकेट जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे फलों की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती और वे लंबी दूरी तक ताजा बने रहते हैं।
भारतीय कृषि निर्यात को मिल रहा बड़ा फायदा
भारतीय आमों की बढ़ती मांग केवल किसानों के लिए ही नहीं बल्कि देश की कृषि निर्यात अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के आंकड़ों के अनुसार भारत हर साल हजारों करोड़ रुपये मूल्य के फलों और कृषि उत्पादों का निर्यात करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोल्ड-चेन नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तो भारत आम निर्यात में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ा सकता है। वर्तमान में भारतीय आम अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और यूरोप के कई देशों में निर्यात किए जाते हैं।
भारतीय मूल के लोगों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय
एयर इंडिया के कार्गो प्रमुख रमेश मामिडाला ने कहा कि केवल तीन महीनों में 1,000 टन से अधिक आमों का परिवहन किया जाना भारतीय आमों की जबरदस्त वैश्विक मांग को दर्शाता है। उनके अनुसार विदेशी बाजारों में भारतीय आमों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, खासकर उन देशों में जहां भारतीय समुदाय बड़ी संख्या में मौजूद है।
गर्मियों के मौसम में भारतीय परिवार पारंपरिक रूप से आम का सेवन करते हैं और यही परंपरा विदेशों में बसे भारतीय भी निभाते हैं। इस कारण अल्फांसो और केसर जैसी किस्मों की मांग हर साल बढ़ती जा रही है।
आगे और बढ़ सकता है निर्यात
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास आम उत्पादन, विविधता और गुणवत्ता के मामले में दुनिया के अधिकांश देशों पर बढ़त है। यदि निर्यात प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाए तथा एयर कार्गो क्षमता बढ़ाई जाए तो आने वाले वर्षों में भारतीय आमों का निर्यात कई गुना बढ़ सकता है।
भारतीय आम अब केवल एक फल नहीं बल्कि भारत की कृषि शक्ति और वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुके हैं। एयर इंडिया के ताजा आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि दुनिया भर में भारतीय आमों का स्वाद लगातार लोगों को आकर्षित कर रहा है।


