नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारत ने पहली बार उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आम समुद्री रास्ते से दुबई भेजकर नई उपलब्धि हासिल की है। इस सफल निर्यात ने साबित कर दिया है कि अब भारतीय आम कम लागत में भी विदेशी बाजारों तक बेहतरीन गुणवत्ता के साथ पहुंचाए जा सकते हैं। इस उपलब्धि से किसानों की कमाई बढ़ने के साथ-साथ भारतीय आमों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी।
हाईलाइट्स
- अमरोहा से दुबई भेजी गई 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम की पहली समुद्री खेप
- पहली बार 25 दिन की यात्रा के बाद भी बरकरार रही आमों की गुणवत्ता
- किसानों को मिला 15-20 रुपये प्रति किलो तक अतिरिक्त लाभ
- APEDA और ICAR-CISH ने विकसित किया समुद्री निर्यात प्रोटोकॉल
- दुबई के Lulu Group को भेजी गई खेप
पहली बार समुद्री रास्ते से पहुंचा UP का आम
कृषि मंत्रालय के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अमरोहा से दुबई तक 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आमों की पहली सफल वाणिज्यिक समुद्री खेप भेजी गई। यह खेप फसल की कटाई से लेकर दुबई के बाजार तक पहुंचने में लगभग 25 दिन का समय लेकर पहुंची।
अब तक भारतीय प्रीमियम आमों का निर्यात मुख्य रूप से हवाई मार्ग से किया जाता था, जिससे लागत काफी अधिक आती थी। लेकिन इस नई तकनीक ने समुद्री मार्ग को भी व्यवहारिक और किफायती विकल्प साबित कर दिया है।
APEDA और ICAR-CISH ने तैयार किया नया मॉडल
समुद्री मार्ग से आम भेजने की इस तकनीक को एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) और ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (ICAR-CISH), लखनऊ ने मिलकर विकसित किया।
कटाई के बाद आमों की वैज्ञानिक तरीके से ग्रेडिंग, पैकेजिंग, तापमान नियंत्रण और गुणवत्ता संरक्षण किया गया, जिससे 25 दिनों की समुद्री यात्रा के बाद भी आम पूरी तरह ताजे और बाजार योग्य बने रहे।
किसानों को मिला 15-20 रुपये प्रति किलो ज्यादा दाम
कृषि मंत्रालय ने बताया कि समुद्री परिवहन की लागत हवाई मार्ग की तुलना में काफी कम होती है। इसी वजह से निर्यातकों ने किसानों से आम 15 से 20 रुपये प्रति किलो अधिक कीमत पर खरीदे।
इससे किसानों की आय में सीधा इजाफा हुआ और उन्हें अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर अपनाया गया तो उत्तर प्रदेश के हजारों आम उत्पादकों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
दुबई के Lulu Group को भेजी गई खेप
यह खेप अमरोहा की शहनाज एक्सपोर्ट ने अताशी ग्लोबल के सहयोग से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की प्रमुख रिटेल चेन Lulu Group को भेजी।
आमों की तुड़ाई 22 जून को की गई थी। इसके बाद वैज्ञानिक तरीके से पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट किया गया ताकि लंबी समुद्री यात्रा के दौरान गुणवत्ता प्रभावित न हो।
खाड़ी देशों में बढ़ेगा भारतीय आम का बाजार
कृषि मंत्रालय का मानना है कि इस सफलता के बाद खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय आमों का समुद्री निर्यात तेजी से बढ़ सकता है। इससे:
- निर्यात लागत कम होगी।
- भारतीय आम अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
- किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी।
- निर्यातकों का मुनाफा बढ़ेगा।
- नए वैश्विक बाजार खुलेंगे।
जापान के बाद दुबई बना बड़ा बाजार
हाल के दिनों में भारतीय आमों के कुछ निर्यात खेपों को जापान में गुणवत्ता संबंधी कारणों से अस्वीकार किए जाने की खबरें चर्चा में रही थीं। ऐसे समय में दुबई के लिए समुद्री मार्ग से 12.5 टन आमों की सफल आपूर्ति भारत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि बेहतर पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए भारतीय आम वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए रख सकते हैं।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही मॉडल उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और अन्य आम उत्पादक राज्यों में भी लागू किया जाता है तो भारत ताजे आमों के वैश्विक निर्यात में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ा सकता है। कम लागत, बेहतर गुणवत्ता और अधिक मुनाफे का यह मॉडल किसानों और निर्यातकों दोनों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है।


