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Reading: होर्मुज संकट से अमेरिका को सबसे ज्यादा फायदा? रोसनेफ्ट CEO का बड़ा दावा, तेल की मांग को लेकर दी गंभीर चेतावनी
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होर्मुज संकट से अमेरिका को सबसे ज्यादा फायदा? रोसनेफ्ट CEO का बड़ा दावा, तेल की मांग को लेकर दी गंभीर चेतावनी

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 6:41 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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11 Min Read
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ती अनिश्चितता के बीच रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इगोर सेचिन ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सेचिन का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुई बाधाओं और अस्थिरता का सबसे बड़ा लाभ अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को मिला है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो दुनिया में कच्चे तेल की मांग घट सकती है और देशों का झुकाव वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ सकता है।

Contents
आखिर क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को कैसे मिला फायदा?तेल की मांग घटने की आशंका क्यों?कच्चे तेल की कीमतों पर क्या है अनुमान?चीन को बताया बेहतर तैयारअन्य समुद्री चोकपॉइंट्स पर भी मंडरा रहा खतरादुनिया के सामने संसाधनों की नई चुनौतीOPEC+ की प्रभावशीलता पर सवालरूस के तेल उत्पादन में आई गिरावटनिवेशकों और भारत के लिए क्या मायने?

सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में दिए गए अपने संबोधन में सेचिन ने वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था, तेल बाजार, OPEC+ की भूमिका और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से बात की। उनकी टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब दुनिया की नजरें मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।

आखिर क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा किसी न किसी रूप में इस समुद्री मार्ग पर निर्भर करता है।

यही कारण है कि जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से प्रभावित होती हैं। निवेशक और ऊर्जा कंपनियां तुरंत संभावित आपूर्ति संकट की आशंका को कीमतों में शामिल करने लगती हैं।

इगोर सेचिन का मानना है कि हालिया घटनाक्रमों ने ऊर्जा बाजार के संतुलन को बदल दिया है और इसका सीधा फायदा अमेरिका को मिला है।

अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को कैसे मिला फायदा?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेचिन ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में बाधा आने से ऊर्जा बाजार में प्रतिस्पर्धा कम हुई है। उनका तर्क है कि जब मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति पर खतरा बढ़ता है तो वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में अमेरिका जैसे बड़े तेल और गैस उत्पादक देशों को अधिक अवसर मिलते हैं।

सेचिन के अनुसार अमेरिकी कंपनियां ऐसी स्थिति में ऊंची कीमतों का लाभ उठाने में सक्षम होती हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में अनिश्चितता जितनी बढ़ती है, अमेरिका के ऊर्जा निर्यातकों की स्थिति उतनी मजबूत होती जाती है।

उनका यह भी दावा था कि ईरान को निशाना बनाने के लिए उठाए गए कदमों के वैश्विक ऊर्जा बाजार पर व्यापक और अप्रत्याशित प्रभाव पड़े हैं, जिनका फायदा अमेरिकी ऊर्जा उद्योग को मिला है।

हालांकि, कई पश्चिमी विश्लेषक इस दावे को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते। उनका मानना है कि ऊंची तेल कीमतों से अमेरिकी उत्पादकों को फायदा जरूर होता है, लेकिन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अंततः सभी ऊर्जा कंपनियों के लिए जोखिम पैदा करती है।

तेल की मांग घटने की आशंका क्यों?

सेचिन की सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी तेल की दीर्घकालिक मांग को लेकर थी। उन्होंने कहा कि यदि होर्मुज स्ट्रेट और अन्य रणनीतिक समुद्री मार्गों में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है तो दुनिया के कई देश ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए विकल्प तलाशने लगेंगे।

ऊर्जा विशेषज्ञ लंबे समय से मानते रहे हैं कि लगातार ऊंची तेल कीमतें इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और हाइड्रोजन जैसे विकल्पों को अधिक आकर्षक बनाती हैं। जब तेल महंगा होता है तो उद्योग और सरकारें वैकल्पिक ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश बढ़ाती हैं।

सेचिन का कहना है कि यही प्रक्रिया भविष्य में वैश्विक तेल मांग को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुसार यदि ऊर्जा आपूर्ति को लेकर लगातार जोखिम बने रहे तो कई देश तेल पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश करेंगे।

कच्चे तेल की कीमतों पर क्या है अनुमान?

रोसनेफ्ट प्रमुख ने भविष्य की तेल कीमतों को लेकर भी अनुमान पेश किया। उन्होंने कहा कि यदि आने वाले समय में होर्मुज स्ट्रेट फिर से सामान्य रूप से संचालित होने लगता है तो बाजार में धीरे-धीरे स्थिरता लौट सकती है।

उनके अनुमान के अनुसार:

  • वर्ष 2026 के अंत तक कच्चे तेल की कीमत 95-96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकती है।
  • अगले एक वर्ष में यह घटकर 80-85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ सकती है।
  • वर्ष 2027 की दूसरी छमाही तक बाजार सामान्य स्थिति की ओर लौट सकता है।

यह अनुमान निवेशकों और तेल आयातक देशों दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि तेल कीमतों का सीधा असर मुद्रास्फीति, परिवहन लागत और आर्थिक विकास पर पड़ता है।

चीन को बताया बेहतर तैयार

इगोर सेचिन ने अपने संबोधन में चीन की ऊर्जा रणनीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अन्य कई देशों की तुलना में चीन इस तरह के ऊर्जा संकटों का सामना करने के लिए बेहतर तैयार दिखाई देता है।

इसके पीछे उन्होंने चीन की दीर्घकालिक सरकारी नीतियों, रणनीतिक तेल भंडार और ऊर्जा विविधीकरण की योजनाओं को कारण बताया। चीन पिछले कई वर्षों से तेल, गैस, नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा में समानांतर निवेश कर रहा है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि चीन ने ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है, जिससे वह वैश्विक झटकों का प्रभाव कुछ हद तक कम कर पाता है।

अन्य समुद्री चोकपॉइंट्स पर भी मंडरा रहा खतरा

सेचिन ने केवल होर्मुज स्ट्रेट की चिंता नहीं जताई। उन्होंने दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का भी जिक्र किया, जिनमें मलक्का स्ट्रेट, बाब-अल-मंदेब और जिब्राल्टर स्ट्रेट शामिल हैं।

इन मार्गों से भी बड़ी मात्रा में तेल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं का व्यापार होता है। यदि इनमें से किसी भी मार्ग में बाधा आती है तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।

पिछले कुछ वर्षों में लाल सागर क्षेत्र और बाब-अल-मंदेब के आसपास सुरक्षा संबंधी घटनाओं ने यह दिखाया है कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

दुनिया के सामने संसाधनों की नई चुनौती

अपने भाषण में सेचिन ने केवल तेल बाजार की बात नहीं की बल्कि भविष्य में संभावित संसाधन संकट को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि दुनिया धीरे-धीरे ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है जहां बिजली, खाद्य सामग्री, तांबा, अन्य औद्योगिक धातुएं और स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन सकती है।

ऊर्जा संक्रमण की प्रक्रिया में तांबा, लिथियम और अन्य धातुओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के कारण इन संसाधनों की जरूरत पहले से कहीं अधिक हो गई है।

OPEC+ की प्रभावशीलता पर सवाल

रोसनेफ्ट प्रमुख ने OPEC+ समूह की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समय के साथ इस गठबंधन की प्रभावशीलता में कमी आई है।

सेचिन के अनुसार पिछले दशक में OPEC+ समूह का संयुक्त उत्पादन 58 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर लगभग 37 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कई सदस्य देशों के उत्पादन स्तर और रणनीतियों में बदलाव से समूह की सामूहिक क्षमता प्रभावित हुई है।

हालांकि OPEC+ अभी भी वैश्विक तेल बाजार का सबसे प्रभावशाली गठबंधन माना जाता है और उसके उत्पादन फैसले सीधे तौर पर तेल कीमतों को प्रभावित करते हैं।

रूस के तेल उत्पादन में आई गिरावट

सेचिन ने रूस के तेल उद्योग की चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2016 में OPEC+ समझौते के बाद रूस का तेल उत्पादन लगभग 15 प्रतिशत घटा है।

उनके अनुसार उत्पादन में यह गिरावट लगभग 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन के बराबर है। इसकी भरपाई करने के लिए रूस को भारी निवेश की आवश्यकता होगी। उन्होंने अनुमान लगाया कि इसके लिए कम से कम 10 ट्रिलियन रूबल के निवेश की जरूरत पड़ सकती है।

रूस भविष्य में OPEC+ देशों के साथ निवेश और उत्पादन सहयोग को मजबूत करने की उम्मीद कर रहा है।

निवेशकों और भारत के लिए क्या मायने?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी कोई भी खबर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि तेल कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर पेट्रोल-डीजल की लागत, परिवहन खर्च, महंगाई और चालू खाते के घाटे पर पड़ सकता है।

दूसरी ओर यदि सेचिन का अनुमान सही साबित होता है और अगले एक-दो वर्षों में तेल कीमतें नीचे आती हैं तो भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिल सकती है।

फिलहाल ऊर्जा बाजार भू-राजनीतिक घटनाओं, वैश्विक आर्थिक विकास और OPEC+ की नीतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे माहौल में होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा हर घटनाक्रम आने वाले महीनों में तेल बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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