Timor-Leste Invites India for LNG Investment: दक्षिण-पूर्व एशियाई देश तिमोर-लेस्ते ने भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। देश ने भारतीय कंपनियों को एलएनजी (Liquefied Natural Gas), तेल रिफाइनिंग, पाइपलाइन परियोजनाओं, शिक्षा और कॉफी उद्योग में निवेश के लिए खुला निमंत्रण दिया है। तिमोर-लेस्ते के पूर्व उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री तथा वर्तमान में अमेरिका में राजदूत जोस लुइस गुटेरेस ने कहा कि भारत के साथ संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
ऊर्जा क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा अवसर
राजदूत जोस लुइस गुटेरेस ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में कहा कि तिमोर-लेस्ते के पास तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार हैं, जिनके विकास के लिए विदेशी निवेश की जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय कंपनियों को एलएनजी प्लांट, तेल रिफाइनरी और गैस पाइपलाइन परियोजनाओं में निवेश करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि देश ऊर्जा क्षेत्र में भारत, अमेरिका और अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है और निवेशकों के लिए सभी दरवाजे खुले हैं।
ग्रेटर सनराइज गैस क्षेत्र में 30 वर्षों तक उत्पादन की क्षमता
गुटेरेस के अनुसार, ग्रेटर सनराइज गैस क्षेत्र में करीब 5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस का अनुमानित भंडार मौजूद है। इस परियोजना से लगभग 30 वर्षों तक गैस उत्पादन किया जा सकता है। इसके लिए एलएनजी संयंत्र, पाइपलाइन और अन्य ऊर्जा अवसंरचना विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय सार्वजनिक और निजी कंपनियां इन परियोजनाओं में निवेश करती हैं तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।
भारत-तिमोर-लेस्ते संबंधों को मिली नई गति
राजदूत ने कहा कि नई दिल्ली में तिमोर-लेस्ते का दूतावास और दिली में भारत के राजनयिक मिशन की स्थापना से दोनों देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तिमोर-लेस्ते का दौरा करेंगे, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा रही ऐतिहासिक
गुटेरेस ने कहा कि अगस्त 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तिमोर-लेस्ते यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में मील का पत्थर साबित हुई। उन्होंने इस यात्रा को “परिवार जैसा संबंध” बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का वहां बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
उनके अनुसार, इस यात्रा के बाद भारत और तिमोर-लेस्ते के बीच सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।
भारत को बताया क्षेत्र का स्वाभाविक साझेदार
तिमोर-लेस्ते के राजदूत ने कहा कि उनका देश भारत को किसी बाहरी शक्ति के रूप में नहीं देखता, बल्कि लंबे समय से क्षेत्रीय साझेदार मानता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना करते हुए कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
शिक्षा और मेडिकल सेक्टर में भी बढ़ रहा सहयोग
ऊर्जा के अलावा शिक्षा भी दोनों देशों के बीच तेजी से उभरता सहयोग का क्षेत्र बन रहा है। गुटेरेस ने बताया कि एक भारतीय निवेशक ने तिमोर-लेस्ते के एक कैथोलिक विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी कर चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने की पहल की है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय छात्र दिली में मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिससे शैक्षणिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
तिमोरी ऑर्गेनिक कॉफी में भी निवेश की संभावना
राजदूत ने कहा कि तिमोर-लेस्ते की ऑर्गेनिक कॉफी दुनिया भर में अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है। वर्तमान में यह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और जर्मनी जैसे देशों को निर्यात की जाती है।
उन्होंने कहा कि भारत भी इस क्षेत्र में निवेश और व्यापार बढ़ा सकता है। राष्ट्रपति जोस रामोस-होर्ता ने अपनी भारत यात्रा के दौरान भी तिमोरी कॉफी को बढ़ावा दिया था।
भारत-तिमोर-लेस्ते संबंधों का संक्षिप्त इतिहास
भारत और तिमोर-लेस्ते के बीच जनवरी 2003 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। अगस्त 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तिमोर-लेस्ते की यात्रा करने वाली पहली भारतीय राष्ट्राध्यक्ष बनीं। इस दौरान डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, कृषि और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी।
इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में तिमोर-लेस्ते आधिकारिक रूप से आसियान (ASEAN) का 11वां सदस्य बना, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग में उसकी भूमिका और मजबूत हुई।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रस्ताव?
तिमोर-लेस्ते का यह निवेश प्रस्ताव भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- एलएनजी और गैस परियोजनाओं में निवेश से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
- भारतीय कंपनियों को दक्षिण-पूर्व एशिया में नए कारोबारी अवसर मिलेंगे।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के संबंध और गहरे होंगे।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को भी मजबूती मिलेगी।


