मुंबई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर पर भारी दबाव देखने को मिला। बुधवार के कारोबार में निफ्टी फार्मा इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जबकि ग्लैंड फार्मा, ल्यूपिन, पीरामल फार्मा और जेबी केमिकल्स जैसे प्रमुख शेयरों में 3-5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
ट्रंप की नई टैरिफ नीति का उद्देश्य अमेरिका में जेनेरिक दवाओं के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना बताया जा रहा है। हालांकि, इस घोषणा ने भारतीय दवा कंपनियों के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि अमेरिका भारतीय फार्मा उद्योग का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है।
ट्रंप ने क्या किया ऐलान?
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर नई टैरिफ व्यवस्था लागू की जाएगी।
नई योजना के अनुसार:
- 1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक जेनेरिक दवाओं पर कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगेगा।
- अगस्त 2028 से इन दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाएगा।
- अगस्त 2029 से टैरिफ बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
ट्रंप ने कहा कि कंपनियों को अमेरिका में अपने उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। यदि कंपनियां ऐसा नहीं करती हैं तो उन्हें भारी आयात शुल्क का सामना करना पड़ेगा।
किन फार्मा शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे तक कई प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
| कंपनी | गिरावट |
|---|---|
| ग्लैंड फार्मा | 4.62% |
| पीरामल फार्मा | 3.92% |
| जेबी केमिकल्स | 3.87% |
| ल्यूपिन | 3.81% |
| अजंता फार्मा | 3.03% |
| सिप्ला | 1.87% |
| मैनकाइंड फार्मा | 1.69% |
| डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज | 1.49% |
| बायोकॉन | 1.01% |
| सन फार्मा | 1.00% |
इन शेयरों में बिकवाली का मुख्य कारण अमेरिकी बाजार में भविष्य की मांग और मुनाफे पर संभावित असर को लेकर निवेशकों की चिंता रही।
भारतीय फार्मा कंपनियों पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में शामिल है और अमेरिकी बाजार भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्यात गंतव्य माना जाता है।
यदि प्रस्तावित टैरिफ तय समय पर लागू होते हैं तो:
- अमेरिका को होने वाला भारतीय जेनेरिक दवाओं का निर्यात महंगा हो सकता है।
- भारतीय कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
- कई कंपनियों को अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर विचार करना पड़ सकता है।
- निर्यात आधारित कंपनियों की आय और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि कंपनियों के पास अगले दो वर्षों का समय होगा, जिससे वे अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती हैं।
ब्रांडेड दवाओं पर नहीं होगा असर
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि नई नीति केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगी। पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं के लिए मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
उनके अनुसार इस फैसले का उद्देश्य अमेरिका में दवा निर्माण बढ़ाना, रोजगार सृजित करना और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है।
भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में
फार्मा शेयरों के साथ-साथ पूरे भारतीय शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली।
खबर लिखे जाने तक:
- सेंसेक्स 658 अंक (0.85%) गिरकर 76,811 पर कारोबार कर रहा था।
- निफ्टी 50 182 अंक (0.77%) टूटकर 24,002 के स्तर पर था।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी प्रशासन इस नीति को अंतिम रूप देता है, तो आने वाले समय में भारतीय फार्मा कंपनियों की अमेरिका-केंद्रित रणनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि कंपनियों के पास उत्पादन आधार को विविध बनाने और अमेरिका में निवेश बढ़ाने का विकल्प भी मौजूद रहेगा।


