Market Insight Today: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,050 के नीचे फिसल गया। बाजार की कमजोरी के पीछे आईटी और फार्मा सेक्टर पर बढ़ता दबाव प्रमुख वजह माना जा रहा है। CNBC-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का मानना है कि फिलहाल बाजार में बड़ी तेजी की संभावना कम दिख रही है और निवेशकों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए।
शुरुआती कारोबार में बाजार पर दबाव
बुधवार सुबह कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। खबर लिखे जाने तक:
- सेंसेक्स 550.34 अंक (0.71%) टूटकर 76,919.77 पर कारोबार कर रहा था।
- निफ्टी 50 156.25 अंक (0.65%) गिरकर 24,031.45 पर पहुंच गया।
निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, सिप्ला, मैक्स हेल्थकेयर, सन फार्मा और डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज शामिल रहे। वहीं बजाज ऑटो, ONGC, मारुति सुजुकी, हिंडाल्को और नेस्ले इंडिया में मजबूती देखने को मिली।
ऑटो सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
फेक निकला निफ्टी का ब्रेकआउट, बाजार फिर रेंज में
अनुज सिंघल के अनुसार पिछले शुक्रवार का ब्रेकआउट टिक नहीं पाया और अब निफ्टी दोबारा रेंज-बाउंड ट्रेडिंग में लौट आया है। उनका कहना है कि अब बाजार के निचले स्तरों की दोबारा परीक्षा होने का जोखिम बढ़ गया है।
उन्होंने बताया कि कई बड़े सेक्टरों में तेजी की रफ्तार कमजोर पड़ रही है। खासकर बैंकिंग और आईटी सेक्टर में अब मुनाफावसूली का दबाव दिखाई देने लगा है।
HDFC Bank और IT सेक्टर पर बढ़ा दबाव
बैंक निफ्टी में HDFC बैंक की कमजोरी अब साफ नजर आने लगी है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में हर तेजी पर इस शेयर में बिकवाली देखने को मिल सकती है।
दूसरी ओर आईटी सेक्टर में भी तेजी की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। पिछले कारोबारी सत्र में आईटी इंडेक्स दिन के उच्च स्तर से करीब 1.5% नीचे बंद हुआ था।
इसके पीछे एक बड़ी वजह अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सेमिकंडक्टर तथा चिप शेयरों में फिर से आई तेजी मानी जा रही है। यदि वैश्विक निवेशकों का फोकस चिप कंपनियों की ओर बढ़ता है तो भारतीय आईटी शेयरों में निवेश घट सकता है।
ट्रंप के टैरिफ फैसले से फार्मा शेयरों पर असर
बाजार की चिंता का दूसरा बड़ा कारण अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान है।
हालांकि इस फैसले में तत्काल प्रभाव से कोई टैरिफ नहीं लगाया गया है।
- पहले 2 साल तक कोई टैरिफ नहीं
- तीसरे साल 100% टैरिफ
- चौथे साल से 200% टैरिफ लागू करने की योजना
यानी भारतीय फार्मा कंपनियों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन भविष्य के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है।
भारतीय फार्मा कंपनियों के सामने क्या चुनौती?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भविष्य में अमेरिकी बाजार के लिए स्थानीय उत्पादन बढ़ाना पड़ा तो भारतीय कंपनियों को अमेरिका में बड़े स्तर पर निवेश करना होगा।
भारत में टैक्स बेनिफिट वाले क्षेत्रों में कम लागत पर उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए अमेरिका में निर्माण करना महंगा साबित हो सकता है। इसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इस खबर के आधार पर फार्मा सेक्टर से पूरी तरह बाहर निकलना उचित नहीं होगा। यदि शेयरों में बड़ी गिरावट आती है तो मजबूत कंपनियों में खरीदारी के अवसर भी बन सकते हैं।
इन कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रिकल शेयरों पर नजर
अगर वैश्विक स्तर पर चिप सेक्टर की तेजी जारी रहती है तो भारत के कुछ कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रिकल शेयरों में सकारात्मक माहौल बन सकता है।
विश्लेषकों की नजर खासतौर पर इन कंपनियों पर बनी हुई है—
- GVT&D
- Hitachi Energy India
- CG Power
- ABB India
इन शेयरों में मजबूत ऑर्डर बुक और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का फायदा देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या हो रणनीति?
अनुज सिंघल का कहना है कि फिलहाल बाजार काफी उतार-चढ़ाव वाला है। इसलिए बाजार खुलते ही जल्दबाजी में ट्रेड लेने से बचना चाहिए।
उनके अनुसार:
- अगर निफ्टी 24,150 के नीचे बंद होता है तो कमजोरी बढ़ सकती है।
- 23,800 के नीचे क्लोज ट्रेंड रिवर्सल का संकेत होगा।
- वहीं 24,250 के ऊपर क्लोज होने पर दोबारा तेजी लौट सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अभी भी बेहतर अवसर बने हुए हैं, खासकर उन कंपनियों में जिनके तिमाही नतीजे मजबूत हैं।
FIIs और PCR से मिला सकारात्मक संकेत
बाजार के लिए एक अच्छी खबर यह रही कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने नकद बाजार में खरीदारी की।
इसके अलावा Put Call Ratio (PCR) घटकर 1.01 पर आ गया है। अगर यह 0.80 के आसपास पहुंचता है तो बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है।
निफ्टी के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस
सपोर्ट लेवल
- 24,100–24,150
- 23,950–24,050
रेजिस्टेंस लेवल
- 24,200–24,250
- 24,300–24,350
बैंक निफ्टी के महत्वपूर्ण स्तर
सपोर्ट
- 57,500–57,600
- इसके नीचे 57,000 तक गिरावट संभव
रेजिस्टेंस
- 58,000–58,200
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक निफ्टी में टिकाऊ तेजी तभी मानी जाएगी जब यह 58,200 के ऊपर मजबूती से कारोबार करे।
निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल कई वैश्विक और घरेलू कारकों के दबाव में है। ट्रंप के संभावित टैरिफ, आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली और बैंकिंग शेयरों की कमजोरी से बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश और गिरावट पर गुणवत्ता वाले शेयरों की खरीदारी की रणनीति लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बेहतर साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश या ट्रेडिंग निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


