नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद बुधवार को कमोडिटी बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई, जबकि कच्चे तेल (Crude Oil) में तेज उछाल आया। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सोना-चांदी अभी और सस्ता होगा या मौजूदा स्तर पर खरीदारी का मौका है?
कमोडिटी एक्सपर्ट और केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बाजार की मौजूदा स्थिति और आगे के संभावित ट्रेंड पर विस्तार से अपनी राय दी है।
Highlights
- मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोना-चांदी में भारी गिरावट।
- MCX पर सोना दिनभर में ₹2,500 से ज्यादा टूटा।
- चांदी में करीब ₹7,800 प्रति किलो की गिरावट।
- क्रूड ऑयल में 5% से ज्यादा की तेजी।
- अजय केडिया बोले- सोने में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं।
- भारत पर महंगे कच्चे तेल का असर फिलहाल सीमित रहेगा।
MCX पर सोना-चांदी में बड़ी गिरावट
बुधवार शाम तक MCX पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना करीब 1.07% यानी 1,562 रुपये गिरकर 1,43,830 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। कारोबार के दौरान इसमें लगभग 2,555 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 2.74% यानी 6,335 रुपये टूटकर 2,24,522 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। दिनभर में चांदी में 7,831 रुपये तक की गिरावट देखने को मिली।
दूसरी ओर, जुलाई डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 5.46% की तेजी के साथ 7,071 रुपये प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में WTI क्रूड 73 डॉलर और ब्रेंट क्रूड 78 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता दिखा।
क्या अभी और गिरेगा सोना-चांदी?
अजय केडिया के मुताबिक, मौजूदा गिरावट के बावजूद सोने और चांदी में बहुत बड़ी कमजोरी आने की संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है।
उन्होंने कहा कि इस साल सोना पहले ही करीब 26-28% और चांदी 50% से अधिक की तेजी दिखा चुकी है। ऐसे में अधिकांश जियोपॉलिटिकल जोखिम पहले से कीमतों में शामिल हो चुके हैं।
उनका मानना है कि मौजूदा स्तर से अधिकतम 4-5% तक की अतिरिक्त गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन बड़ी बिकवाली की संभावना कम है।
इस सप्ताह किन फैक्टर्स पर रहेगी बाजार की नजर?
अजय केडिया के अनुसार, इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका अमेरिकी फेडरल रिजर्व की FOMC मीटिंग के मिनट्स निभाएंगे।
यदि फेड भविष्य में ब्याज दरों में कटौती के संकेत देता है तो सोने को फिर से सपोर्ट मिल सकता है। वहीं सख्त मौद्रिक नीति के संकेत मिलने पर बुलियन में कुछ और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
Crude Oil कितना महंगा हो सकता है?
क्रूड ऑयल की तेजी पर अजय केडिया का कहना है कि मौजूदा रिकवरी के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल 80-82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। बेहद खराब हालात में यह 85 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि:
- OPEC+ लगातार उत्पादन बढ़ा रहा है।
- अमेरिका का तेल उत्पादन मजबूत बना हुआ है।
- वैश्विक सप्लाई पर्याप्त है।
ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लंबी अवधि तक तेज उछाल की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।
क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
महंगे कच्चे तेल से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे महंगाई, चालू खाता घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
हालांकि अजय केडिया का कहना है कि इस बार स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं है क्योंकि भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
इनमें शामिल हैं—
- E20 फ्यूल ब्लेंडिंग
- अलग-अलग देशों से कच्चे तेल की खरीद
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार
- बेहतर ऊर्जा प्रबंधन
उनका मानना है कि यदि कच्चा तेल लंबे समय तक 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर नहीं टिकता, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित और संभालने योग्य रहेगा।
ट्रंप के बयान से क्यों मचा हड़कंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अंतरिम समझौता अब प्रभावी नहीं रहा है और मौजूदा परिस्थितियों में समझौते की संभावना बेहद कम है।
यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। इसके बाद वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा और कमोडिटी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विशेषज्ञों के अनुसार—
- घबराकर सोना-चांदी बेचने की जरूरत नहीं है।
- लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट पर चरणबद्ध खरीदारी बेहतर रणनीति हो सकती है।
- शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को FOMC मिनट्स और मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए।
- क्रूड ऑयल में फिलहाल अस्थिरता बनी रह सकती है।


