Indian Crude Tanker U-Turn: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते सुरक्षा खतरे के बीच भारतीय झंडे वाले एक विशाल तेल टैंकर ने अचानक अपना रास्ता बदल लिया। ‘लीला वदीनार’ नाम का यह जहाज करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर ओमान के तट से यू-टर्न लेकर वापस लौट गया। क्षेत्र में हालिया हमलों के बाद कई तेल और गैस टैंकरों ने अपना मार्ग बदल दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार में चिंता बढ़ गई है।
होर्मुज में बढ़ी हलचल, भारतीय टैंकर ने बदला रास्ता
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में नए हमलों के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक कम से कम चार तेल और गैस टैंकर इस मार्ग से गुजरने के बजाय वापस लौट गए।
इनमें भारतीय ध्वज वाला वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (VLCC) ‘लीला वदीनार’ भी शामिल है। यह जहाज कुवैत से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर आ रहा था, लेकिन बुधवार को ओमान के तट के पास पहुंचकर होर्मुज में प्रवेश करने से पहले ही यू-टर्न ले लिया।
एमआरपीएल ने भी रद्द किया जहाज का चार्टर
घटनाक्रम के बीच एक और बड़ा फैसला सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने इराक से कच्चा तेल लाने के लिए बुक किए गए एक जहाज का चार्टर भी रद्द कर दिया। यह कदम क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री जोखिम को देखते हुए उठाया गया।
आखिर क्यों बदला पूरा माहौल?
मंगलवार को होर्मुज के पास कतर के एक LNG टैंकर और सऊदी अरब के एक क्रूड ऑयल टैंकर को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान की ओर से जहाजों पर मिसाइल हमले किए गए।
इसके बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इस रूट पर गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरे का स्तर ‘गंभीर’ (Severe) कर दिया। इसी कारण कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल दिया।
कतरी LNG टैंकर भी लौटे
एनालिटिक्स कंपनियों के डेटा के मुताबिक ‘अल घारिया’, ‘दुहेल’ और ‘अल रुवाइस’ नाम के तीन LNG टैंकर भी होर्मुज की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन सुरक्षा स्थिति बिगड़ने पर उन्होंने भी अपना मार्ग बदल लिया। ये जहाज कतर की रास लाफान एक्सपोर्ट फैसिलिटी से गैस लोड करने जा रहे थे।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज?
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है। संघर्ष शुरू होने से पहले भारत का लगभग:
- 40% कच्चा तेल आयात
- 60% LNG आयात
- 90% LPG आयात
इसी समुद्री मार्ग से होकर आता था। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आयात लागत पर सीधा असर डाल सकता है।
ट्रंप के बयान से और बढ़ी चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा है। हालांकि उन्होंने बातचीत की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की, लेकिन यह भी कहा कि उन्हें किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद नहीं है।
उनके इस बयान के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5% की तेजी दर्ज की गई। तेल पहले ही पिछले दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था।
वैश्विक बाजार की नजर होर्मुज पर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने से न सिर्फ तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, बल्कि वैश्विक शिपिंग लागत, बीमा प्रीमियम और कच्चे तेल की कीमतों में भी और उछाल देखने को मिल सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए आने वाले दिनों में यह स्थिति बेहद अहम रहने वाली है।


