नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में हालिया तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच मई महीने में Gold ETF से 725 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी ने भी बाजार में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में जिन लोगों ने गोल्ड ETF में निवेश किया है, उनके मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब निवेश बेच देना चाहिए या गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखना चाहिए?
कोटक म्यूचुअल फंड के ETF फंड मैनेजर सतीश डोंडापति के अनुसार, सोने को हमेशा लॉन्ग टर्म निवेश के रूप में देखना चाहिए। छोटी अवधि की गिरावट से घबराकर फैसले लेने के बजाय निवेशकों को संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। आइए 6 अहम सवालों के जरिए समझते हैं कि मौजूदा समय में Gold ETF निवेशकों को क्या करना चाहिए।
सवाल 1: Gold ETF में निवेश करने वालों को अभी क्या करना चाहिए?
अगर आपके पास पहले से Gold ETF है तो सिर्फ कीमतों में गिरावट देखकर उसे बेचने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का सामान्य हिस्सा है।
यदि आप अपना निवेश बढ़ाना चाहते हैं तो एकमुश्त रकम लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश (स्टैगर्ड इन्वेस्टमेंट) करना बेहतर रहेगा। इससे औसत खरीद कीमत कम करने में मदद मिल सकती है और बाजार को टाइम करने का जोखिम भी घटता है।
सवाल 2: मई में Gold ETF से 725 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी क्यों हुई?
मई महीने में Gold ETF से करीब 725 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। इसकी सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली (Profit Booking) रही।
सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित किया। वहीं कुछ निवेशकों ने बेहतर अल्पकालिक रिटर्न की उम्मीद में अपना पैसा दूसरे एसेट क्लास में स्थानांतरित कर दिया।
सवाल 3: क्या सोने का लॉन्ग टर्म आउटलुक बदल गया है?
विशेषज्ञों का जवाब है—बिल्कुल नहीं।
कुछ महीनों की निकासी या कीमतों में गिरावट से सोने की लंबी अवधि की संभावनाएं कमजोर नहीं होतीं। महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव जैसे हालात में सोना आज भी सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है।
सवाल 4: पोर्टफोलियो में कितना Gold होना चाहिए?
विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी निवेशक को अपनी कुल निवेश राशि का 10% से 15% हिस्सा सोने में रखना चाहिए।
इससे निवेश पोर्टफोलियो में बेहतर संतुलन आता है और बाजार में बड़ी गिरावट के दौरान जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
सवाल 5: क्या सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर निवेश करना सही है?
नहीं। निवेश का फैसला केवल पिछले रिटर्न के आधार पर नहीं लेना चाहिए।
हालांकि पिछले वर्षों में सोने ने शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले पांच वर्षों में सोने ने डॉलर के मुकाबले करीब 134% और रुपये के हिसाब से लगभग 210% का रिटर्न दिया है। वहीं तीन वर्षों में डॉलर में करीब 117% और रुपये में लगभग 160% की बढ़त देखने को मिली।
इसके बावजूद भविष्य का रिटर्न पिछले प्रदर्शन की गारंटी नहीं होता, इसलिए निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता का आकलन जरूरी है।
सवाल 6: आगे सोने की कीमतें किन कारकों से तय होंगी?
आने वाले समय में सोने की कीमतों पर कई घरेलू और वैश्विक कारकों का असर रहेगा। सरकार द्वारा सोना-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने से घरेलू कीमतों में बदलाव आ सकता है।
इसके अलावा इन प्रमुख फैक्टर्स पर भी नजर रहेगी—
- अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव
- डॉलर की मजबूती या कमजोरी
- दुनिया के केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीद
- महंगाई का स्तर
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव
इन सभी कारकों का संयुक्त प्रभाव भविष्य में सोने की कीमतों की दिशा तय करेगा।
निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
मौजूदा गिरावट को देखकर घबराने के बजाय निवेशकों को लंबी अवधि का नजरिया अपनाना चाहिए। यदि आपके पोर्टफोलियो में गोल्ड का हिस्सा निर्धारित सीमा से कम है तो चरणबद्ध तरीके से निवेश बढ़ाया जा सकता है। वहीं केवल अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के आधार पर Gold ETF बेचने का फैसला करना उचित नहीं माना जाता। संतुलित एसेट एलोकेशन और धैर्य ही ऐसे समय में बेहतर निवेश रणनीति साबित हो सकती है।


