नई दिल्ली। कारोबारी दुनिया में सफलता का पर्याय बन चुके गौतम अदाणी आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। बंदरगाहों से लेकर हवाई अड्डों, बिजली, सीमेंट, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई क्षेत्रों में फैले अदाणी समूह ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में शामिल कर दिया है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार गौतम अदाणी की कुल संपत्ति लगभग 116 बिलियन डॉलर (करीब 11.19 लाख करोड़ रुपये) है, जिसके साथ वह एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति और दुनिया के शीर्ष अरबपतियों में शामिल हैं।
Highlights
- गौतम अदाणी एशिया के सबसे धनी कारोबारी हैं।
- उन्होंने 16 साल की उम्र में औपचारिक शिक्षा छोड़ दी थी।
- आज भी उन्हें कॉलेज की पढ़ाई पूरी न कर पाने का अफसोस है।
- अदाणी का मानना है कि अनुभव के साथ शिक्षा भी सफलता के लिए जरूरी है।
हालांकि इतनी अपार दौलत और कारोबारी सफलता हासिल करने के बावजूद गौतम अदाणी के मन में एक ऐसी कमी है, जिसका जिक्र वह कई सार्वजनिक मंचों पर कर चुके हैं। यह कमी किसी कारोबारी फैसले या निवेश से जुड़ी नहीं है, बल्कि उनकी शिक्षा से जुड़ी है। अदाणी का कहना है कि उन्हें आज भी इस बात का अफसोस है कि वह कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं कर सके।
कॉलेज न जाने का अफसोस आज भी करते हैं गौतम अदाणी
गुजरात में आयोजित विद्या मंदिर ट्रस्ट पालनपुर के स्थापना दिवस समारोह में गौतम अदाणी ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया था कि उन्होंने केवल 16 साल की उम्र में औपचारिक शिक्षा छोड़ दी थी। उस समय उनका लक्ष्य नौकरी या कारोबार के अवसर तलाशना था और इसी वजह से उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी नहीं रखी।
कार्यक्रम में बोलते हुए अदाणी ने कहा कि जीवन में मिले अनुभवों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया, लेकिन अब पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि यदि उन्होंने कॉलेज की शिक्षा पूरी की होती तो उन्हें और अधिक लाभ मिल सकता था। उनके अनुसार अनुभव व्यक्ति को समझदार बनाता है, लेकिन शिक्षा ज्ञान का दायरा बढ़ाती है।
उन्होंने कहा था कि जीवन के विभिन्न पड़ावों पर मिले अनुभवों ने उन्हें मजबूत बनाया, लेकिन औपचारिक शिक्षा का महत्व अलग होता है। शिक्षा व्यक्ति को नई सोच, व्यापक दृष्टिकोण और जटिल विषयों को समझने की क्षमता प्रदान करती है।
साधारण परिवार से शुरू हुआ था सफर
आज अरबों डॉलर के कारोबारी साम्राज्य के मालिक गौतम अदाणी का जीवन हमेशा से इतना भव्य नहीं था। उनका जन्म गुजरात के अहमदाबाद में एक साधारण जैन परिवार में हुआ था। उनके पिता कपड़े का छोटा कारोबार करते थे। परिवार बड़ा था और संसाधन सीमित थे।
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अदाणी ने कॉलेज में दाखिला तो लिया, लेकिन आर्थिक और व्यावसायिक अवसरों को देखते हुए पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। इसके बाद वह मुंबई चले गए, जहां उन्होंने हीरा उद्योग में काम करना शुरू किया। यहीं से उनके कारोबारी जीवन की नींव पड़ी।
मुंबई में काम करते हुए उन्होंने व्यापार की बारीकियां सीखीं और बाजार की समझ विकसित की। बाद में वह गुजरात लौटे और कमोडिटी ट्रेडिंग के क्षेत्र में अपना व्यवसाय शुरू किया। यही कारोबार आगे चलकर अदाणी समूह की स्थापना का आधार बना।
कैसे खड़ा हुआ अरबों डॉलर का अदाणी साम्राज्य?
गौतम अदाणी ने अपने करियर की शुरुआत कमोडिटी ट्रेडिंग से की थी। धीरे-धीरे उन्होंने कारोबार का विस्तार किया और कई रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश किया। आज अदाणी समूह देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल है।
समूह के प्रमुख कारोबारों में बंदरगाह संचालन, हवाई अड्डों का प्रबंधन, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, गैस वितरण, सीमेंट, ग्रीन हाइड्रोजन, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन देश का सबसे बड़ा निजी बंदरगाह नेटवर्क संचालित करता है।
इसके अलावा अदाणी ग्रीन एनर्जी दुनिया की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में गिनी जाती है। समूह ने बीते कुछ वर्षों में ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेक्टर में बड़े निवेश किए हैं, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत हुई है।
शिक्षा और अनुभव दोनों जरूरी
गौतम अदाणी की बातों का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सफलता के लिए केवल अनुभव या केवल शिक्षा पर्याप्त नहीं है। दोनों का संतुलन व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करता है।
अदाणी का मानना है कि वास्तविक दुनिया के अनुभव व्यक्ति को समस्याओं का समाधान करना सिखाते हैं, जबकि शिक्षा उसे नए विचारों और तकनीकों से परिचित कराती है। यही वजह है कि वह युवाओं को पढ़ाई के महत्व को समझने की सलाह देते हैं।
उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। चाहे व्यक्ति कॉलेज जाए या नहीं, उसे लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए। लेकिन यदि औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिले तो उसका पूरा लाभ उठाना चाहिए।
एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति कैसे बने?
ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार गौतम अदाणी वर्तमान में एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। उनकी कुल संपत्ति लगभग 116 बिलियन डॉलर आंकी गई है। इस सूची में वह भारत के दूसरे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी से भी आगे हैं।
अदाणी समूह की विभिन्न सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में लगातार वृद्धि और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बढ़ती मौजूदगी ने उनकी संपत्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। पिछले कुछ वर्षों में समूह ने ऊर्जा परिवर्तन, हरित ऊर्जा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर भी बड़ा दांव लगाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और ऊर्जा मांग का लाभ अदाणी समूह को लंबे समय तक मिल सकता है। यही वजह है कि समूह की कंपनियां घरेलू और वैश्विक निवेशकों के बीच लगातार चर्चा में बनी रहती हैं।
एलन मस्क से कितनी कम है अदाणी की संपत्ति?
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति वर्तमान में टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग 716 बिलियन डॉलर बताई जाती है।
यदि गौतम अदाणी की 116 बिलियन डॉलर की संपत्ति की तुलना एलन मस्क से की जाए तो दोनों के बीच करीब 600 बिलियन डॉलर का अंतर है। भारतीय रुपये में यह अंतर लगभग 57 लाख करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।
हालांकि अरबपतियों की रैंकिंग शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, कंपनियों के मूल्यांकन और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। इसके बावजूद गौतम अदाणी का दुनिया के शीर्ष उद्योगपतियों में शामिल होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
युवाओं के लिए क्या है सीख?
गौतम अदाणी की कहानी यह बताती है कि सफलता पाने के लिए परिस्थितियां कभी बाधा नहीं बनतीं। एक साधारण परिवार से निकलकर वैश्विक कारोबारी साम्राज्य खड़ा करने तक का उनका सफर लाखों युवाओं को प्रेरित करता है।
साथ ही उनका यह स्वीकार करना कि उन्हें कॉलेज न जाने का अफसोस है, युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। सफलता हासिल करने के बाद भी यदि कोई व्यक्ति शिक्षा के महत्व को स्वीकार करता है तो यह बताता है कि सीखना जीवनभर जरूरी है।
गौतम अदाणी की कहानी केवल अरबों की संपत्ति कमाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह निरंतर सीखने, मेहनत, जोखिम लेने और खुद को बेहतर बनाने की प्रेरणा भी देती है।


