Highlights
- नमक्कल में फार्म-गेट अंडे की कीमत रिकॉर्ड ₹6.80 प्रति पीस पहुंची।
- कई शहरों में रिटेल कीमत ₹8-9 प्रति अंडा तक पहुंच गई।
- लंबी गर्मी, कम उत्पादन और महंगे चारे से बढ़ी कीमतें।
- आपूर्ति कम रहने पर आने वाले दिनों में और महंगे हो सकते हैं अंडे।
भारत में अंडों की कीमतें एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। देश के सबसे बड़े अंडा उत्पादन केंद्र तमिलनाडु के नमक्कल में फार्म-गेट (थोक खरीद) कीमत ₹6.80 प्रति अंडा दर्ज की गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इसका असर खुदरा बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है, जहां कई शहरों में अंडे ₹8 प्रति पीस और केरल के कुछ इलाकों में ₹8.50 से ₹9 प्रति पीस तक बिक रहे हैं।
पोल्ट्री उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चली भीषण गर्मी, उत्पादन में गिरावट, मुर्गियों के चारे की बढ़ती लागत और मांग के मुकाबले कम आपूर्ति ने कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
नमक्कल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची अंडे की कीमत
नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (NECC) के अनुसार, 13 जुलाई को अंडों का फार्म-गेट खरीद मूल्य बढ़ाकर ₹6.65 प्रति अंडा कर दिया गया था, जिसने पिछले वर्ष 23 दिसंबर के ₹6.40 प्रति अंडा के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इसके बाद 16 जुलाई से नमक्कल में कीमत ₹6.80 प्रति अंडा पर बनी हुई है।
रिटेल बाजारों में इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। कई राज्यों में उपभोक्ताओं को अब अंडे पहले की तुलना में 30-40 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदने पड़ रहे हैं।
जून से लगातार बढ़ते गए दाम
पिछले साल रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद कुछ समय के लिए कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन जून से अंडों के दाम लगातार बढ़ने लगे।
फार्म-गेट कीमतों का सफर
| तारीख | कीमत (प्रति अंडा) |
|---|---|
| 1 जून | ₹5.70 |
| 17 जून | ₹6.45 |
| 26 जून | ₹6.50 |
| 10 जुलाई | ₹6.55 |
| 12 जुलाई | ₹6.60 |
| 13 जुलाई | ₹6.65 |
| 16 जुलाई से | ₹6.80 |
NECC बाजार में मांग और उत्पादन के आधार पर रोजाना थोक खरीद मूल्य तय करती है।
आखिर क्यों महंगे हो गए अंडे?
विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं।
1. लंबी गर्मी से घटा उत्पादन
इस वर्ष लंबे समय तक चली तेज गर्मी का असर पोल्ट्री फार्मों पर पड़ा। अधिक तापमान के कारण मुर्गियों की अंडे देने की क्षमता कम हो गई, जिससे कुल उत्पादन घट गया।
2. चारे की कीमतों में भारी उछाल
मुर्गियों को खिलाए जाने वाले मक्का और सोयाबीन की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में बड़ी तेजी आई है।
- मक्का: ₹23 से बढ़कर ₹28 प्रति किलो
- सोयाबीन: ₹45 से बढ़कर ₹71 प्रति किलो
इससे पोल्ट्री फार्म चलाने की लागत काफी बढ़ गई है।
3. मांग ज्यादा, सप्लाई कम
स्कूलों की मिड-डे मील योजना, होटल, रेस्टोरेंट, घरेलू उपभोग और निर्यात बाजारों में अंडों की मांग मजबूत बनी हुई है। लेकिन उत्पादन घटने से मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
4. इनपुट कॉस्ट बढ़ने से किसानों पर दबाव
पोल्ट्री किसानों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद चारे और अन्य खर्चों में भारी बढ़ोतरी के कारण उन्हें अपेक्षित मुनाफा नहीं मिल रहा है।
नमक्कल क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
तमिलनाडु का नमक्कल भारत का सबसे बड़ा अंडा उत्पादन केंद्र माना जाता है।
- करीब 1,100 पोल्ट्री फार्म
- 7 करोड़ से अधिक पक्षियां
- रोजाना लगभग 6 करोड़ अंडों का उत्पादन
- देश के कई राज्यों, मिड-डे मील योजनाओं और निर्यात बाजारों में सप्लाई
हालांकि उद्योग के अनुसार यहां रोजाना करीब 9 करोड़ अंडे उत्पादन की क्षमता है, लेकिन फिलहाल वास्तविक उत्पादन लगभग 6 करोड़ अंडों तक सीमित रह गया है।
किसानों का क्या कहना है?
KL पोल्ट्री फार्म के एन.के. सरवणकुमार के अनुसार, इस साल फार्म-गेट कीमत पहली बार लगभग ₹6.80 प्रति अंडा तक पहुंची है, जबकि पहले अधिकतम कीमत करीब ₹6.40 रही थी।
उन्होंने बताया कि तीन महीने पहले जो अंडे ₹5-6 प्रति पीस बिक रहे थे, वही अब कई बाजारों में ₹8 प्रति पीस तक पहुंच चुके हैं। वहीं, तमिलनाडु पोल्ट्री फार्मर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष वांगिली सुब्रमण्यम का कहना है कि बढ़ी हुई लागत के कारण किसानों का मुनाफा अब भी दबाव में है।
क्या आगे और महंगे होंगे अंडे?
पोल्ट्री उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मक्का और सोयाबीन की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ और उत्पादन सामान्य स्तर पर नहीं लौटा, तो आने वाले हफ्तों में अंडों की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। त्योहारी सीजन और बढ़ती खपत के दौरान रिटेल बाजार में कीमतें मौजूदा स्तर से भी ऊपर जा सकती हैं।


