पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर बदलते शक्ति संतुलन के बीच उद्योगपति गौतम अडानी ने आत्मनिर्भरता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में किसी भी देश की असली ताकत सिर्फ सेना या अर्थव्यवस्था से तय नहीं होगी, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल क्षमता से तय होगी।
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के सालाना बिजनेस समिट 2026 में बोलते हुए अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और अब “सच्ची आजादी” का मतलब भी बदल चुका है। उनके मुताबिक कोई भी देश तब तक पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो सकता, जब तक वह ऊर्जा और डिजिटल शक्ति के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है।
अडानी ने साफ कहा कि आने वाले समय में वही देश दुनिया को दिशा देगा, जिसके पास अपनी ऊर्जा, अपनी कंप्यूटिंग क्षमता और अपना डिजिटल बुनियादी ढांचा होगा।
“अब ताकत का नया समीकरण बन चुका है”
गौतम अडानी ने कहा कि पहले ताकत का मतलब राजनीतिक स्वतंत्रता से लगाया जाता था, लेकिन अब वैश्विक हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
उन्होंने कहा कि अगर 1947 भारत की राजनीतिक आजादी का प्रतीक था, तो 21वीं सदी में असली आजादी का मतलब होगा अपने घरों को रोशन करने वाली ऊर्जा पर नियंत्रण और अपने विचारों को दिशा देने वाली बौद्धिक क्षमता पर अधिकार।
अडानी के मुताबिक दुनिया अब ऐसे दौर में पहुंच चुकी है जहां ऊर्जा और डिजिटल सुरक्षा अलग-अलग विषय नहीं रहे। अब दोनों ही राष्ट्रीय शक्ति की बुनियादी नींव बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि हाल के पश्चिम एशिया संघर्ष और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों ने यह साफ कर दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा अब सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ चुके हैं।
अमेरिका और चीन का उदाहरण देकर समझाई रणनीति
गौतम अडानी ने अपने संबोधन में दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की राजनीति, संस्थाएं और शासन व्यवस्था भले अलग हों, लेकिन उनकी रणनीतिक प्राथमिकताएं एक जैसी हैं।
अडानी के मुताबिक अमेरिका और चीन दोनों अपनी ऊर्जा क्षमता मजबूत कर रहे हैं। दोनों देश सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भारी निवेश कर रहे हैं। दोनों ही तकनीकी और डिजिटल प्रभुत्व को भविष्य की असली ताकत मानते हैं।
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि अब दुनिया में डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति की तरह देखा जा रहा है।
“ऊर्जा पर नियंत्रण रखने वाला ही भविष्य तय करेगा”
अडानी ने कहा कि आने वाले वर्षों में वही देश औद्योगिक भविष्य को नियंत्रित करेगा, जिसके पास अपनी ऊर्जा क्षमता होगी।
उन्होंने कहा, “जो देश अपनी ऊर्जा पर नियंत्रण रखेगा, वही अपने औद्योगिक भविष्य को दिशा देगा। जो देश अपनी कंप्यूटिंग क्षमता पर नियंत्रण रखेगा, वही अपने बौद्धिक भविष्य को दिशा देगा। और जो देश इन दोनों पर नियंत्रण रखेगा, वही आने वाली सदी को आकार देगा।”
विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी का यह बयान सिर्फ कारोबारी दृष्टिकोण नहीं बल्कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर भी दिखाता है।
सेमीकंडक्टर, डेटा और एआई क्यों बने रणनीतिक हथियार?
गौतम अडानी ने कहा कि दुनिया अब पूरी तरह तकनीक आधारित शक्ति संतुलन की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर अब सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक चिप नहीं रहे, डेटा सिर्फ सूचना नहीं रहा और क्लाउड सिस्टम केवल डिजिटल स्टोरेज नहीं रह गया। अब ये सभी राष्ट्रीय रणनीति और आर्थिक सुरक्षा का हिस्सा बन चुके हैं।
अडानी के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा, डेटा सेंटर, नेटवर्क, चिप्स, कंप्यूटिंग क्षमता और प्रतिभा का पूरा इकोसिस्टम है।
भारत को क्या करना चाहिए?
गौतम अडानी ने कहा कि भारत को अपने डिजिटल और बौद्धिक भविष्य के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा खुद तैयार करना होगा। उन्होंने कहा, “भारत को अपने भविष्य का बुनियादी ढांचा किराए पर नहीं लेना चाहिए। भारत को इसे खुद बनाना चाहिए, अपनी ऊर्जा से चलाना चाहिए और अपनी धरती पर इसका मालिक होना चाहिए।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ा रहा है।
क्यों अहम है अडानी का यह बयान?
गौतम अडानी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया पश्चिम एशिया तनाव, ऊर्जा संकट, आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं और तकनीकी प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है।
भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश के लिए ऊर्जा और डिजिटल आत्मनिर्भरता अब केवल विकास का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का भी बड़ा सवाल बन चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा नियंत्रण, डेटा स्वामित्व, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी बुनियादी ढांचा वैश्विक ताकत का सबसे बड़ा आधार बनने जा रहे हैं।
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