नई दिल्ली: कभी भारत की सबसे बड़ी एडटेक कंपनी रही Byju’s को लेकर बड़ी कानूनी राहत मिली है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की बेंगलुरु बेंच ने कंपनी की पैरेंट कंपनी Think & Learn Pvt. Ltd. के खिलाफ चल रही कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में बोली (Bidding Process) पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक 31 अगस्त तक लागू रहेगी।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी के संस्थापक बायजू रवींद्रन और रिजू रवींद्रन ने अमेरिकी टर्म लोन देने वाले कर्जदाताओं के 11,433 करोड़ रुपये के दावे को चुनौती दी है। अब NCLT पहले इस दावे की वैधता पर सुनवाई करेगा और उसके बाद ही आगे की दिवालिया प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा।
Highlights
- NCLT ने Byju’s की पैरेंट कंपनी Think & Learn की बोली प्रक्रिया पर रोक लगाई।
- अमेरिकी कर्जदाताओं के ₹11,433 करोड़ के दावे को फाउंडर्स ने चुनौती दी।
- 31 अगस्त को होगी अगली सुनवाई।
- फिलहाल नए खरीदारों से Expression of Interest (EOI) नहीं मांगे जाएंगे।
- दिवालिया प्रक्रिया खत्म नहीं हुई, केवल बोली प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगी है।
क्या है पूरा मामला?
भारत में जब कोई कंपनी अपने कर्ज का भुगतान नहीं कर पाती, तो उसके खिलाफ दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू की जाती है। इस प्रक्रिया में कंपनी के लिए नए खरीदार तलाशे जाते हैं, ताकि कर्जदाताओं का पैसा वसूला जा सके।
इसी तरह की प्रक्रिया के तहत पहले JP Associates जैसी बड़ी कंपनी भी दिवालिया प्रक्रिया में गई थी। अब Byju’s की पैरेंट कंपनी Think & Learn भी इसी प्रक्रिया से गुजर रही है, लेकिन फिलहाल NCLT ने इसकी बोली प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
NCLT ने क्यों लगाई रोक?
NCLT की बेंगलुरु बेंच ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक Resolution Professional (RP) कोई Form G जारी नहीं करेगा।
Form G वह दस्तावेज होता है जिसके जरिए संभावित निवेशकों और खरीदारों से Expression of Interest (EOI) मांगा जाता है। इसके अलावा संभावित खरीदारों की अंतिम सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी फिलहाल रोक दी गई है।
इसका मतलब है कि अभी कंपनी की बिक्री की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
फाउंडर्स ने किस दावे को दी चुनौती?
Byju’s के संस्थापक बायजू रवींद्रन और रिजू रवींद्रन ने अमेरिकी टर्म लोन देने वाले कर्जदाताओं द्वारा दाखिल 11,433 करोड़ रुपये के दावे को चुनौती दी है।
फाउंडर्स का कहना है कि इतने बड़े दावे को बिना पर्याप्त जांच के स्वीकार कर लेने से:
- दिवालिया प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
- संभावित खरीदारों के फैसले बदल सकते हैं।
- कंपनी का वास्तविक मूल्यांकन प्रभावित हो सकता है।
- समाधान प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रह पाएगी।
इसी आधार पर उन्होंने NCLT से हस्तक्षेप की मांग की थी।
31 अगस्त को क्या होगा?
अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। उस दिन NCLT यह तय करेगा कि:
- अमेरिकी कर्जदाताओं का ₹11,433 करोड़ का दावा वैध है या नहीं।
- बोली प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए या नहीं।
- CIRP को आगे किस तरीके से बढ़ाया जाए।
यह सुनवाई Byju’s के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या दिवालिया प्रक्रिया खत्म हो गई?
नहीं।
NCLT के आदेश का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि Byju’s के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया समाप्त हो गई है।
फिलहाल केवल:
- नए खरीदारों से आवेदन नहीं मांगे जाएंगे।
- EOI प्रक्रिया रुकी रहेगी।
- संभावित खरीदारों की अंतिम सूची तैयार नहीं होगी।
बाकी कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और अंतिम फैसला NCLT की अगली सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा।
Byju’s के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
पिछले कुछ वर्षों में Byju’s को वित्तीय संकट, निवेशकों के साथ विवाद, कर्मचारियों की छंटनी, विदेशी कर्जदाताओं के मुकदमों और नकदी संकट जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में NCLT का यह अंतरिम आदेश कंपनी को अपनी दलील रखने का अतिरिक्त अवसर देता है।
यदि फाउंडर्स अमेरिकी कर्जदाताओं के दावे को चुनौती देने में सफल रहते हैं, तो कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया की दिशा बदल सकती है। वहीं यदि दावा सही पाया जाता है, तो CIRP और कंपनी की बिक्री की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है।
निष्कर्ष
Byju’s की पैरेंट कंपनी Think & Learn को फिलहाल NCLT से बड़ी राहत मिली है। ट्रिब्यूनल ने 31 अगस्त तक बोली प्रक्रिया पर रोक लगाकर पहले अमेरिकी कर्जदाताओं के ₹11,433 करोड़ के दावे की वैधता जांचने का फैसला किया है। इससे साफ है कि कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि उसका अगला चरण अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।


