Highlights
- 1999 से 2003 तक अजीम प्रेमजी भारत के सबसे अमीर उद्योगपति रहे।
- 2004 से 2007 तक लक्ष्मी निवास मित्तल ने सबसे अमीर भारतीय का खिताब अपने नाम रखा।
- 1950 से 1990 के दशक तक देश में टाटा और बिड़ला समूहों का दबदबा रहा।
नई दिल्ली। आज भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों की बात होती है तो सबसे पहले मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी का नाम सामने आता है। दोनों उद्योगपति न सिर्फ भारत बल्कि एशिया के सबसे बड़े कारोबारी चेहरों में गिने जाते हैं। हालांकि, यह दौर हमेशा से ऐसा नहीं था। अंबानी और अदाणी से पहले भी ऐसे उद्योगपति रहे, जिन्होंने भारत के सबसे अमीर व्यक्ति का मुकाम हासिल किया और दुनिया के अरबपतियों की सूची में भी अपनी अलग पहचान बनाई।
अगर इतिहास पर नजर डालें तो 1950 से 1990 के दशक तक भारतीय उद्योग जगत पर टाटा और बिड़ला समूहों का वर्चस्व रहा। इसके बाद आईटी और स्टील सेक्टर के उभार ने नए उद्योगपतियों को देश के सबसे अमीर लोगों की सूची में शीर्ष पर पहुंचा दिया।
अंबानी-अदाणी से पहले कौन थे सबसे अमीर?
1. अजीम प्रेमजी: आईटी बूम ने बनाया नंबर-1
1999 से 2003 के बीच भारत में आईटी सेक्टर तेजी से बढ़ रहा था। इसी दौर में विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी देश के सबसे अमीर उद्योगपति बनकर उभरे।
विप्रो के शेयरों में जबरदस्त तेजी के चलते उनकी संपत्ति में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। एक समय ऐसा भी आया जब अजीम प्रेमजी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में भी शीर्ष स्थानों तक पहुंच गए थे। आईटी क्रांति के दौर में उनकी सफलता भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है।
2. लक्ष्मी निवास मित्तल: स्टील कारोबार से बनाई वैश्विक पहचान
अजीम प्रेमजी के बाद लक्ष्मी निवास मित्तल ने भारत के सबसे अमीर उद्योगपति का स्थान हासिल किया। वर्ष 2004 से 2007 तक वे लगातार देश के सबसे अमीर व्यक्ति रहे।
वैश्विक स्टील कंपनी आर्सेलरमित्तल के प्रमुख लक्ष्मी मित्तल को “स्टील किंग” के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2005 के आसपास वे दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति भी बने थे। उनकी अधिकांश कारोबारी गतिविधियां विदेशों में फैली हुई थीं, लेकिन भारतीय मूल के उद्योगपति के रूप में उनकी पहचान हमेशा बनी रही।
2007 के बाद शुरू हुआ मुकेश अंबानी का दौर
साल 2007 भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इसी दौरान मुकेश अंबानी पहली बार भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बने। रिलायंस इंडस्ट्रीज के तेज विस्तार और पेट्रोकेमिकल, रिफाइनिंग तथा बाद में टेलीकॉम व रिटेल कारोबार में सफलता ने उन्हें लगातार शीर्ष पर बनाए रखा।
पिछले कुछ वर्षों में गौतम अदाणी ने भी तेज़ी से अपनी संपत्ति बढ़ाई और कई बार मुकेश अंबानी को पीछे छोड़कर भारत के सबसे अमीर व्यक्ति बने। आज दोनों उद्योगपति दुनिया के सबसे प्रभावशाली अरबपतियों में शामिल हैं।
जब ‘टाटा-बिड़ला’ अमीरी की पहचान हुआ करते थे
आजादी के बाद कई दशकों तक भारत में अमीरी का पर्याय “टाटा-बिड़ला” माना जाता था। 1950 से 1990 तक देश के औद्योगिक विकास, विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में इन दोनों कारोबारी घरानों की सबसे बड़ी भूमिका रही।
जब फोर्ब्स ने 1987 में पहली बार दुनिया के अरबपतियों की सूची प्रकाशित की, तब लगातार सात वर्षों (1987-1994) तक बिड़ला परिवार उस सूची में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय कारोबारी परिवार था। इसके बाद 1994 में धीरूभाई अंबानी ने पहली बार इस वैश्विक सूची में जगह बनाई और भारतीय उद्योग जगत में एक नए दौर की शुरुआत हुई।
बदलते दौर के साथ बदलते रहे भारत के सबसे अमीर उद्योगपति
भारत के सबसे अमीर उद्योगपतियों की सूची समय के साथ बदलती रही है। जहां एक दौर में टाटा और बिड़ला उद्योग जगत के पर्याय थे, वहीं आईटी क्रांति ने अजीम प्रेमजी को शीर्ष पर पहुंचाया। इसके बाद स्टील सेक्टर ने लक्ष्मी निवास मित्तल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और फिर रिलायंस व अदाणी समूह के विस्तार ने मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी को देश की सबसे बड़ी कारोबारी हस्तियों के रूप में स्थापित कर दिया। यह बदलाव भारत की बदलती अर्थव्यवस्था और नए उद्योगों के उभार की कहानी भी बयां करता है।


