नई दिल्ली। सोने की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों से लगातार तेजी देखने को मिली है, लेकिन अब दुनिया की प्रमुख वित्तीय संस्थाओं में से एक Deutsche Bank ने गोल्ड को लेकर बड़ा अनुमान जारी किया है। बैंक का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड करीब 20% तक टूट सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve आने वाले महीनों में ब्याज दरों में 3 से 4 बार बढ़ोतरी करता है, तो सोने की कीमत गिरकर 3,800 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यह स्तर मौजूदा कीमतों से काफी नीचे माना जा रहा है।
भारत में कितना सस्ता हो सकता है सोना?
डॉयचे बैंक के अनुमान के मुताबिक यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,800 डॉलर प्रति औंस तक फिसलता है तो भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की बेस कीमत करीब ₹1,15,760 तक आ सकती है। हालांकि इसमें आयात शुल्क, जीएसटी और ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होंगे।
वर्तमान स्तरों की तुलना में देखा जाए तो कई शहरों में सोना करीब ₹25,000 से ₹30,000 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो सकता है। यही वजह है कि निवेशकों और ज्वेलरी खरीदारों के बीच इस रिपोर्ट की काफी चर्चा हो रही है।
अगर ब्याज दरें नहीं बढ़ीं तो क्या होगा?
रिपोर्ट में एक दूसरा परिदृश्य भी बताया गया है। यदि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रखता है और महंगाई नियंत्रण में रहती है, तो साल 2026 की अंतिम तिमाही तक सोना करीब 4,800 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रह सकता है।
यानी आने वाले महीनों में अमेरिकी मौद्रिक नीति सोने की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डॉयचे बैंक ने गिरावट के लिए बताए 3 बड़े कारण
1. ब्याज दरों में बढ़ोतरी का खतरा
अमेरिका में महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते फेडरल रिजर्व फिर से सख्त रुख अपना सकता है। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर बॉन्ड और डॉलर आधारित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे गोल्ड की मांग और कीमत दोनों पर दबाव आता है।
2. एशिया में कमजोर पड़ती मांग
भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल हैं। लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों में खरीदारी की रफ्तार धीमी हुई है। ऊंची कीमतों और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण उपभोक्ता ज्वेलरी खरीदने से बच रहे हैं, जिससे मांग पर असर पड़ रहा है।
3. चीन में निवेशकों की बदलती रणनीति
रिपोर्ट के अनुसार चीन में युआन मजबूत होने और रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार के संकेत मिलने से निवेशक फिर से अन्य एसेट क्लास की ओर लौट रहे हैं। इससे सोने में निवेश की मांग कम हो रही है और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
पिछले महीने भी टूटा है सोना
बीते एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 10% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। गोल्ड अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर 5,589 डॉलर प्रति औंस से काफी नीचे आ चुका है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की दिशा पूरी तरह अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक मांग पर निर्भर करेगी।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में लंबी अवधि का निवेश दृष्टिकोण रखने वाले निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि अल्पकालिक निवेशकों को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि यही कारक आगे सोने की चाल तय करेंगे।


