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Reading: बिहार की सीमा के पास नेपाल के गंडकी में लीगल हुई भांग, जानें क्या हैं नए नियम
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बिजनेस न्यूज़

बिहार की सीमा के पास नेपाल के गंडकी में लीगल हुई भांग, जानें क्या हैं नए नियम

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/08 at 10:59 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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10 Min Read
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नेपाल के गंडकी प्रांत ने नियंत्रित तरीके से भांग की खेती और इसके मेडिकल व औद्योगिक इस्तेमाल को कानूनी मंजूरी दे दी है। इसे नेपाल में भांग की खेती को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव माना जा रहा है। नए कानून के तहत लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और पात्र स्थानीय किसान सरकार की निगरानी में भांग की खेती कर सकेंगे। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आम लोग अपने निजी इस्तेमाल के लिए कहीं भी भांग उगा सकते हैं। बिना अनुमति खेती करना अब भी गैरकानूनी रहेगा।

Contents
गंडकी में भांग की नियंत्रित खेती को मंजूरीनिजी इस्तेमाल के लिए खेती अभी भी गैरकानूनीदशकों पुराने प्रतिबंध के बाद बड़ा बदलावकिसानों के लिए क्या हैं नियम?1. लाइसेंस जरूरी होगा2. कम से कम दो रोपनी जमीन की शर्त3. पहले से खरीदार तय करना होगा4. हर जगह खेती की अनुमति नहीं5. THC की मात्रा पर नियंत्रणगंडकी के कानून के सामने राष्ट्रीय कानून की चुनौतीबिहार की सीमा के पास होने से क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?भारत के लिए क्या मायने हैं?क्या अब नेपाल में कोई भी भांग उगा सकता है?

गंडकी प्रांत में भांग का पौधा पहाड़ी इलाकों में पहले से ही प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। अब सरकार इसे नियंत्रित खेती, मेडिकल उत्पादों और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है। नए नियमों में फसल की गुणवत्ता, लाइसेंस, बिक्री और खेती के स्थान से जुड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।

गंडकी में भांग की नियंत्रित खेती को मंजूरी

नए कानून के अनुसार लाइसेंस प्राप्त कंपनियां और निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले किसान भांग की व्यावसायिक खेती कर सकेंगे। खेती पूरी तरह सरकार की निगरानी में होगी और इसके लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा।

भांग से दवाइयां, आवश्यक तेल और औद्योगिक क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल तैयार किया जा सकेगा। हालांकि, खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली फसल में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल यानी THC की मात्रा 0.3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रखना जरूरी होगा।

इस नियम का उद्देश्य मेडिकल और औद्योगिक हेम्प को नशीले इस्तेमाल वाली उच्च-THC भांग से अलग रखना है। यानी गंडकी में मिली कानूनी मंजूरी को खुले तौर पर नशीली भांग के उत्पादन की अनुमति के तौर पर नहीं देखा जा सकता।

निजी इस्तेमाल के लिए खेती अभी भी गैरकानूनी

गंडकी सरकार ने भांग की नियंत्रित व्यावसायिक खेती को अनुमति दी है, लेकिन निजी इस्तेमाल के लिए घर या निजी जमीन पर बिना अनुमति भांग उगाने की छूट नहीं दी गई है।

यदि कोई व्यक्ति निर्धारित नियमों और लाइसेंस व्यवस्था का पालन किए बिना भांग की खेती करता है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। नियमों के दायरे से बाहर उगाई गई फसल को नष्ट करने का भी प्रावधान रखा गया है।

इससे साफ है कि सरकार का लक्ष्य भांग की खेती को पूरी तरह सामान्य कृषि गतिविधि बनाना नहीं, बल्कि मेडिकल और औद्योगिक जरूरतों के लिए एक नियंत्रित क्षेत्र तैयार करना है।

दशकों पुराने प्रतिबंध के बाद बड़ा बदलाव

नेपाल में भांग का इतिहास काफी पुराना है। लेकिन 1970 के दशक के आखिर में अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच देश ने भांग की खेती और कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसका असर उन इलाकों पर भी पड़ा जहां भांग लंबे समय से प्राकृतिक रूप से उगती रही थी।

अब गंडकी प्रांत के नीति निर्माताओं का मानना है कि नियंत्रित खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। पहाड़ी और कम उपयोग वाली जमीन पर व्यावसायिक खेती से किसानों को अतिरिक्त आय मिल सकती है।

सरकार की योजना भांग से जुड़े मेडिकल और औद्योगिक उत्पादों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने की है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, उत्पादन और सप्लाई से जुड़े रोजगार भी पैदा हो सकते हैं।

खास तौर पर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों के युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार पैदा करना इस नीति का एक महत्वपूर्ण आर्थिक उद्देश्य माना जा रहा है।

किसानों के लिए क्या हैं नियम?

गंडकी प्रांत में भांग की खेती को लेकर सामान्य कृषि की तुलना में ज्यादा सख्त व्यवस्था रखी गई है। इसका मकसद फसल की निगरानी करने के साथ-साथ इसके गलत इस्तेमाल को रोकना है।

1. लाइसेंस जरूरी होगा

भांग की व्यावसायिक खेती के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति के खेती करने वाले किसान या व्यक्ति इस कानूनी व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे।

2. कम से कम दो रोपनी जमीन की शर्त

नियमों के मुताबिक लाइसेंस रजिस्टर्ड कंपनियों या कम से कम दो रोपनी जमीन पर खेती करने वाले पात्र किसानों को दिया जा सकता है। इससे छोटे स्तर पर अनियंत्रित खेती को रोकने की कोशिश की गई है।

3. पहले से खरीदार तय करना होगा

लाइसेंस की अंतिम मंजूरी से पहले आवेदक को किसी रजिस्टर्ड दवा कंपनी या औद्योगिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी के साथ आधिकारिक सप्लाई समझौता प्रस्तुत करना होगा।

इसका मतलब है कि किसान को पहले से यह बताना होगा कि तैयार फसल किस अधिकृत कंपनी या संस्था को बेची जाएगी। इससे फसल के उत्पादन से लेकर बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी रखना आसान होगा।

4. हर जगह खेती की अनुमति नहीं

गंडकी में भांग की खेती सभी इलाकों में नहीं की जा सकेगी। सरकार खेती के लिए विशेष क्षेत्रों का चयन करेगी। इसके लिए मिट्टी की उपयुक्तता, सुरक्षा और निगरानी जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।

5. THC की मात्रा पर नियंत्रण

सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक फसल में THC की मात्रा है। निर्धारित नियमों के अनुसार THC का स्तर 0.3 प्रतिशत की सीमा के भीतर होना चाहिए। इसका उद्देश्य औद्योगिक और मेडिकल उपयोग के लिए कम-THC वाली फसल को नियंत्रित तरीके से तैयार करना है।

गंडकी के कानून के सामने राष्ट्रीय कानून की चुनौती

इस पूरे फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू नेपाल के प्रांतीय और राष्ट्रीय कानूनों के बीच संभावित टकराव है।

गंडकी का प्रांतीय कानून लाइसेंस के आधार पर भांग की व्यावसायिक खेती की अनुमति देता है, लेकिन नेपाल के राष्ट्रीय स्तर के नशीले पदार्थों से संबंधित कानून में भांग को लेकर कड़े प्रतिबंध मौजूद हैं।

ऐसे में यह सवाल अहम है कि प्रांतीय स्तर पर मिली अनुमति को राष्ट्रीय कानून के साथ किस तरह जोड़ा जाएगा। खेती, उत्पादन, भंडारण, बिक्री और दूसरे राज्यों या देशों तक उत्पाद पहुंचाने के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था जरूरी होगी।

यही वजह है कि गंडकी की नई नीति केवल कृषि या आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि इसके सफल क्रियान्वयन के लिए कानूनी और प्रशासनिक तालमेल भी महत्वपूर्ण होगा।

बिहार की सीमा के पास होने से क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?

गंडकी प्रांत की दक्षिणी सीमा भारत के बिहार राज्य से जुड़ती है। यह क्षेत्र भारत-नेपाल की खुली सीमा व्यवस्था के कारण सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।

गंडकी में नियंत्रित भांग की खेती शुरू होने के बाद सीमा से लगे भारतीय क्षेत्रों में भी इसकी गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत बढ़ सकती है। खास तौर पर यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि लाइसेंस प्राप्त खेती से तैयार उत्पाद अवैध तरीके से सीमा पार न जाएं।

हालांकि, गंडकी की नई नीति का घोषित उद्देश्य मेडिकल और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए नियंत्रित फसल तैयार करना है। इसे सीधे तौर पर नशीली भांग के खुले कारोबार की अनुमति नहीं माना जाना चाहिए।

भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी और अवैध सामान की आवाजाही को रोकने के लिए दोनों देशों की संबंधित एजेंसियां पहले से निगरानी करती हैं। नई व्यवस्था के बाद भांग से जुड़े उत्पादों की आवाजाही भी उनके लिए एक अतिरिक्त निगरानी का विषय बन सकती है।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

बिहार के सीमावर्ती इलाकों में इस फैसले का असर मुख्य रूप से सीमा सुरक्षा और अवैध तस्करी की रोकथाम के संदर्भ में देखा जा सकता है। यदि गंडकी में कानूनी रूप से तैयार होने वाले औद्योगिक हेम्प और मेडिकल उत्पादों की सप्लाई चेन मजबूत और पारदर्शी रहती है, तो इसका प्रभाव सीमित रह सकता है।

लेकिन यदि लाइसेंस वाली खेती और गैरकानूनी बाजार के बीच कोई अवैध नेटवर्क विकसित होता है, तो सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ सकती है।

इसलिए गंडकी की नई व्यवस्था में केवल खेती की अनुमति देना ही पर्याप्त नहीं होगा। फसल की जांच, THC स्तर की निगरानी, लाइसेंसधारकों की पहचान, खरीददारों का सत्यापन और उत्पादों की आवाजाही पर नियंत्रण भी महत्वपूर्ण रहेगा।

क्या अब नेपाल में कोई भी भांग उगा सकता है?

नहीं। गंडकी में मिली अनुमति को आम लोगों के लिए भांग की खुली खेती की मंजूरी नहीं माना जा सकता।

केवल निर्धारित नियमों को पूरा करने वाले पात्र किसान और लाइसेंस प्राप्त कंपनियां ही कानूनी ढांचे के तहत खेती कर सकेंगी। निजी इस्तेमाल के लिए बिना अनुमति भांग उगाना अब भी गैरकानूनी रहेगा।

कुल मिलाकर, गंडकी प्रांत का फैसला भांग की खेती को वैध करने से ज्यादा उसे मेडिकल और औद्योगिक उपयोग के लिए नियंत्रित कानूनी ढांचे में लाने की कोशिश है। आने वाले समय में इस नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रांतीय नियमों और नेपाल के राष्ट्रीय कानून के बीच कितना प्रभावी तालमेल बनाया जाता है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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