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Reading: Salary Account में EMI कटने की ये तारीख सेट है तो हो जाएं सतर्क, पेनल्टी के साथ बिगड़ सकता है CIBIL Score
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Salary Account में EMI कटने की ये तारीख सेट है तो हो जाएं सतर्क, पेनल्टी के साथ बिगड़ सकता है CIBIL Score

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/08 at 11:08 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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13 Min Read
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Salary Account EMI Date: अगर आपकी सैलरी महीने के आखिरी दिनों में आती है और लोन की EMI, क्रेडिट कार्ड बिल या दूसरे जरूरी भुगतान महीने की शुरुआत में ऑटो-डेबिट के जरिए कटते हैं, तो आपको अपने कैश फ्लो पर खास ध्यान देना चाहिए। सैलरी क्रेडिट होने और EMI कटने की तारीख के बीच पर्याप्त बैलेंस न रहने पर ऑटो-डेबिट फेल हो सकता है। ऐसी स्थिति में बैंक या लोन देने वाली संस्था की शर्तों के मुताबिक लेट फीस या बाउंस चार्ज लग सकता है। लगातार या रिपोर्ट होने वाली देरी आपके क्रेडिट रिकॉर्ड को भी प्रभावित कर सकती है।

Contents
महीने के आखिर में सैलरी आने पर EMI की तारीख क्यों महत्वपूर्ण है?Salary Credit और EMI Date में रखें पर्याप्त अंतरSalary Management का 4-Step FormulaStep 1: Salary आते ही जरूरी भुगतान का पैसा अलग करेंStep 2: Emergency Fund को प्राथमिकता देंStep 3: EMI और Bills के लिए Auto-Debit का इस्तेमाल समझदारी से करेंStep 4: रोजमर्रा के खर्च के लिए अलग बजट बनाएं22 तारीख के आसपास क्यों बढ़ सकता है खर्च का दबाव?CIBIL Score बचाने के लिए सबसे जरूरी बातSalary Account में कितना Buffer रखना चाहिए?Auto-Sweep सुविधा आपके काम आ सकती हैOnline Shopping में 48 घंटे का Rule अपनाएंEMI Date बदलना कब फायदेमंद हो सकता है?Financial Safety की 4 जरूरी Checklistनिष्कर्ष

नई दिल्ली। हर महीने सैलरी आने के बाद ज्यादातर लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है कि पैसा किस तरह मैनेज किया जाए। किराया, होम लोन या पर्सनल लोन की EMI, क्रेडिट कार्ड का बिल, बिजली-पानी का खर्च, SIP और रोजमर्रा के खर्च पहले से तय होते हैं। ऐसे में अगर इन भुगतानों की तारीख और सैलरी आने की तारीख के बीच सही तालमेल नहीं है, तो महीने की शुरुआत में ही कैश फ्लो की समस्या पैदा हो सकती है।

खासकर उन लोगों को सावधान रहने की जरूरत है जिनकी सैलरी महीने के आखिरी दिन या उसके आसपास आती है, जबकि EMI की तारीख महीने की 1, 2 या 3 तारीख तय है। केवल अकाउंट में पैसा आने को पर्याप्त नहीं मानना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि निर्धारित ऑटो-डेबिट तारीख पर खाते में पर्याप्त available balance मौजूद है या नहीं।

महीने के आखिर में सैलरी आने पर EMI की तारीख क्यों महत्वपूर्ण है?

मान लीजिए आपकी सैलरी हर महीने 30 या 31 तारीख को आपके बैंक खाते में आती है और होम लोन की EMI अगले महीने की 1 तारीख को ऑटो-डेबिट हो जाती है। ऐसी स्थिति में दोनों तारीखों के बीच बहुत कम अंतर बचता है।

अगर उस समय अकाउंट में पर्याप्त उपलब्ध बैलेंस नहीं है, तो EMI का ऑटो-डेबिट फेल हो सकता है। बैंक या लेंडर की शर्तों के अनुसार इस पर शुल्क लग सकता है। कुछ मामलों में दोबारा भुगतान की जरूरत भी पड़ सकती है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सिर्फ ऑटो-डेबिट फेल होने का मतलब यह नहीं है कि CIBIL Score तुरंत खराब हो जाएगा। क्रेडिट स्कोर पर असर आमतौर पर तब पड़ता है जब भुगतान वास्तव में समय पर नहीं होता और संबंधित लेंडर की रिपोर्टिंग के अनुसार देरी क्रेडिट ब्यूरो तक पहुंचती है। इसलिए EMI की due date को हल्के में लेना ठीक नहीं है।

Salary Credit और EMI Date में रखें पर्याप्त अंतर

सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि सैलरी आने के तुरंत बाद सभी जरूरी भुगतानों का पैसा अलग कर दिया जाए। अगर EMI महीने की 1 तारीख को कटती है और आपकी सैलरी 30 या 31 तारीख को आती है, तो कोशिश करें कि सैलरी अकाउंट में EMI के बराबर रकम पहले से उपलब्ध रहे।

उदाहरण के लिए, अगर आपकी मासिक EMI ₹20,000 है तो सिर्फ ₹20,000 का इंतजाम करना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। बैंक के अन्य ऑटो-डेबिट, UPI भुगतान या जरूरी खर्चों को ध्यान में रखते हुए कुछ अतिरिक्त बफर रखना बेहतर है।

Salary Management का 4-Step Formula

Step 1: Salary आते ही जरूरी भुगतान का पैसा अलग करें

सैलरी क्रेडिट होते ही पूरा पैसा खर्च करने के बजाय सबसे पहले अगले कुछ दिनों में होने वाले अनिवार्य भुगतानों की रकम अलग कर लें।

इसमें होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI, क्रेडिट कार्ड भुगतान, किराया, बीमा प्रीमियम और दूसरे जरूरी बिल शामिल हो सकते हैं।

इस रकम को अलग रखने से रोजमर्रा के खर्च के दौरान गलती से EMI का पैसा खर्च होने की संभावना कम हो जाती है।

Step 2: Emergency Fund को प्राथमिकता दें

हर महीने सैलरी का एक हिस्सा बचत और इमरजेंसी फंड के लिए रखना चाहिए। अगर अभी पर्याप्त इमरजेंसी फंड नहीं है, तो पहले उसे मजबूत करना ज्यादा जरूरी हो सकता है।

निवेश या SIP शुरू करना अच्छी आदत है, लेकिन निवेश का पैसा तय करने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपकी EMI और जरूरी खर्च सुरक्षित हैं।

आमतौर पर निवेश का प्रतिशत हर व्यक्ति की आय, खर्च, कर्ज और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार अलग होना चाहिए। इसलिए 20 प्रतिशत जैसे किसी एक तय आंकड़े को सभी के लिए जरूरी नियम नहीं माना जाना चाहिए।

Step 3: EMI और Bills के लिए Auto-Debit का इस्तेमाल समझदारी से करें

ऑटो-डेबिट सुविधा भुगतान भूलने से बचा सकती है, लेकिन इसके साथ एक जिम्मेदारी भी आती है—निर्धारित तारीख पर खाते में पर्याप्त रकम रखना।

अगर आपकी सैलरी और EMI की तारीखों में बहुत कम अंतर है, तो बैंक या लेंडर से उपलब्ध विकल्पों के बारे में पूछकर EMI की तारीख को ऐसी तारीख पर रखने पर विचार किया जा सकता है, जो आपकी आय के कैश फ्लो के अनुकूल हो।

क्रेडिट कार्ड की बिलिंग या payment due date बदलने की सुविधा भी कुछ कार्ड जारीकर्ता उपलब्ध कराते हैं, लेकिन इसके नियम अलग-अलग हो सकते हैं।

Step 4: रोजमर्रा के खर्च के लिए अलग बजट बनाएं

EMI और जरूरी भुगतानों की रकम अलग करने के बाद ही रोजमर्रा के खर्च के लिए बजट तय करें।

UPI, डेबिट कार्ड और कैश के जरिए होने वाले छोटे-छोटे खर्च महीने के अंत में बड़ा असर डाल सकते हैं। इसलिए सैलरी आने के तुरंत बाद पूरा पैसा खर्च करने के बजाय साप्ताहिक या दैनिक खर्च की सीमा तय करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

22 तारीख के आसपास क्यों बढ़ सकता है खर्च का दबाव?

महीने के बीच या आखिरी सप्ताह में कई लोगों को यह महसूस होने लगता है कि सैलरी आने में अभी काफी समय है। शुरुआत में किए गए छोटे-छोटे खर्च अगर लगातार बढ़ते रहें तो महीने के अंत तक अकाउंट बैलेंस तेजी से कम हो सकता है।

इसे सामान्य भाषा में budget drift कहा जा सकता है—यानी आपने महीने की शुरुआत में जो बजट बनाया था, खर्च धीरे-धीरे उससे बाहर निकल गया।

अगर महीने की 20-25 तारीख के आसपास आपका रोजमर्रा के खर्च वाला अकाउंट लगभग खाली होने लगे, तो क्रेडिट कार्ड या लोन लेकर खर्च पूरा करने के बजाय गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगाना बेहतर है।

CIBIL Score बचाने के लिए सबसे जरूरी बात

CIBIL Score को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम EMI और ऑटो-डेबिट को लेकर होता है। अगर ऑटो-डेबिट किसी तकनीकी या बैलेंस से जुड़ी वजह से फेल हो गया, तो तुरंत यह मान लेना सही नहीं है कि आपका CIBIL Score खराब हो गया।

लेकिन अगर EMI की राशि समय पर जमा नहीं होती और भुगतान में ऐसी देरी होती है जिसे लेंडर क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करता है, तो इसका असर क्रेडिट हिस्ट्री पर पड़ सकता है।

इसलिए EMI फेल होने की स्थिति में तुरंत लेंडर या बैंक से संपर्क करके भुगतान की स्थिति जांचें। अगर कोई चार्ज लगा है तो उसकी जानकारी लें और भुगतान को जल्द से जल्द नियमित करें।

Salary Account में कितना Buffer रखना चाहिए?

सैलरी अकाउंट में कुछ अतिरिक्त रकम रखना एक अच्छी वित्तीय आदत है। लेकिन हर व्यक्ति के लिए 50 प्रतिशत अतिरिक्त रकम रखना संभव या जरूरी नहीं है।

बेहतर तरीका यह है कि कम से कम आगामी EMI, जरूरी बिल और कुछ अप्रत्याशित खर्चों को ध्यान में रखकर पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें।

अगर आपकी आय स्थिर है, तो धीरे-धीरे ऐसा इमरजेंसी फंड तैयार करना बेहतर है जिससे अचानक आने वाले खर्च के लिए आपको क्रेडिट कार्ड या महंगे कर्ज पर निर्भर न रहना पड़े।

Auto-Sweep सुविधा आपके काम आ सकती है

कुछ बैंक Auto-Sweep या Sweep-in/Sweep-out जैसी सुविधाएं देते हैं। इनके जरिए खाते में तय सीमा से ज्यादा रकम होने पर अतिरिक्त राशि FD जैसे साधन में जा सकती है और जरूरत पड़ने पर कुछ रकम वापस उपलब्ध हो सकती है।

हालांकि, इस सुविधा के नियम, ब्याज, न्यूनतम रकम और निकासी की शर्तें बैंक के अनुसार अलग-अलग होती हैं। इसलिए इसे शुरू करने से पहले अपने बैंक की शर्तें जरूर पढ़ें।

Online Shopping में 48 घंटे का Rule अपनाएं

महीने के बजट को बिगाड़ने में ऑनलाइन शॉपिंग भी बड़ी भूमिका निभा सकती है। किसी सेल या डिस्काउंट को देखकर तुरंत खरीदारी करने के बजाय अगर सामान जरूरी नहीं है तो कुछ समय इंतजार करना उपयोगी हो सकता है।

खासकर बड़े खर्च के मामले में 24 से 48 घंटे का cooling-off period रखने से impulsive shopping को नियंत्रित किया जा सकता है।

EMI Date बदलना कब फायदेमंद हो सकता है?

अगर आपकी सैलरी हर महीने 30 या 31 तारीख को आती है और EMI लगातार महीने की शुरुआत में कटती है, तो EMI की तारीख बदलवाने का विकल्प आपके लिए उपयोगी हो सकता है।

लेकिन तारीख बदलने से पहले बैंक या NBFC से पूछें कि:

  • नई EMI date उपलब्ध है या नहीं।
  • तारीख बदलने के लिए कोई शुल्क है या नहीं।
  • अगली EMI की गणना कैसे होगी।
  • ऑटो-डेबिट mandate में बदलाव की जरूरत होगी या नहीं।
  • भुगतान की due date और grace period क्या है।

Financial Safety की 4 जरूरी Checklist

1. EMI Buffer:
सैलरी अकाउंट में EMI और जरूरी भुगतानों के लिए पर्याप्त अतिरिक्त बैलेंस रखें।

2. Due Date Calendar:
सभी EMI, क्रेडिट कार्ड और बिलों की तारीख एक जगह नोट करें।

3. Emergency Fund:
अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग इमरजेंसी फंड तैयार करें।

4. Credit Report Check:
समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट देखकर यह जांचें कि लोन और भुगतान की जानकारी सही तरीके से अपडेट हुई है या नहीं।

निष्कर्ष

सैलरी आने की तारीख और EMI कटने की तारीख के बीच कम अंतर अपने आप में कोई समस्या नहीं है, लेकिन अगर इससे खाते में पर्याप्त उपलब्ध बैलेंस नहीं रहता तो परेशानी जरूर हो सकती है। ऑटो-डेबिट फेल होने पर बैंक या लेंडर के नियमों के अनुसार शुल्क लग सकता है और यदि भुगतान में रिपोर्ट होने वाली देरी होती है तो क्रेडिट हिस्ट्री प्रभावित हो सकती है।

इसलिए सैलरी क्रेडिट होते ही पहले EMI और जरूरी बिलों की रकम अलग करना, पर्याप्त बैलेंस बनाए रखना, खर्च का बजट तय करना और इमरजेंसी फंड तैयार करना बेहतर रणनीति है। सिर्फ CIBIL Score बचाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे महीने के कैश फ्लो को सुरक्षित रखने के लिए Salary Date और EMI Date का तालमेल जरूरी है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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