Gold Silver Price Today: मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका तनाव के बीच शुक्रवार को राहत की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने जोरदार छलांग लगा दी। भारत में भी इसका सीधा असर देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत में एक ही दिन में करीब ₹3,700 की तेजी आई, जबकि चांदी ₹9,600 से ज्यादा महंगी हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,400 डॉलर प्रति औंस और चांदी 65 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई।
इस तेज उछाल के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोने-चांदी में अब भी खरीदारी का मौका है या इतनी तेजी के बाद निवेशकों को इंतजार करना चाहिए? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कीमती धातुओं की चाल पर अभी भी अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल, मिडिल ईस्ट की स्थिति और वैश्विक ब्याज दरों से जुड़े संकेतों का बड़ा असर रहेगा।
एक नजर में समझें सोने-चांदी में क्या हुआ
भारत में शुक्रवार, 7 अगस्त को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना दिन के कारोबार में ₹3,722 महंगा होकर ₹1,52,580 प्रति 10 ग्राम के हाई लेवल तक पहुंच गया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इसकी तेजी कुछ कम हुई और सोना करीब 1.82 फीसदी की बढ़त के साथ ₹1,51,572 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
इसी तरह सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में भी जबरदस्त खरीदारी हुई। चांदी ₹9,644 की तेजी के साथ ₹2,35,480 प्रति किलोग्राम के दिन के उच्च स्तर तक पहुंच गई। बाद में इसमें कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली और खबर लिखे जाने तक चांदी करीब 2.14 फीसदी की तेजी के साथ ₹2,30,677 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
इस तरह देखें तो एक ही कारोबारी दिन में सोने में हजारों रुपये और चांदी में करीब दस हजार रुपये तक का उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस समय बुलियन मार्केट में कितनी तेज हलचल बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने ने बनाया मजबूत माहौल
भारत में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी का संबंध केवल घरेलू मांग से नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं में मजबूत तेजी देखने को मिली।
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी (रिसर्च) कायनात चैनवाला के मुताबिक, शुक्रवार को कॉमेक्स पर सोने की कीमत करीब 4,450 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। इससे पहले गुरुवार को सोना लगभग 4,303 डॉलर प्रति औंस के सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचा था।
चांदी में भी तेजी का सिलसिला जारी रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी करीब 3.5 फीसदी की तेजी के साथ 62 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करती दिखाई दी। शुक्रवार को इसकी कीमत 65 डॉलर प्रति औंस के स्तर के पार भी पहुंची।
इस तेजी की खास बात यह है कि सोना और चांदी जनवरी के बाद अपने सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ते नजर आए। यानी केवल एक दिन की तेजी नहीं, बल्कि पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से कीमती धातुओं में मजबूत खरीदारी का माहौल बना हुआ है।
आखिर ईरान-अमेरिका की खबर से क्यों उछले सोना-चांदी?
सोने और चांदी की कीमतों में इस तेजी के पीछे मिडिल ईस्ट से जुड़े घटनाक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने तथा क्षेत्र में हालात को लेकर कुछ राहत की उम्मीद बनने से वैश्विक बाजार में कई परिसंपत्तियों की दिशा बदली।
खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बाजार की चिंता में कुछ कमी आने की उम्मीद बनी। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी तरह का व्यवधान कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
जब बाजार को लगा कि इस क्षेत्र में तनाव और सप्लाई बाधित होने का जोखिम कुछ कम हो सकता है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव आया। वहीं कमजोर अमेरिकी डॉलर ने सोने और चांदी को अतिरिक्त सपोर्ट दिया।
आमतौर पर डॉलर कमजोर होने पर डॉलर में कीमत तय होने वाली कीमती धातुएं दूसरे देशों के खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत आकर्षक हो जाती हैं। इसका असर अंतरराष्ट्रीय मांग और कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल में नरमी से भी मिला सपोर्ट
मिडिल ईस्ट तनाव के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका हमेशा बाजार के लिए चिंता का विषय रहती है। तेल महंगा होने पर महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा होता है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
लेकिन शुक्रवार के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर के कमजोर होने से कीमती धातुओं को सपोर्ट मिला। बाजार में यह उम्मीद मजबूत हुई कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही को लेकर स्थिति बिगड़ने की आशंका कुछ कम हो सकती है।
यही वजह है कि निवेशकों का ध्यान एक बार फिर सोने और चांदी की तरफ गया। वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। हालांकि, इस समय चांदी में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है।
गुरुवार को क्यों बढ़ी थी महंगाई की चिंता?
दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले बाजार का मूड कुछ अलग था। गुरुवार को ईरान की संसद द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले कुछ “विरोधी” देशों के जहाजों पर संभावित प्रतिबंध की समीक्षा किए जाने की खबर सामने आई थी।
इस खबर ने निवेशकों के बीच सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। अगर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हुई थी।
इसी वजह से बाजार में कुछ समय के लिए मुनाफावसूली भी देखने को मिली। हालांकि, बाद में स्थिति को लेकर राहत की उम्मीद बढ़ने और डॉलर में कमजोरी आने से सोने-चांदी में फिर खरीदारी लौट आई।
क्या अब सोना खरीदना चाहिए?
सोने की कीमत में एक ही दिन में करीब ₹3,700 की तेजी के बाद खुदरा निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभी खरीदारी की जाए या कीमतों में गिरावट का इंतजार किया जाए।
इतनी तेज तेजी के बाद एकमुश्त बड़ी रकम लगाना जोखिम भरा हो सकता है। सोने की कीमतें फिलहाल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर और ब्याज दरों जैसे कई कारकों से प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में छोटी अवधि में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को शादी, परिवार की जरूरत या किसी अन्य वजह से सोना खरीदना ही है तो पूरी खरीदारी एक साथ करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करने की रणनीति अपनाई जा सकती है। इससे किसी एक दिन की ऊंची कीमत पर पूरी रकम लगाने का जोखिम कम हो सकता है।
वहीं, केवल इस उम्मीद में खरीदारी करना कि कीमत हर हाल में और तेजी से ऊपर जाएगी, सावधानी के बिना उचित रणनीति नहीं मानी जा सकती। बाजार में अचानक मुनाफावसूली होने पर कीमतों में गिरावट भी आ सकती है।
चांदी में तेजी ज्यादा, लेकिन जोखिम भी अधिक
चांदी ने शुक्रवार को सोने की तुलना में कहीं ज्यादा तेज चाल दिखाई। MCX पर चांदी एक दिन में ₹9,644 तक महंगी हुई और ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम से ऊपर के स्तर को छुआ।
चांदी की कीमत में तेजी के पीछे निवेश मांग के अलावा औद्योगिक मांग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसकी कीमत केवल सुरक्षित निवेश की मांग से निर्धारित नहीं होती।
हालांकि, चांदी में उतार-चढ़ाव आमतौर पर सोने से अधिक तेज हो सकता है। ऐसे में नए निवेशकों को तेजी देखकर जल्दबाजी में बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा तय करने में कई वैश्विक संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। सबसे पहले मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम पर बाजार की नजर होगी। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही और कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण रहेंगी।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर की चाल भी सोने के लिए अहम रहेगी। अगर डॉलर में कमजोरी बनी रहती है तो इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी को सपोर्ट मिल सकता है।
इसके अलावा वैश्विक ब्याज दरों को लेकर आने वाले संकेत भी कीमती धातुओं की कीमतों पर असर डाल सकते हैं। इसलिए केवल एक दिन की तेजी देखकर भविष्य की कीमत का अनुमान लगाना मुश्किल है।
निवेशकों के लिए क्या है संदेश?
शुक्रवार की तेजी ने एक बार फिर दिखा दिया कि वैश्विक घटनाक्रम का असर भारत के बुलियन बाजार पर कितनी तेजी से पड़ सकता है। ईरान-अमेरिका से जुड़ी राहत की खबर, कमजोर डॉलर और कच्चे तेल में नरमी ने सोने-चांदी को मजबूत सपोर्ट दिया।
हालांकि, मौजूदा स्तर पर निवेशकों को तेजी के पीछे भागने के बजाय अपनी जरूरत, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। सोने में लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले निवेशक चरणबद्ध खरीदारी पर विचार कर सकते हैं, जबकि चांदी में निवेश करने वालों को ज्यादा उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोना-चांदी की कीमतें आगे भी अंतरराष्ट्रीय खबरों के प्रति संवेदनशील रह सकती हैं। इसलिए आने वाले दिनों में ईरान-अमेरिका तनाव, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, कच्चा तेल और डॉलर की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा।
निष्कर्ष
ईरान-अमेरिका तनाव से जुड़ी राहत की खबर के बाद शुक्रवार को सोने और चांदी में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। MCX पर सोना ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के ऊपर पहुंच गया, जबकि चांदी ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई।
लेकिन इतनी तेज तेजी के बाद खरीदारी का फैसला सोच-समझकर करना जरूरी है। बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर निवेश का नजरिया लंबी अवधि का है तो चरणबद्ध निवेश एक विकल्प हो सकता है, जबकि छोटी अवधि में ट्रेड करने वालों को वैश्विक संकेतों और कीमतों के उतार-चढ़ाव पर विशेष नजर रखनी चाहिए।


