झारखंड की महिला किसानों ने रचा इतिहास, ब्रिटेन पहुंचेंगे सिमडेगा के आम्रपाली आम
नई दिल्ली। कुछ ही दिनों पहले भारतीय आम निर्यातकों के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आई थी, जब जापान ने फाइटोसैनिटरी (पौध संरक्षण) नियमों से जुड़ी चिंताओं के चलते भारत से कुछ आमों के आयात को अस्थायी रूप से रोक दिया था। इस फैसले से अल्फोन्सो, केसर और बंगनपल्ली जैसी प्रीमियम किस्मों के निर्यातकों को झटका लगा था। लेकिन अब भारतीय आम उद्योग के लिए राहत भरी खबर आई है। ब्रिटेन ने झारखंड के प्रसिद्ध आम्रपाली आमों की पहली व्यावसायिक खेप मंगाई है, जिससे किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के नए अवसर खुले हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की मदद से झारखंड के सिमडेगा जिले से 1.5 टन ताजा आम्रपाली आम ब्रिटेन के लिए भेजे गए हैं। यह खेप 4 जून को कोलकाता से लंदन के लिए रवाना हुई।
पीयूष गोयल ने बताया ‘Local Goes Global’ का उदाहरण
Local Goes Global का सशक्त उदाहरण…
झारखंड के सिमडेगा की महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम यूनाइटेड किंगडम पहुंचने वाले हैं। @APEDADOC के निरंतर प्रयासों से किसानों को बेहतर मूल्य, महिलाओं को नई पहचान और भारत के कृषि निर्यात को नई गति मिल रही है। pic.twitter.com/9afvfc2lMB
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) June 6, 2026 केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए इसे “Local Goes Global” अभियान का सफल उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि झारखंड के सिमडेगा की महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम अब यूनाइटेड किंगडम के बाजार तक पहुंच रहे हैं। APEDA के प्रयासों से किसानों को बेहतर मूल्य, महिला उद्यमियों को नई पहचान और भारत के कृषि निर्यात को नई गति मिल रही है।
महिला किसानों की कंपनी ने संभाली पूरी जिम्मेदारी
इस निर्यात की सबसे खास बात यह है कि आम सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से प्राप्त किए गए हैं। यह पूरी तरह महिला किसानों द्वारा संचालित किसान उत्पादक कंपनी है।
इस संगठन से जुड़ी महिलाएं केवल खेती ही नहीं करतीं बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता, पैकिंग, विपणन और खरीदारों से संपर्क जैसी जिम्मेदारियां भी संभालती हैं। ग्रामीण महिलाओं की यह भागीदारी कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और उद्यमिता का मजबूत उदाहरण बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे मॉडल को देश के अन्य हिस्सों में भी बढ़ावा दिया जाए तो ग्रामीण महिलाओं की आय और रोजगार दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
आखिर क्या है आम्रपाली आम की खासियत?
आम्रपाली भारत की सबसे लोकप्रिय उच्च घनत्व वाली आम किस्मों में से एक है। इसे दशकों पहले भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने विकसित किया था। यह किस्म अपने गहरे नारंगी रंग, अधिक मिठास, कम रेशे और लंबी शेल्फ लाइफ के लिए जानी जाती है।
आम्रपाली आम का आकार अपेक्षाकृत छोटा होता है, लेकिन इसमें गूदा अधिक और बीज छोटा होता है। यही वजह है कि घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देशों में भारतीय आमों की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं और उन्हें भारतीय फलों का स्वाद पसंद आता है।
APEDA की पहल ने खोले अंतरराष्ट्रीय बाजार के दरवाजे
मई 2026 में APEDA ने सिमडेगा जिले के किसान उत्पादक संगठनों (FPO), किसान उत्पादक कंपनियों (FPC) और प्रगतिशील किसानों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था।
इस प्रशिक्षण में किसानों को बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद बेचने के लिए कौन-कौन से गुणवत्ता मानक पूरे करने होते हैं। साथ ही पैकेजिंग, फसल प्रबंधन, अवशेष-मुक्त उत्पादन और निर्यात दस्तावेजों की जानकारी भी दी गई।
इसी कार्यक्रम के दौरान बेउरा एफपीसी और कोलकाता स्थित निर्यातक कंपनी जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के बीच संपर्क स्थापित हुआ। कुछ ही हफ्तों में यह साझेदारी वास्तविक निर्यात में बदल गई।
किसानों को मिलेगा घरेलू बाजार से बेहतर दाम
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यात बाजार में किसानों को आमतौर पर घरेलू मंडियों की तुलना में बेहतर मूल्य मिलता है। इसके अलावा मांग स्थिर रहने पर किसानों की आय में भी सुधार होता है।
झारखंड के आम उत्पादक किसानों के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य को आमतौर पर आम निर्यात के प्रमुख केंद्रों में नहीं गिना जाता। अब यह सफलता राज्य के अन्य जिलों के किसानों को भी प्रेरित कर सकती है।
यदि निर्यात का यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में झारखंड से आम, सब्जियां और अन्य बागवानी उत्पादों का निर्यात भी बढ़ सकता है।
जापान की रोक के बीच ब्रिटेन से आई सकारात्मक खबर
हाल ही में जापान ने कुछ भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगाई थी, जिससे निर्यातकों की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार बहुत बड़ा है और किसी एक देश की रोक से भारतीय कृषि निर्यात पर दीर्घकालिक असर पड़ने की संभावना कम है।
ब्रिटेन को भेजी गई यह नई खेप दिखाती है कि भारतीय कृषि उत्पादों की मांग दुनिया के कई देशों में बनी हुई है। यदि गुणवत्ता और निर्यात मानकों का पालन किया जाए तो भारतीय किसानों के लिए वैश्विक बाजार में अवसर लगातार बढ़ सकते हैं।
भारत के कृषि निर्यात के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से कृषि निर्यात बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है। APEDA के आंकड़ों के अनुसार फल, सब्जियां, चावल, मसाले और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद भारत के कृषि निर्यात का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
झारखंड से ब्रिटेन भेजी गई आम्रपाली आम की यह खेप केवल 1.5 टन फलों का निर्यात नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि देश के छोटे और दूरस्थ कृषि क्षेत्र भी अब वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं।
महिला किसानों की भागीदारी, सरकारी संस्थाओं का सहयोग और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच—इन तीनों का संयोजन भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक नया मॉडल प्रस्तुत करता है। आने वाले समय में ऐसे प्रयास किसानों की आय बढ़ाने और भारत को कृषि निर्यात महाशक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


