नई दिल्ली: भारत के कृषि क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जो न केवल किसानों के लिए गर्व का विषय है बल्कि देश की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करने वाली है। झारखंड के सिमडेगा जिले की महिलाओं के नेतृत्व वाली किसान उत्पादक कंपनी (FPO) द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम अब ब्रिटेन के बाजारों तक पहुंच चुके हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि को भारत के “Local Goes Global” अभियान का बेहतरीन उदाहरण बताया है।
भारत लंबे समय से कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि छोटे किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाए ताकि उन्हें बेहतर कीमत और स्थायी आय का अवसर मिल सके। सिमडेगा की यह सफलता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कैसे ब्रिटेन तक पहुंचे झारखंड के आम्रपाली आम?
Local Goes Global का सशक्त उदाहरण…
झारखंड के सिमडेगा की महिला किसान उत्पादक कंपनी द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम यूनाइटेड किंगडम पहुंचने वाले हैं। @APEDADOC के निरंतर प्रयासों से किसानों को बेहतर मूल्य, महिलाओं को नई पहचान और भारत के कृषि निर्यात को नई गति मिल रही है। pic.twitter.com/9afvfc2lMB
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) June 6, 2026 केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि झारखंड के सिमडेगा जिले में महिलाओं द्वारा संचालित किसान उत्पादक कंपनी के आम्रपाली आम यूनाइटेड किंगडम (UK) के बाजारों में पहुंच रहे हैं।
गोयल ने कहा कि यह केवल आम का निर्यात नहीं है बल्कि भारतीय किसानों की क्षमता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) को भी दिया, जिसने किसानों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरकार के अनुसार, APEDA लगातार किसान समूहों को निर्यात प्रक्रियाओं, गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग और विदेशी खरीदारों से जोड़ने का काम कर रही है। इसी प्रयास का परिणाम है कि अब छोटे जिलों के किसान भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।
आम्रपाली आम की खासियत क्या है?
आम्रपाली भारत की सबसे लोकप्रिय आम किस्मों में से एक मानी जाती है। इसका विकास भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा दशहरी और नीलम किस्मों के संकरण से किया गया था।
इस आम की प्रमुख विशेषताएं हैं:
- गहरा नारंगी रंग और आकर्षक रूप
- अधिक मिठास और कम रेशा
- लंबी शेल्फ लाइफ
- निर्यात के लिए उपयुक्त गुणवत्ता
- प्रसंस्करण उद्योग में भी उपयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की मांग लगातार बढ़ रही है। आम्रपाली जैसी किस्में गुणवत्ता और स्वाद के कारण विदेशी ग्राहकों को तेजी से आकर्षित कर रही हैं।
महिलाओं की अगुआई वाला मॉडल बना मिसाल
सिमडेगा जिले की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इसके पीछे महिलाओं की प्रमुख भूमिका है। किसान उत्पादक कंपनी का संचालन महिलाओं के नेतृत्व में किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को कृषि कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद अक्सर उचित पहचान नहीं मिलती। लेकिन इस तरह की पहलें महिलाओं को केवल आर्थिक रूप से मजबूत नहीं बनातीं बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी शामिल करती हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि महिला-नेतृत्व वाले FPO मॉडल ग्रामीण विकास और सामाजिक बदलाव का मजबूत माध्यम बन सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा होता है और किसानों की सामूहिक सौदेबाजी क्षमता भी बढ़ती है।
APEDA की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
APEDA, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाली एक प्रमुख संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है।
APEDA किसानों और उत्पादक संगठनों की मदद इन क्षेत्रों में करती है:
- निर्यात गुणवत्ता मानकों की जानकारी
- पैकेजिंग और कोल्ड चेन सपोर्ट
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच
- विदेशी खरीदारों से संपर्क
- निर्यात प्रक्रिया का प्रशिक्षण
पिछले कुछ वर्षों में APEDA ने आम, अंगूर, अनार, केला, चावल और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारत क्यों बढ़ाना चाहता है कृषि निर्यात?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में शामिल है। हालांकि उत्पादन के मुकाबले निर्यात की हिस्सेदारी अभी भी सीमित मानी जाती है। केंद्र सरकार कृषि निर्यात को बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार कृषि निर्यात बढ़ने से:
- किसानों की आय में वृद्धि होती है।
- विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
- कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ता है।
- स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलती है।
इसी वजह से सरकार FPOs, सहकारी संस्थाओं और महिला किसान समूहों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है।
भारत की वैश्विक छवि को भी मिलेगा फायदा
झारखंड से ब्रिटेन तक आम्रपाली आम का पहुंचना केवल व्यापारिक उपलब्धि नहीं है। यह भारत की सॉफ्ट पावर और कृषि ब्रांडिंग का भी हिस्सा है।
दुनिया भर में भारतीय आमों की विशेष पहचान है। जब किसी विदेशी बाजार में भारतीय उत्पाद लोकप्रिय होते हैं तो उससे देश की सकारात्मक छवि बनती है। यही कारण है कि सरकार “Local Goes Global” अभियान के तहत स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है।
पीयूष गोयल ने भी अपने संदेश में कहा कि ऐसी पहलें किसानों की कमाई बढ़ाने के साथ-साथ भारत के कृषि निर्यात को नई गति दे रही हैं।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिमडेगा मॉडल सफल रहता है तो देश के अन्य जिलों में भी महिला किसान उत्पादक संगठनों को इसी तरह निर्यात अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इससे छोटे किसानों को सीधे वैश्विक बाजारों तक पहुंचने का रास्ता मिलेगा।
भारत फिलहाल कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में झारखंड के आम्रपाली आम का ब्रिटेन पहुंचना केवल एक शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में भारतीय किसानों के और भी कई स्थानीय उत्पाद दुनिया के बड़े बाजारों में दिखाई दे सकते हैं।
(स्रोत: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की X पोस्ट, APEDA, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय)


