नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 4,744 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 22 परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के लिए 2,192 करोड़ रुपये की आरडीआई फंड (RDIF) सहायता स्वीकृत की गई है। इसके अलावा 390.35 करोड़ रुपये की लागत वाली 8 अन्य परियोजनाओं को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है। यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में दी।
22 परियोजनाओं को मिली फंडिंग, 8 और परियोजनाएं शॉर्टलिस्ट
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) ने आरडीआई फंड के तहत 390.35 करोड़ रुपये की 8 परियोजनाओं को सहायता के लिए शॉर्टलिस्ट किया है। वहीं, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) के माध्यम से 22 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, टीडीबी और बीआईआरएसी को आरडीआई फंड के तहत फोकस्ड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (FRO) श्रेणी में सेकेंड लेवल फंड मैनेजर (SLFM) के रूप में नियुक्त किया गया है।
दोनों संस्थाओं को मिल चुके हैं 2,000 करोड़ रुपये
सरकार ने अब तक टीडीबी और बीआईआरएसी दोनों को 1,000-1,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि पात्र तकनीकी संस्थानों, स्टार्टअप्स और कंपनियों में निवेश के लिए उपलब्ध कराई गई है ताकि देश में नवाचार आधारित तकनीकों का विकास तेज हो सके।
1 लाख करोड़ रुपये का है आरडीआई फंड
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड को मंजूरी दी थी। इसके बाद नवंबर 2025 में इसका औपचारिक शुभारंभ किया गया।
इस फंड के तहत सेकेंड लेवल फंड मैनेजर के चयन के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। सरकार को अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) श्रेणी से 162 आवेदन और फोकस्ड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (FRO) श्रेणी से 38 आवेदन प्राप्त हुए।
डॉ. सिंह ने बताया कि इन आवेदनों की समीक्षा जारी है और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष विचाराधीन है। विभिन्न एआईएफ और एफआरओ के लिए लगभग 8,000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित प्रतिबद्धता पर काम किया जा रहा है।
किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?
आरडीआई फंड का उद्देश्य भारत में उभरती और रणनीतिक तकनीकों को बढ़ावा देना है। इसके तहत निम्न क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार को प्राथमिकता दी जा रही है—
- ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा परिवर्तन
- जलवायु परिवर्तन से जुड़ी तकनीक
- डीप टेक्नोलॉजी
- क्वांटम कंप्यूटिंग
- रोबोटिक्स
- अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में एआई का उपयोग
सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश से भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।
अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश में तेज बढ़ोतरी
राज्यसभा में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2026 के दौरान अब तक भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में 187 मिलियन डॉलर का निजी निवेश दर्ज किया गया है। वहीं 14 जुलाई 2026 तक गैर-सरकारी संस्थाओं (NGE) को 105 प्राधिकरण जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में निजी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जहां 2021-22 में यह निवेश 100.5 मिलियन डॉलर था, वहीं 2023-24 में बढ़कर 348.5 मिलियन डॉलर और 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
सुरक्षा मानकों के आधार पर मिलती है मंजूरी
डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि निजी अंतरिक्ष गतिविधियों से जुड़े प्रत्येक प्रस्ताव का मूल्यांकन IN-SPACe द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है। किसी भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक हितों और नियामकीय आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए IN-SPACe सभी हितधारकों के साथ मिलकर भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए नई सुरक्षा एवं सेफ्टी गाइडलाइंस भी तैयार कर रहा है, जिससे नियामकीय ढांचा और मजबूत होगा।
400 से अधिक हुए स्पेस स्टार्टअप
सरकार के अनुसार, निजी अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ावा देने के लिए व्यापक नीतिगत, नियामकीय और वित्तीय ढांचा तैयार किया गया है। अब तक IN-SPACe ने 17 स्पेस स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए अधिकृत किया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले छह वर्षों में हुए सुधारों ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। 2014 में जहां देश में केवल एक स्पेस स्टार्टअप था, वहीं अब इनकी संख्या 400 से अधिक हो गई है।
भारतीय निजी कंपनियां सफलतापूर्वक रॉकेट लॉन्च, ऑर्बिटल मिशनों का प्रदर्शन, 30 से अधिक उपग्रहों का प्रक्षेपण और पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल (POEM) के माध्यम से करीब 45 पेलोड्स का सफल संचालन कर चुकी हैं। इससे भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग की तकनीकी क्षमता और व्यावसायिक संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं।


