नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही आम की मांग तेजी से बढ़ जाती है। भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और देश के करोड़ों लोग इसका स्वाद लेने का इंतजार करते हैं। लेकिन इसी बीच गुजरात से सामने आई एक घटना ने आम प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। गुजरात खाद्य सुरक्षा विभाग ने मेहसाणा जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ऐसे आमों का जखीरा जब्त किया है, जिनमें कीड़े और फफूंद पाए गए। विभाग द्वारा जारी वीडियो में आम का रस निकालते समय उसमें से कीड़े निकलते दिखाई दे रहे हैं।
यह मामला केवल एक गोदाम या व्यापारी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे खाद्य सुरक्षा, फलों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खास बात यह है कि यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारतीय आमों की गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा चल रही है।
मेहसाणा में क्या मिला?
#Gujarat #Mehsana
The Gujarat Food Safety Department enforcement teams discovered and seized massive stock of mangoes intended for juice extraction.
Mangoes used for juice extraction were found heavily rotten, worm-eaten & visibly infested with fungus and insects.#FSSAIAction pic.twitter.com/bjiy7VuLNw
— FSSAI (@fssaiindia) June 3, 2026 गुजरात खाद्य सुरक्षा विभाग की प्रवर्तन टीमों ने मेहसाणा में निरीक्षण के दौरान बड़ी मात्रा में ऐसे आम बरामद किए जो सड़ चुके थे। अधिकारियों के अनुसार इन आमों का इस्तेमाल रस और अन्य उत्पाद तैयार करने के लिए किया जाना था।
विभाग द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि जब आमों को काटा और दबाया गया तो उनके अंदर से कीड़े और फफूंद निकल रहे थे। प्रारंभिक जांच में कई फलों की स्थिति बेहद खराब पाई गई। इसके बाद पूरे स्टॉक को जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी गई।
अधिकारियों का कहना है कि सड़े हुए फलों का उपयोग खाद्य उत्पादों में करना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
स्वास्थ्य पर कितना बड़ा खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार सड़े हुए फलों में बैक्टीरिया, फफूंद और विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म जीव तेजी से विकसित हो सकते हैं। यदि ऐसे फलों का उपयोग जूस या खाद्य पदार्थ बनाने में किया जाए तो यह फूड पॉइजनिंग, पेट संक्रमण, उल्टी, दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है। यही कारण है कि खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर ऐसे निरीक्षण अभियान चलाता है।
भारत के आमों की गुणवत्ता पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय आमों की गुणवत्ता चर्चा में आई हो। हाल के महीनों में भारतीय आमों के निर्यात को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। कुछ विदेशी बाजारों ने फ्यूमिगेशन और कीट नियंत्रण से जुड़ी प्रक्रियाओं में कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था।
भारतीय आम दुनिया के दर्जनों देशों में निर्यात किए जाते हैं और उनकी गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। ऐसे मामलों से न केवल निर्यातकों बल्कि किसानों की छवि पर भी असर पड़ सकता है।
गुजरात केसर आम की पहचान
गुजरात देश के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में से एक है। राज्य का प्रसिद्ध केसर आम देश और विदेश दोनों बाजारों में काफी लोकप्रिय है। हर साल बड़ी मात्रा में केसर आम का निर्यात किया जाता है।
इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ खराब कारोबारियों की वजह से पूरे उद्योग की छवि प्रभावित नहीं होनी चाहिए और गुणवत्ता नियंत्रण को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
उपभोक्ता खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
बाजार से आम खरीदते समय कुछ सावधानियां अपनाकर खराब फलों से बचा जा सकता है।
आम की सतह पर अत्यधिक काले धब्बे, सड़न या रिसाव दिखाई दे तो उसे खरीदने से बचें। बहुत ज्यादा नरम या दबा हुआ फल भी खराब हो सकता है। कटे या फटे हुए आम नहीं खरीदने चाहिए। घर लाने के बाद फलों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करना चाहिए।
यदि आम को काटने पर अंदर से बदबू, फफूंद या कीड़े दिखाई दें तो उसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
क्या बाजार में बिक रहे सभी आम असुरक्षित हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना का मतलब यह नहीं है कि बाजार में बिकने वाले सभी आम खराब हैं। यह एक विशेष मामले में पकड़ी गई अनियमितता है। अधिकांश किसान और व्यापारी गुणवत्ता मानकों का पालन करते हैं।
हालांकि यह घटना उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और प्रशासन को निरीक्षण व्यवस्था मजबूत करने का संदेश जरूर देती है।
आगे क्या होगा?
गुजरात खाद्य सुरक्षा विभाग ने जब्त किए गए स्टॉक के नमूनों की जांच शुरू कर दी है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि उत्पादकों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं सभी को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी। आम खरीदते समय थोड़ी सावधानी आपके स्वास्थ्य को बड़े खतरे से बचा सकती है।
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