नई दिल्ली: नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भारत-अमेरिका प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को देश की आर्थिक प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यदि भारत को लंबे समय तक तेज आर्थिक विकास हासिल करना है, तो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध बनाना अनिवार्य होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता संतुलित और दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी होना चाहिए।
अमेरिका के साथ FTA भारत के लिए क्यों जरूरी?
अमिताभ कांत के अनुसार, भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए अमेरिकी बाजार में गहरी पैठ बनानी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वहां भारतीय कंपनियों एवं निर्यातकों के लिए बड़े अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि यदि भारत अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी नहीं बढ़ाता, तो भविष्य में दो अंकों के करीब आर्थिक विकास दर हासिल करना बेहद कठिन होगा। उनका मानना है कि भारत-अमेरिका FTA भारतीय निर्यातकों को समान अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
समझौता दोनों देशों के लिए होना चाहिए फायदेमंद
अमिताभ कांत ने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता ऐसा होना चाहिए जिससे भारत और अमेरिका दोनों को लाभ मिले। उन्होंने जापान, दक्षिण कोरिया और चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने अमेरिका के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाकर अपने निर्यात और औद्योगिक विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि भारत को भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है, लेकिन राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना।
बातचीत में भारत को रखना चाहिए मजबूत पक्ष
भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर टिप्पणी करते हुए कांत ने कॉमर्स मिनिस्ट्री के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मंत्रालय सही दिशा में काम कर रहा है और बातचीत के दौरान भारत को अपने हितों की मजबूती से रक्षा करनी चाहिए।
उनके मुताबिक, कुछ संवेदनशील मुद्दों पर धैर्य के साथ बातचीत करना जरूरी है ताकि अंतिम समझौता दोनों पक्षों के लिए संतुलित और टिकाऊ साबित हो।
व्यापक ट्रेड एग्रीमेंट पर भी जारी है चर्चा
अमिताभ कांत का यह बयान उस समय आया है जब भारत के मुख्य व्यापार वार्ताकार राजेश अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क हस्ताक्षर के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि दोनों देश व्यापक व्यापार समझौते (Comprehensive Trade Agreement) पर भी लगातार बातचीत कर रहे हैं।
इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
फरवरी में अंतरिम समझौते पर बनी थी सहमति
भारत और अमेरिका ने कई महीनों तक चली बातचीत के बाद इस वर्ष फरवरी में एक अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति बनाई थी। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका भारत से होने वाले कुछ निर्यात पर शुल्क (टैरिफ) में बड़ी कटौती करने पर सहमत हुआ था। इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।
30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से जुड़ना जरूरी
अमिताभ कांत ने कहा कि अमेरिका लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है। यदि इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था 3.5% की दर से भी बढ़ती है, तो वैश्विक बाजार में भारी मांग पैदा होती है, जिसका लाभ व्यापारिक साझेदार देशों को मिलता है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए इस विशाल बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाना भविष्य की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा होना चाहिए।
भारत के लिए क्या होंगे संभावित फायदे?
यदि भारत और अमेरिका के बीच संतुलित FTA लागू होता है, तो इसके कई बड़े लाभ मिल सकते हैं:
- भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी।
- मैन्युफैक्चरिंग और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।
- विदेशी निवेश (FDI) में तेजी आ सकती है।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भागीदारी मजबूत होगी।
- दीर्घकाल में आर्थिक विकास दर को गति मिल सकती है।
निष्कर्ष
अमिताभ कांत का मानना है कि भारत की तेज आर्थिक प्रगति के लिए अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में भारत के राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होने चाहिए। यदि दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक लाभ वाला समझौता होता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था, निर्यात और निवेश के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।


