भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उन सभी खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए करीब 12 अरब डॉलर (लगभग ₹1.14 लाख करोड़) का सोना बेच दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि देश के फिजिकल गोल्ड रिजर्व में कोई कमी नहीं आई है और भारत का कुल स्वर्ण भंडार 880.52 टन पर स्थिर बना हुआ है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर चर्चाओं के बीच सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में सोना बेचने की बात कही जा रही थी। RBI और PIB Fact Check दोनों ने इन दावों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।
क्या था पूरा मामला?
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है। इस दावे के बाद निवेशकों और आम लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि क्या भारत आर्थिक दबाव में अपने गोल्ड रिजर्व का उपयोग कर रहा है।
हालांकि RBI ने साफ कहा कि भारत के फिजिकल गोल्ड रिजर्व में कोई बदलाव नहीं हुआ है। केंद्रीय बैंक के अनुसार देश का स्वर्ण भंडार 880.52 टन पर स्थिर है और सोना बेचने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।
PIB Fact Check ने भी बताया फर्जी
सरकारी फैक्ट-चेकिंग एजेंसी PIB Fact Check ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर कहा कि RBI द्वारा 12 अरब डॉलर का सोना बेचने का दावा पूरी तरह फर्जी है।
PIB ने बताया कि RBI के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि सोना बेचने की खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ रही है सोने की हिस्सेदारी
RBI के आंकड़ों के मुताबिक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का महत्व लगातार बढ़ा है।
- सितंबर 2025 में हिस्सेदारी: 13.92%
- 31 मार्च 2026 को हिस्सेदारी: 16.70%
- 22 मई 2026 को हिस्सेदारी: 16.85%
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका बढ़ा रहा है, न कि उसे कम कर रहा है।
RBI लगातार क्यों बढ़ा रहा है गोल्ड रिजर्व?
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीद बढ़ाई है। इसके पीछे कई कारण हैं।
पहला कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा जैसे घटनाक्रमों ने कई देशों को डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया है।
दूसरा कारण महंगाई और मुद्रा जोखिम है। सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब वैश्विक मुद्राओं में अस्थिरता बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक सोने को सुरक्षा कवच के रूप में देखते हैं।
तीसरा कारण रिजर्व का विविधीकरण है। विदेशी मुद्रा भंडार में केवल डॉलर या विदेशी बॉन्ड रखने के बजाय केंद्रीय बैंक सोना भी रखते हैं ताकि जोखिम कम हो सके।
दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व वाले देश
विश्व स्तर पर अमेरिका अभी भी सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व रखने वाला देश है। भारत भी अब दुनिया के शीर्ष स्वर्ण भंडार वाले देशों में शामिल है।
| देश/संस्था | गोल्ड रिजर्व |
|---|---|
| अमेरिका | 8,133 टन |
| जर्मनी | 3,350 टन |
| इटली | 2,452 टन |
| फ्रांस | 2,437 टन |
| रूस | 2,332 टन |
| चीन | 2,298 टन |
| IMF | 2,814 टन |
| स्विट्ज़रलैंड | 1,040 टन |
| भारत | 880.52 टन |
| जापान | 846 टन |
| तुर्किये | 641.3 टन |
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत दुनिया के प्रमुख स्वर्ण भंडार रखने वाले देशों में शामिल हो चुका है और जापान से भी आगे है।
भारत के लिए गोल्ड रिजर्व इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में से एक है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक के लिए गोल्ड रिजर्व आर्थिक स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
जब वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल होती है तो गोल्ड रिजर्व किसी भी देश की वित्तीय विश्वसनीयता को मजबूत बनाता है। यही वजह है कि RBI पिछले कुछ वर्षों से लगातार अपने स्वर्ण भंडार को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तो आने वाले वर्षों में RBI की ओर से गोल्ड रिजर्व बढ़ाने की रणनीति जारी रह सकती है।
आम निवेशकों के लिए क्या संकेत?
RBI द्वारा सोना न बेचने और गोल्ड रिजर्व मजबूत बनाए रखने का संदेश निवेशकों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि केंद्रीय बैंक सोने को अभी भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति मानता है।
यदि वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तो सोने की मांग और कीमतों को भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को केवल अफवाहों के आधार पर निवेश निर्णय लेने से बचना चाहिए और हमेशा आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए।
निष्कर्ष
RBI ने स्पष्ट कर दिया है कि 12 अरब डॉलर का सोना बेचने की खबर पूरी तरह गलत है। भारत का स्वर्ण भंडार 880.52 टन पर स्थिर है और विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि देश ने अपने गोल्ड रिजर्व में कोई बड़ी कटौती की है। वास्तव में मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि भारत अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सोने की भूमिका बढ़ा रहा है।


