नई दिल्ली। एक समय था जब उभरते बाजारों (Emerging Markets) में भारत विदेशी निवेशकों की पहली पसंद माना जाता था। मजबूत आर्थिक विकास, तेजी से बढ़ती कंपनियां और विशाल उपभोक्ता बाजार भारत को दुनिया के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाते थे। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में भारी निवेश और तकनीकी कंपनियों के शानदार प्रदर्शन के दम पर ताइवान और साउथ कोरिया जैसे देशों ने इक्विटी मार्केट के मामले में भारत को पीछे छोड़ दिया है।
इसी बदलते वैश्विक माहौल के बीच देश के प्रमुख उद्योगपति और बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गज उदय कोटक ने भारतीय उद्योग जगत को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अब केवल मनोरंजन और अल्पकालिक चर्चाओं में उलझने के बजाय भविष्य की तकनीकों में निवेश करने का समय आ गया है।
उदय कोटक ने क्यों कहा- अब बिजनेस पर फोकस करने का समय
उदय कोटक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए भारतीय कंपनियों को भविष्य के लिए तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों का उदाहरण देते हुए बताया कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए वैश्विक कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं।
कोटक ने विशेष रूप से गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी और कैश-रिच कंपनी होने के बावजूद अल्फाबेट AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए करीब 80 अरब डॉलर जुटाने की दिशा में काम कर रही है। यह इस बात का संकेत है कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा तकनीक और AI आधारित नवाचार पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा कि आईपीएल खत्म हो चुका है और अब भारत के लिए बिजनेस, टेक्नोलॉजी और निवेश पर गंभीरता से ध्यान देने का समय है। उनका यह बयान भारतीय उद्योग जगत के लिए एक तरह की वेक-अप कॉल माना जा रहा है।
AI की वजह से बदल रही है वैश्विक आर्थिक ताकत
Google which is cash surplus, just announced an additional capital raise of $80 bn.
Google annual profit is $160 bn, last quarter $62 bn, and market cap $4.5 trillion. That is close to total profits and market cap of all Indian listed companies put together.
It’s a wake up call…
— Uday Kotak (@udaykotak) June 2, 2026 पिछले दो वर्षों में दुनिया भर में AI कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। Nvidia, Microsoft, Alphabet, Meta और अन्य तकनीकी कंपनियों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है।
ताइवान को इस तेजी का सबसे अधिक फायदा मिला क्योंकि वहां दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनियां मौजूद हैं। AI सर्वर, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए सेमीकंडक्टर की मांग बढ़ने से ताइवानी कंपनियों की वैल्यू तेजी से बढ़ी है।
साउथ कोरिया ने भी AI और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारी निवेश किया है। इसका असर वहां के शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
इसके मुकाबले भारत में AI से जुड़ी बड़ी लिस्टेड कंपनियों की संख्या अभी सीमित है। यही वजह है कि वैश्विक AI निवेश की लहर का उतना लाभ भारतीय बाजार को नहीं मिल पाया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी
भारतीय शेयर बाजार के लिए एक और चुनौती विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से लगभग 24 अरब डॉलर की निकासी की है।
पिछले वर्ष भी विदेशी निवेशकों ने करीब 18.9 अरब डॉलर की बिकवाली की थी। लगातार निकासी का असर बाजार के प्रदर्शन पर पड़ा है और कई सेक्टरों में निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अब उन देशों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं जहां AI, सेमीकंडक्टर और हाई-टेक उद्योगों का मजबूत आधार मौजूद है।
भारत बनाम ताइवान और साउथ कोरिया
इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार में लगभग 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर ताइवान के बाजार में करीब 58 फीसदी और साउथ कोरिया के बाजार में लगभग 88 फीसदी तेजी देखने को मिली है।
यह अंतर केवल बाजार प्रदर्शन का नहीं बल्कि निवेशकों की प्राथमिकताओं में बदलाव का भी संकेत है। वैश्विक पूंजी अब उन क्षेत्रों में जा रही है जहां भविष्य की तकनीकों में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है।
भारत के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक?
उदय कोटक का संदेश केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। उनका संकेत इस ओर है कि भारत को AI, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े स्तर पर निवेश बढ़ाने की जरूरत है।
भारत के पास विशाल प्रतिभा, बड़ा उपभोक्ता बाजार और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम है। लेकिन यदि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहना है तो तकनीकी निवेश की गति को कई गुना बढ़ाना होगा। आने वाले वर्षों में वही देश और कंपनियां आगे निकलेंगी जो AI क्रांति का नेतृत्व करेंगी।
उदय कोटक की टिप्पणी इसी दिशा में एक स्पष्ट चेतावनी है कि भारत को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए अभी से तैयारी करनी होगी, वरना वैश्विक निवेश और बाजार मूल्यांकन के मामले में प्रतिस्पर्धी देश लगातार आगे निकलते जाएंगे।


