नई दिल्ली: भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने इराक के बसरा ऑयल टर्मिनल से कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) उठाने का अपना प्लान फिलहाल रद्द कर दिया है। यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) में बढ़ते सुरक्षा जोखिम और जहाजों पर हमलों की आशंका के चलते लिया गया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले से जुड़े तीन सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
इसी के साथ एक अन्य सरकारी रिफाइनरी मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने भी इराक से तेल लाने की अपनी योजना वापस ले ली है। दोनों फैसलों को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की सतर्क रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
IOC ने क्यों रद्द किया इराकी तेल उठाने का प्लान?
सूत्रों के मुताबिक, IOC 23 जुलाई के आसपास ‘लीला जामनगर’ नाम के एक बहुत बड़े क्रूड कैरियर (VLCC) के जरिए इराक के बसरा ऑयल टर्मिनल से करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल उठाने की तैयारी कर रही थी। हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा हालात बिगड़ने और जहाजों के लिए बढ़ते खतरे को देखते हुए कंपनी ने इस योजना को फिलहाल रद्द कर दिया।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री इलाकों में जहाजों की आवाजाही को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है।
MRPL ने भी पीछे खींचे कदम
रॉयटर्स के अनुसार, मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने भी भारतीय झंडे वाले अफ्रामैक्स टैंकर ‘देश गौरव’ के जरिए इराक से तेल लाने की अपनी योजना रद्द कर दी है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर IOC और MRPL की ओर से रॉयटर्स के सवालों का तत्काल कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया गया।
होर्मुज स्ट्रेट में फिर बढ़ा तनाव
भारत सरकार ने हाल ही में जहाज मालिकों, शिपिंग कंपनियों और क्रू मैनेजमेंट एजेंसियों को सलाह जारी की है कि वे भारतीय नाविकों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर तैनात करने से बचें।
इसके अलावा, भारतीय शिपिंग रेगुलेटर ने जहाजों के कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि वे:
- फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा हालात पर लगातार नजर रखें।
- नेविगेशन संबंधी सभी सुरक्षा चेतावनियों का पालन करें।
- किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में अतिरिक्त सतर्कता बरतें।
जुलाई की शुरुआत में टूटा युद्धविराम
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ कमजोर युद्धविराम समझौता टूट गया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव फिर बढ़ गया। इसके चलते इस क्षेत्र में हमलों और समुद्री सुरक्षा जोखिमों में इजाफा हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल परिवहन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और इराक लंबे समय से उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा है। ऐसे में यदि होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदना पड़ सकता है, जिससे आयात लागत बढ़ने की आशंका रहेगी।
हालांकि, फिलहाल यह फैसला केवल निर्धारित कार्गो को लेकर बताया जा रहा है और इसे भारत द्वारा इराक से तेल आयात पूरी तरह बंद करने के रूप में नहीं देखा जा रहा है। सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। इसका असर भारत में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की लागत पर भी पड़ सकता है।


