नई दिल्ली। एक समय था जब भारत में केबल टीवी का मतलब ही SITI Cable माना जाता था। मोहल्लों और कॉलोनियों में स्थानीय केबल ऑपरेटरों के जरिए लाखों घरों तक टीवी चैनल पहुंचाने वाली SITI Networks का नाम देश के सबसे बड़े केबल नेटवर्क्स में लिया जाता था। लेकिन समय बदला, तकनीक बदली और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी तो कभी चमकने वाली यह कंपनी धीरे-धीरे संकट में फंसती चली गई।
Highlights
- SITI Networks पर ₹1206.03 करोड़ की बकाया उधारी
- फरवरी 2023 से कंपनी दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के तहत
- IndusInd Bank की याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई
- कभी भारतीय केबल टीवी बाजार की बड़ी कंपनी थी SITI Networks
- DTH, OTT और भारी कर्ज ने बिगाड़ा कंपनी का खेल
आज स्थिति यह है कि SITI Networks करीब ₹1206.03 करोड़ के टर्म लोन पर डिफॉल्ट कर चुकी है और कंपनी कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (Corporate Insolvency Resolution Process-CIRP) से गुजर रही है। कभी भारतीय केबल उद्योग की पहचान रही यह कंपनी अब अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है।
किन संस्थानों का पैसा फंसा हुआ है?
SITI Networks के डिफॉल्ट का असर कई बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर पड़ा है। कंपनी के खिलाफ दायर दावों के अनुसार, 10 अगस्त 2023 तक कुल बकाया उधारी ₹1206.03 करोड़ थी।
कंपनी के प्रमुख कर्जदाताओं में Axis Bank, Asset Reconstruction Company India Limited (ARCIL), Aditya Birla Finance Limited (ABFL), IDBI Bank, IndusInd Bank, RBL Bank, Vani Agencies Private Limited और Indian Cable Net Company Limited (ICNCL) शामिल हैं।
इन सभी संस्थानों ने कंपनी को विभिन्न समय पर वित्तीय सहायता प्रदान की थी, लेकिन कंपनी की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ने के कारण ऋण चुकौती प्रभावित हुई और अंततः मामला दिवाला प्रक्रिया तक पहुंच गया।
फरवरी 2023 से चल रही है दिवालिया प्रक्रिया
SITI Networks की मुश्किलें तब और बढ़ गईं जब फरवरी 2023 में IndusInd Bank ने कंपनी के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की मांग करते हुए याचिका दायर की। बैंक का आरोप था कि कंपनी ने लगभग ₹148 करोड़ के भुगतान में डिफॉल्ट किया है।
इसके बाद मामला राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) और फिर राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) तक पहुंचा। अगस्त 2023 में NCLAT ने कंपनी की अपील खारिज कर दी और CIRP प्रक्रिया को बहाल रखा।
वर्तमान में कंपनी का प्रबंधन रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के अधीन है और निदेशक मंडल की शक्तियां निलंबित हैं।
आखिर क्या होता है CIRP?
कई निवेशकों और आम लोगों के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि CIRP आखिर है क्या।
कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) भारत के दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत संचालित की जाती है। जब कोई कंपनी अपने कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ हो जाती है, तब उसके खिलाफ यह प्रक्रिया शुरू की जाती है।
इस दौरान कंपनी के संचालन की जिम्मेदारी एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को सौंप दी जाती है। उसका काम कंपनी के लिए नया निवेशक ढूंढना, पुनर्गठन की योजना बनाना या फिर समाधान न मिलने पर परिसंपत्तियों के जरिए कर्जदाताओं का पैसा वापस दिलाने का प्रयास करना होता है।
जब भारतीय केबल बाजार पर था SITI का दबदबा
आज की युवा पीढ़ी शायद यह नहीं जानती कि 1990 और 2000 के दशक में SITI Networks भारतीय केबल उद्योग की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में से एक थी।
उस समय इंटरनेट का प्रसार सीमित था और OTT प्लेटफॉर्म का अस्तित्व भी नहीं था। मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम टेलीविजन था। लाखों परिवारों के लिए केबल कनेक्शन ही दुनिया भर की खबरों, फिल्मों और मनोरंजन कार्यक्रमों तक पहुंचने का रास्ता था।
SITI Cable ने देशभर में स्थानीय केबल ऑपरेटरों का विशाल नेटवर्क तैयार किया। इसके जरिए कंपनी छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक तेजी से फैली। बेहतर चैनल वितरण और मजबूत नेटवर्क के कारण कंपनी ने भारतीय केबल बाजार में अपनी खास पहचान बनाई।
कई क्षेत्रों में तो SITI Cable की स्थिति लगभग एकाधिकार जैसी मानी जाती थी।
DTH और डिजिटल क्रांति ने बदला खेल
SITI Networks की मुश्किलों की शुरुआत तब हुई जब भारत में Direct-To-Home (DTH) सेवाओं का विस्तार होने लगा। Tata Play, Dish TV, Airtel Digital TV और Sun Direct जैसी कंपनियों ने उपभोक्ताओं को बेहतर तस्वीर गुणवत्ता, अधिक चैनल और पारदर्शी बिलिंग का विकल्प देना शुरू किया। इससे पारंपरिक केबल कंपनियों के ग्राहक धीरे-धीरे कम होने लगे। इसके बाद दूसरी बड़ी चुनौती OTT प्लेटफॉर्म के रूप में सामने आई।
Netflix, Amazon Prime Video, Disney+ Hotstar, JioCinema और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म ने लोगों की टीवी देखने की आदतें बदल दीं। अब दर्शक अपनी पसंद का कंटेंट कभी भी और कहीं भी देख सकते थे।
इस बदलाव ने पूरे केबल उद्योग की वृद्धि को प्रभावित किया और SITI Networks भी इससे अछूती नहीं रही।
भारी कर्ज बना सबसे बड़ी समस्या
बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बावजूद कंपनी ने विस्तार और संचालन के लिए लगातार कर्ज लिया। लेकिन अपेक्षित राजस्व वृद्धि नहीं होने के कारण कर्ज का बोझ बढ़ता गया।
विश्लेषकों का मानना है कि घटते ग्राहकों, बढ़ती परिचालन लागत और कमजोर नकदी प्रवाह ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
जब आय कम होती गई और देनदारियां बढ़ती गईं, तब कंपनी के लिए ऋण भुगतान करना मुश्किल हो गया। यही कारण रहा कि धीरे-धीरे डिफॉल्ट की स्थिति पैदा हुई।
Essel Group विवादों का भी पड़ा असर
SITI Networks का संबंध Essel Group से रहा है, जो मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र का बड़ा नाम रहा है। पिछले कुछ वर्षों में Essel Group की विभिन्न कंपनियों से जुड़े कर्ज और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दे चर्चा में रहे। निवेशकों की चिंता बढ़ने और वित्तीय दबाव बढ़ने का असर समूह की कई कंपनियों पर दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि समूह स्तर पर उत्पन्न वित्तीय दबाव ने भी SITI Networks की चुनौतियों को बढ़ाया।
क्या कंपनी को मिल सकता है नया जीवन?
दिवाला प्रक्रिया का उद्देश्य केवल कंपनी को बंद करना नहीं होता, बल्कि उसे पुनर्जीवित करने का प्रयास भी किया जाता है। यदि कोई रणनीतिक निवेशक या कॉर्पोरेट समूह कंपनी की परिसंपत्तियों और नेटवर्क में रुचि दिखाता है, तो SITI Networks को पुनर्गठन के जरिए नया जीवन मिल सकता है। हालांकि यह पूरी तरह समाधान प्रक्रिया के परिणाम और संभावित निवेशकों की रुचि पर निर्भर करेगा।
फिलहाल कंपनी का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है और कर्जदाता अपने बकाया की वसूली का इंतजार कर रहे हैं।
एक दौर का अंत
SITI Networks की कहानी भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बड़ा सबक है। एक समय देश के करोड़ों दर्शकों तक केबल सेवा पहुंचाने वाली कंपनी आज भारी कर्ज, तकनीकी बदलाव और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के सामने टिक नहीं पाई।
यह कहानी सिर्फ एक कंपनी के पतन की नहीं है, बल्कि यह भी बताती है कि बदलती तकनीक और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद के साथ कदम न मिलाने वाली कंपनियां कितनी तेजी से पीछे छूट सकती हैं। कभी भारतीय केबल उद्योग का बड़ा नाम रही SITI Networks आज दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही है और उसके भविष्य को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। यहां दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।)
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