Crude Oil Price Surge: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर से तेजी पकड़ चुकी हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे भारत में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी (LPG) और सीएनजी (CNG) की कीमतों को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है तो आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ सकता है।
Highlights
- कच्चा तेल 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा।
- पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद को झटका।
- LPG और CNG की कीमतों पर भी बढ़ा दबाव।
- मध्य पूर्व में तनाव और सप्लाई की चिंता से बढ़े दाम।
- महंगाई और परिवहन लागत बढ़ने का खतरा।
कच्चे तेल में फिर आई तेजी, क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले एक महीने का उच्च स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताएं बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा ओपेक+ (OPEC+) देशों की उत्पादन नीति और वैश्विक मांग में सुधार की उम्मीद भी कीमतों को समर्थन दे रही है।
भारत पर क्यों पड़ता है सीधा असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश अपनी कुल जरूरत का करीब 85% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होते ही आयात लागत बढ़ जाती है, जिसका असर धीरे-धीरे घरेलू ईंधन कीमतों पर दिखाई देता है।
यदि डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर रहता है तो आयात और महंगा हो जाता है, जिससे तेल कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीद को झटका
बीते कुछ समय से लोगों को उम्मीद थी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी आने पर पेट्रोल और डीजल के दाम घट सकते हैं, लेकिन अब कच्चे तेल की नई तेजी ने इन उम्मीदों को कमजोर कर दिया है।
फिलहाल प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग इस प्रकार हैं:
| शहर | पेट्रोल | डीजल |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹102.12 प्रति लीटर | ₹89.62 प्रति लीटर |
| बेंगलुरु | ₹111.25 प्रति लीटर | ₹99.14 प्रति लीटर |
हालांकि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया है, लेकिन यदि कच्चा तेल लंबे समय तक 85 डॉलर या उससे ऊपर बना रहता है तो भविष्य में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
LPG सिलेंडर भी हो सकता है महंगा
रसोई गैस यानी LPG की कीमतें भी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार से प्रभावित होती हैं। भारत अपनी घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में तेजी का असर कुछ समय बाद घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भी देखने को मिल सकता है।
फिलहाल प्रमुख शहरों में 14.2 किलो घरेलू और 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर के दाम इस प्रकार हैं:
| शहर | घरेलू LPG (14.2 kg) | कमर्शियल (19 kg) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹942 | ₹2930 |
| कोलकाता | ₹968 | ₹3081.50 |
| जयपुर | ₹945 | ₹2970.50 |
| चेन्नई | ₹957 | ₹3106 |
यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी जारी रहती है तो आने वाले महीनों में एलपीजी सिलेंडर महंगा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
CNG और PNG पर भी बढ़ सकता है दबाव
CNG और PNG की कीमतें भी प्राकृतिक गैस और ऊर्जा बाजार की चाल पर निर्भर करती हैं। यदि कच्चे तेल और गैस दोनों की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो शहरों में CNG और PNG की दरों में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इसका असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना CNG वाहनों का इस्तेमाल करते हैं और जिनके घरों में पाइप्ड गैस (PNG) की सुविधा है।
महंगाई पर पड़ेगा व्यापक असर
ईंधन महंगा होने का असर केवल वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्यान्न, फल-सब्जियां, दूध, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा की अन्य वस्तुओं की ढुलाई लागत बढ़ जाती है। इसका असर अंततः खुदरा महंगाई (Retail Inflation) पर पड़ता है।
यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई दर पर भी अतिरिक्त दबाव बन सकता है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ने की आशंका है।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में बाजार की नजर इन प्रमुख कारकों पर रहेगी—
- अमेरिका-ईरान और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रम।
- OPEC+ देशों की उत्पादन नीति।
- अमेरिका के कच्चे तेल भंडार (Crude Inventory) के आंकड़े।
- डॉलर इंडेक्स और रुपये की चाल।
- भारत की तेल विपणन कंपनियों द्वारा कीमतों की समीक्षा।
यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और सप्लाई में सुधार आता है तो कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल 85 डॉलर से ऊपर भी जा सकता है, जिसका असर भारत में पेट्रोल, डीजल, LPG और CNG की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।


