US-Iran War Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार (17 जुलाई) को अमेरिकी सेना ने लगातार छठी रात ईरान के विभिन्न हिस्सों में हवाई हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस बार दक्षिणी ईरान के रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर—एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, पुल और संचार सुविधाओं—को निशाना बनाया गया। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था। इस घटनाक्रम ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
लगातार छठी रात अमेरिकी हवाई हमले
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार देर रात अमेरिका ने दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी ईरान के कई अहम ठिकानों पर हवाई हमले किए। यह लगातार छठी रात है जब अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बयान जारी कर कहा कि अभियान का लक्ष्य ईरान की सैन्य लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक क्षमता को कमजोर करना है। हालांकि, ईरान का दावा है कि हमलों में नागरिक बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और पुलों को बनाया निशाना
ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी ईरान स्थित इरानशहर एयरपोर्ट के पास जोरदार विस्फोट हुए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि एयरपोर्ट परिसर पर मिसाइल हमला किया गया।
इसके अलावा:
- बंदर अब्बास के रेलवे जंक्शन स्टेशन पर हमला होने की खबर।
- रेलवे के दो कर्मचारियों के घायल होने का दावा।
- होर्मोजगान प्रांत के बंदर खमीर के पास दो महत्वपूर्ण पुलों पर भी हमले।
- कई प्रमुख सड़क मार्गों को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद किया गया।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है जबकि चार अन्य घायल हुए हैं।
कई इलाकों में धमाकों की आवाज, बिजली व्यवस्था प्रभावित
ईरानी समाचार एजेंसियों के मुताबिक, क़ेश्म द्वीप, बुशेहर, अहवाज और बंदर अब्बास समेत कई इलाकों में देर रात विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।
रिपोर्टों के अनुसार:
- बंदर अब्बास में एक मोबाइल संचार टावर क्षतिग्रस्त हुआ।
- कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
- सात लोगों के घायल होने का दावा किया गया है।
- संचार सेवाओं पर भी असर पड़ा।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
ट्रंप ने पहले ही दी थी सख्त चेतावनी
इन हमलों से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि तेहरान बातचीत के लिए आगे नहीं आता तो अमेरिका उसके महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है।
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर बिजली संयंत्रों और पुलों सहित अन्य रणनीतिक ठिकानों पर भी कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि यदि ईरान वार्ता के लिए तैयार नहीं हुआ तो उसके लिए हालात और कठिन होंगे।
मध्य पूर्व में बढ़ी नई चिंता
लगातार जारी अमेरिकी हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। क्षेत्रीय देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना रणनीतिक केंद्र
अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है।
यदि इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है तो:
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- उर्वरक और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ने की आशंका रहेगी।
- वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है।
आगे क्या?
अमेरिका की लगातार सैन्य कार्रवाई और ईरान की ओर से संभावित जवाबी कदमों को देखते हुए आने वाले दिनों में हालात और संवेदनशील बने रह सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों की ओर से कड़े बयान जारी हैं, जबकि दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या तनाव कूटनीतिक बातचीत की ओर बढ़ेगा या सैन्य संघर्ष और तेज होगा।
नोट: इस रिपोर्ट में शामिल कुछ दावे ईरानी सरकारी मीडिया और अमेरिकी अधिकारियों के बयानों पर आधारित हैं। संघर्ष की स्थिति में कई सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल संभव नहीं होती।


