नई दिल्ली: अगर आप वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी जमीन, मकान, फ्लैट या किसी अन्य लंबी अवधि की कैपिटल एसेट बेचने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। इनकम टैक्स विभाग ने कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (Cost Inflation Index – CII) बढ़ा दिया है, जिससे कई मामलों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स का बोझ कम हो सकता है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CII को 384 तय किया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 376 था। नया इंडेक्स 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है।
क्या है कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII)?
कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक इंडेक्स है, जिसका उपयोग किसी संपत्ति की खरीद लागत को महंगाई के अनुसार अपडेट (Indexed Cost) करने के लिए किया जाता है।
सरल भाषा में समझें तो यदि आपने कई साल पहले कोई प्रॉपर्टी खरीदी थी, तो उसकी वास्तविक लागत आज की महंगाई के हिसाब से बढ़ाकर मानी जाती है। इससे टैक्स योग्य लाभ (Capital Gain) कम हो जाता है और आपको कम टैक्स देना पड़ सकता है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नया CII
| वित्त वर्ष | CII |
|---|---|
| FY 2025-26 | 376 |
| FY 2026-27 | 384 |
CII बढ़ने का मतलब है कि पुरानी संपत्तियों की Indexed Cost पहले से अधिक होगी, जिससे कैपिटल गेन कम निकलेगा।
किसे मिलेगा फायदा?
नया CII मुख्य रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो इंडेक्सेशन का लाभ लेने के पात्र हैं और अपनी पुरानी कैपिटल एसेट बेच रहे हैं।
इसमें शामिल हो सकते हैं—
- जमीन बेचने वाले निवेशक
- मकान या फ्लैट बेचने वाले
- कमर्शियल प्रॉपर्टी के मालिक
- कुछ मामलों में ट्रेडमार्क और पेटेंट जैसी कैपिटल एसेट बेचने वाले
- अन्य पात्र लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट धारक
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
AMRG Global के मैनेजिंग पार्टनर रजत मोहन के मुताबिक, CII में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि सरकार महंगाई के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इंडेक्सेशन से जुड़ी टैक्स राहत उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर है।
उनका कहना है कि इससे—
- टैक्स की गणना अधिक सटीक होगी।
- टैक्स विवाद कम होंगे।
- टैक्सपेयर्स और प्रोफेशनल्स को कैपिटल गेन की सही गणना करने में सुविधा मिलेगी।
कैसे कम होगा टैक्स? उदाहरण से समझिए
मान लीजिए आपने 20 साल पहले कोई प्रॉपर्टी 20 लाख रुपये में खरीदी थी और अब उसे बेच रहे हैं।
सामान्य स्थिति में आपका लाभ काफी अधिक दिखाई देगा, लेकिन CII की मदद से खरीद लागत को महंगाई के अनुसार बढ़ाया जाएगा। यानी आपकी Indexed Cost बढ़ जाएगी।
जब खरीद लागत बढ़ेगी तो—
कैपिटल गेन = बिक्री मूल्य – इंडेक्स्ड खरीद लागत
यदि खरीद लागत अधिक मानी जाएगी, तो कैपिटल गेन कम निकलेगा और उसी के अनुसार टैक्स भी कम देना पड़ेगा।
किन संपत्तियों पर लागू होता है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन?
संपत्ति कितने समय तक आपके पास रही, इसके आधार पर LTCG तय होता है।
- जमीन और प्रॉपर्टी: 24 महीने से अधिक
- अनलिस्टेड शेयर: 24 महीने से अधिक
- लिस्टेड शेयर और सिक्योरिटीज: 12 महीने से अधिक
- अन्य सामान्य कैपिटल एसेट: 36 महीने से अधिक
इंडेक्सेशन का फायदा कब मिलता है?
इंडेक्सेशन का लाभ केवल उन्हीं मामलों में मिलता है जहां आयकर कानून के तहत इसकी अनुमति है। इसलिए किसी भी संपत्ति को बेचने से पहले यह जानना जरूरी है कि उस पर इंडेक्सेशन का लाभ उपलब्ध है या नहीं।
टैक्सपेयर्स के लिए क्यों है अहम?
CII में बढ़ोतरी उन लोगों के लिए राहत लेकर आई है जो लंबे समय से रखी गई संपत्तियां बेचने की योजना बना रहे हैं। इससे उनकी खरीद लागत महंगाई के अनुसार अधिक मानी जाएगी, जिससे टैक्स योग्य मुनाफा घट सकता है। हालांकि अंतिम टैक्स देनदारी आपकी संपत्ति की प्रकृति, खरीद और बिक्री की तारीख, लागू टैक्स नियमों तथा इंडेक्सेशन की पात्रता पर निर्भर करेगी। इसलिए बड़ी वैल्यू की संपत्ति बेचने से पहले टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहेगा।


