आज के समय में जहां हर कोई एक सुरक्षित कॉर्पोरेट नौकरी को छोड़ने से डरता है, वहीं बेंगलुरु के अरुण श्रीनिवास ने बिल्कुल उल्टा फैसला लिया। उन्होंने 13 साल की इन्वेस्टमेंट बैंकिंग करियर को अलविदा कहकर खेती को अपना नया बिजनेस मॉडल बना लिया—और नतीजा यह हुआ कि आज वह करोड़ों का टर्नओवर करने वाले एग्री-एंटरप्रेन्योर बन चुके हैं।
यह कहानी सिर्फ “रिस्क लेकर सफलता” की नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि अगर खेती को सही तरीके से सिस्टम, टेक्नोलॉजी और मार्केटिंग के साथ जोड़ा जाए तो यह भी एक हाई-ग्रोथ बिजनेस बन सकता है।
कॉर्पोरेट करियर से एग्रीकल्चर तक का सफर

बेंगलुरु के अरुण श्रीनिवास ने अपने करियर की शुरुआत फाइनेंस सेक्टर से की थी। उन्होंने Investment Banking में कई साल काम किया और नॉर्दर्न ट्रस्ट और स्टेट स्ट्रीट जैसे बड़े ग्लोबल संस्थानों में अनुभव हासिल किया।
उनकी जिंदगी पूरी तरह कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर में सेट थी—फिक्स सैलरी, ग्लोबल क्लाइंट्स और हाई-प्रेशर फाइनेंशियल डील्स। लेकिन 2020 की महामारी ने उनकी सोच बदल दी।
कोविड के दौरान जब वह कर्नाटक के हिरियूर स्थित अपने पैतृक गांव गए, तो वहां की शांत जिंदगी और प्रकृति से जुड़ाव ने उन्हें एक नया आइडिया दिया—क्यों न खेती को एक “स्केलेबल बिजनेस मॉडल” की तरह देखा जाए?
नौकरी छोड़ने का सबसे बड़ा फैसला
2021 में अरुण ने अपनी सुरक्षित कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी। यह कोई आसान निर्णय नहीं था क्योंकि:
- स्थिर आय खत्म हो गई
- कोई एग्रीकल्चर बैकग्राउंड नहीं था
- और शुरुआती निवेश खुद की बचत से करना था
उन्होंने अपनी 11 एकड़ जमीन पर एक नया एग्री बिजनेस शुरू किया, जिसका नाम रखा “Chanasyya Agri Farm” (अपनी बेटी के नाम पर)।
शुरुआत आसान नहीं थी: विरोध और असफलताएं

कॉर्पोरेट से खेती में जाना आसान नहीं होता, और अरुण के साथ भी यही हुआ।
- स्थानीय लोगों ने उन्हें “outsider” माना
- शुरुआती फैसलों पर भरोसा नहीं किया गया
- कई बार काम में रुकावटें आईं
- शुरुआती निवेश भी धीरे-धीरे खर्च होने लगा
इस दौरान उन्हें खुद पर भी शक होने लगा कि क्या उन्होंने सही निर्णय लिया है।
खेती को बिजनेस की तरह देखने की सोच ने बदली किस्मत
अरुण की सबसे बड़ी सफलता उनकी सोच में बदलाव था। उन्होंने खेती को “परंपरा” नहीं बल्कि एक डेटा-ड्रिवन बिजनेस की तरह देखा।
उन्होंने तीन चीजों पर फोकस किया:
1. साइंटिफिक फार्मिंग
- मिट्टी का pH टेस्ट
- पानी की TDS जांच
- फसल चयन रिसर्च के आधार पर
2. स्मार्ट फसल चयन
उन्होंने मुख्य फसल के रूप में ड्रैगन फ्रूट चुना, खासकर जम्बो रेड वैरायटी, क्योंकि:
- कम पानी की जरूरत
- लंबी शेल्फ लाइफ
- हाई मार्केट डिमांड
3. मल्टी-इनकम मॉडल
उन्होंने सिर्फ एक फसल पर निर्भर नहीं किया। बल्कि:
- मुर्गी पालन
- इंटरक्रॉपिंग
- जैविक खाद उत्पादन
से अतिरिक्त आय शुरू की।
बिना बैंक लोन के आत्मनिर्भर मॉडल

अरुण ने सबसे अलग रणनीति अपनाई—उन्होंने कोई बैंक लोन नहीं लिया।
पूरा सिस्टम उन्होंने इस तरह डिजाइन किया:
- छोटे-छोटे इनकम सोर्स से कैश फ्लो
- उसी पैसे से फार्म ऑपरेशन
- और मुनाफे का दोबारा निवेश
इस मॉडल ने उन्हें financial pressure से बचाया और धीरे-धीरे फार्म को स्टेबल बना दिया।
टेक्नोलॉजी और ऑर्गेनिक फार्मिंग का कॉम्बिनेशन
अरुण ने पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक तकनीक अपनाई:
- ड्रिप इरिगेशन सिस्टम
- जैविक खाद (जीवामृत और पंचगव्य)
- स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट
इससे उनका फार्म धीरे-धीरे एक “Smart Agriculture Model” बन गया।
उत्पादन और कमाई: कैसे बना करोड़ों का बिजनेस
आज उनका फार्म:
- सालाना 105 टन से ज्यादा उत्पादन करता है
- पिछले साल टर्नओवर लगभग ₹87 लाख रहा
- अब ₹1 करोड़+ टारगेट के करीब है
लेकिन असली बदलाव सिर्फ कमाई नहीं है, बल्कि उनका बिजनेस मॉडल है।
Direct-to-Consumer (D2C) मॉडल ने गेम बदल दिया
जहां ज्यादातर किसान मंडी और बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं, वहीं अरुण ने सीधा ग्राहक मॉडल अपनाया।
- 350+ अपार्टमेंट्स में सीधे सप्लाई
- बिचौलियों को हटाया
- बेहतर प्राइसिंग मिली
इससे उनकी प्रॉफिट मार्जिन काफी बढ़ गई।
किसान से एंटरप्रेन्योर बनने की कहानी
आज अरुण सिर्फ किसान नहीं हैं, बल्कि एक एग्री-एंटरप्रेन्योर हैं। वह अब:
- 730+ किसानों के ग्रुप को लीड कर रहे हैं
- दूसरे किसानों को ट्रेनिंग दे रहे हैं
- एग्री बिजनेस मॉडल सिखा रहे हैं
उनका लक्ष्य है कि खेती को “low-income profession” से निकालकर “high-income enterprise” बनाया जाए।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
अरुण श्रीनिवास की यात्रा कुछ बड़े lessons देती है:
- रिस्क लेना जरूरी है, लेकिन प्लानिंग के साथ
- खेती भी एक scalable बिजनेस हो सकती है
- टेक्नोलॉजी और डेटा game-changer हैं
- Direct selling सबसे बड़ा profit booster है
निष्कर्ष: खेती अब सिर्फ खेती नहीं, एक स्टार्टअप मॉडल है
Bengaluru के अरुण श्रीनिवास की कहानी यह साबित करती है कि सही सोच और सिस्टम के साथ कोई भी सेक्टर बदल सकता है।
उन्होंने नौकरी छोड़कर सिर्फ खेती नहीं की, बल्कि एक पूरा agri-business ecosystem खड़ा किया।
यह कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है—कि सफलता सिर्फ नौकरी में नहीं, बल्कि नए रास्ते बनाने में भी है।
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