नई दिल्ली | 29 अप्रैल 2026 कॉरपोरेट दिवालिया मामलों (IBC) में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कॉरपोरेट गारंटी से जुड़ी देनदारियां भी “फाइनेंशियल डेट” मानी जाएंगी। इस फैसले का सीधा असर बैंकिंग सेक्टर, कॉरपोरेट लेंडिंग और भविष्य के दिवालिया मामलों पर पड़ेगा।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
Supreme Court of India की बेंच (जस्टिस PS Narasimha और Alok Aradhe) ने कहा:
- कॉरपोरेट गारंटी = फाइनेंशियल डेट (IBC के तहत)
- SBI और अन्य बैंक फाइनेंशियल क्रेडिटर माने जाएंगे
- NCLT और NCLAT के पुराने फैसले “कानूनी रूप से गलत”
किस केस में आया फैसला?
यह मामला Reliance Infratel Limited (RITL) के दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) से जुड़ा है।
बैंक कंसोर्टियम (नेतृत्व में State Bank of India) ने
करीब ₹3,628 करोड़ का दावा किया था, जो कॉरपोरेट गारंटी के आधार पर था।
इसमें शामिल थे:
- Bank of India
- UCO Bank
- Indian Overseas Bank
- (और अन्य PSU बैंक)
पहले क्या हुआ था?
- National Company Law Tribunal (NCLT)
- National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT)
दोनों ने SBI समेत बैंकों को फाइनेंशियल क्रेडिटर मानने से मना कर दिया था
कारण:
- गारंटी डॉक्यूमेंट्स पर सवाल
- स्टैंपिंग में कमी
- वित्तीय स्टेटमेंट में खुलासा नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?
कोर्ट ने तीन अहम बातें साफ कीं:
1. गारंटी भी ‘फाइनेंशियल डेट’ है
IBC की धारा 5(8) के अनुसार
अगर किसी लोन के लिए गारंटी दी गई है, तो वह भी “फाइनेंशियल डेट” मानी जाएगी
2. स्टैंपिंग की कमी = दस्तावेज अमान्य नहीं
कोर्ट ने कहा:
कम स्टैंप ड्यूटी होने से डॉक्यूमेंट “void” नहीं होता
3. बैलेंस शीट में खुलासा न होने से अधिकार खत्म नहीं
अगर कंपनी ने गारंटी को वित्तीय स्टेटमेंट में नहीं दिखाया,
तो भी बैंक अपना दावा खोते नहीं हैं
बैंकों को बड़ी राहत, कॉरपोरेट सेक्टर पर दबाव
यह फैसला सिर्फ एक केस तक सीमित नहीं है।
इसके बड़े असर:
- बैंकों की रिकवरी पावर मजबूत होगी
- कॉरपोरेट कंपनियों के लिए “गारंटी देना” अब ज्यादा जिम्मेदारी वाला कदम
- IBC मामलों में क्रेडिटर की परिभाषा और मजबूत हुई
यानी अब कंपनियां गारंटी देकर बच नहीं पाएंगी
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया:
Resolution Professional अब:
- Committee of Creditors (CoC) को दोबारा बनाए
- SBI समेत सभी बैंकों को शामिल करे
- IBC प्रक्रिया को आगे बढ़ाए
NewsJagran Insight
यह फैसला भारत के दिवालिया कानून (IBC) के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
तीन बड़े संदेश:
- बैंकों के हितों को प्राथमिकता
- कॉरपोरेट गवर्नेंस में पारदर्शिता की जरूरत
- गारंटी सिस्टम का दुरुपयोग अब मुश्किल
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