अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच भारत में भी 12 अप्रैल 2026 (रविवार) के लिए पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी गई हैं। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनावपूर्ण वार्ताओं और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसका असर सीधे तौर पर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है।
आज जारी ताजा रेट के अनुसार, देश की प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। हालांकि, राज्यवार टैक्स और वैट के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत
वैश्विक बाजार की बात करें तो आज कच्चे तेल की कीमत लगभग 96.57 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई है, जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 95.20 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। पिछले कुछ दिनों से कीमतों में अस्थिरता देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों पर खतरा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम रूट प्रभावित होते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं।
दिल्ली में पेट्रोल-डीजल का आज का रेट
राजधानी Delhi में आज पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है, जो पिछले दिन के समान ही है। वहीं डीजल की कीमत 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है।
दिल्ली में अप्रैल 2026 के दौरान पेट्रोल की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया है, जो यह संकेत देता है कि फिलहाल घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है।
मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में क्या है रेट?
देश के अन्य बड़े महानगरों में भी आज पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं:
- Mumbai में पेट्रोल: 103.54 रुपये/लीटर, डीजल: 89.97 रुपये/लीटर
- Kolkata में पेट्रोल: 104.45 रुपये/लीटर, डीजल: 91.76 रुपये/लीटर
- Chennai में पेट्रोल: 101.06 रुपये/लीटर, डीजल: 92.61 रुपये/लीटर
इन शहरों में कीमतें अधिक होने का कारण राज्य सरकारों द्वारा लगाया गया उच्च वैट है।
राज्यों में पेट्रोल की कीमत क्यों अलग-अलग होती है?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक समान नहीं होतीं। इसका मुख्य कारण है राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT)। हर राज्य अपने हिसाब से टैक्स तय करता है, जिससे कीमतों में अंतर आ जाता है।
उदाहरण के तौर पर:
- महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पेट्रोल महंगा है
- वहीं गोवा, गुजरात और चंडीगढ़ में अपेक्षाकृत सस्ता मिलता है
इसके अलावा, पेट्रोल-डीजल को अभी तक जीएसटी के दायरे में नहीं लाया गया है। यदि ऐसा होता है, तो देशभर में कीमतें एक समान हो सकती हैं, लेकिन इससे राज्यों के राजस्व पर असर पड़ेगा।
पेट्रोल-डीजल की कीमत कैसे तय होती है?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है:
1. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों का सीधा असर पड़ता है।
2. डॉलर-रुपया विनिमय दर
अगर डॉलर मजबूत होता है और रुपया कमजोर, तो आयात महंगा हो जाता है, जिससे ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं।
3. केंद्र और राज्य कर
केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है और राज्य सरकारें वैट लगाती हैं।
4. डीलर कमीशन
पेट्रोल पंप मालिकों को मिलने वाला कमीशन भी कीमत का हिस्सा होता है।
हालिया सरकारी फैसलों का असर
हाल ही में केंद्र सरकार ने डीजल पर एक्सपोर्ट चार्ज को बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं जेट फ्यूल (ATF) पर भी एक्सपोर्ट चार्ज बढ़ाया गया है। हालांकि पेट्रोल पर यह चार्ज अभी शून्य रखा गया है।
इन फैसलों का असर आने वाले समय में ईंधन की कीमतों पर देखने को मिल सकता है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ें।
क्या आगे बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:
- अमेरिका-ईरान के बीच तनाव
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा खतरे
- वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा
- कच्चे तेल की मांग में बढ़ोतरी
अगर ये परिस्थितियां और गंभीर होती हैं, तो भारत में भी ईंधन की कीमतों में तेजी आ सकती है।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। इसके कारण:
- परिवहन महंगा होता है
- सब्जियों और जरूरी सामान की कीमतें बढ़ती हैं
- महंगाई दर पर असर पड़ता है
इसलिए सरकारें अक्सर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश करती हैं, खासकर चुनावी समय या आर्थिक दबाव के दौरान।
निष्कर्ष
12 अप्रैल 2026 को जारी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भले ही बड़ा बदलाव नहीं हुआ हो, लेकिन वैश्विक बाजार की अनिश्चितता भविष्य के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। भारत में फिलहाल कीमतें स्थिर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात और सरकारी नीतियों के आधार पर इनमें बदलाव संभव है।
आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक तनाव कैसे विकसित होते हैं और कच्चे तेल की सप्लाई कितनी स्थिर रहती है।
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