वेदांता की केर्न ने असम के हजारीगांव क्षेत्र में गैस उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनाया है। जानिए यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, CNG, उद्योगों और गैस आयात पर कितना असर डाल सकती है।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा में क्यों अहम हो सकता है हजारीगांव गैस प्रोजेक्ट?
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विस्तार और परिवहन क्षेत्र की बढ़ती मांग के कारण देश की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि, भारत अब भी अपनी तेल और गैस आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे माहौल में घरेलू उत्पादन बढ़ाने वाली किसी भी परियोजना को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी दिशा में उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह की ऑयल एवं गैस इकाई केर्न (Cairn) ने असम के हजारीगांव क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। कंपनी के अनुसार, इस क्षेत्र से गैस उत्पादन ने नया रिकॉर्ड बनाया है, जो उत्तर-पूर्व भारत को ऊर्जा मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में ला सकता है।
कंपनी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, हजारीगांव परिसंपत्ति में एक्सटेंडेड वेल टेस्टिंग (EWT) के दौरान प्रतिदिन 1,78,361 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस उत्पादन दर्ज किया गया। यह इस क्षेत्र का अब तक का सर्वाधिक उत्पादन स्तर बताया गया है।
क्या है हजारीगांव परियोजना की खासियत?
असम लंबे समय से भारत के तेल और गैस उद्योग का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। डिगबोई से लेकर नुमालीगढ़ तक कई बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट इस राज्य में संचालित हैं। हजारीगांव क्षेत्र को भी इसी कड़ी में एक उभरते हुए गैस उत्पादन केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।
वेदांता की केर्न के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र ने औसतन करीब 1,02,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन बनाए रखा। यह केवल एक अस्थायी उपलब्धि नहीं बल्कि निरंतर उत्पादन क्षमता का संकेत माना जा रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में उत्पादन लंबे समय तक स्थिर बना रहता है तो वह भविष्य में बड़े निवेश आकर्षित करने में भी सक्षम होता है। इससे स्थानीय उद्योग, रोजगार और बुनियादी ढांचे को भी फायदा मिलता है।
20 लाख बैरल ऑयल समतुल्य क्षमता का दावा
कंपनी का अनुमान है कि हजारीगांव क्षेत्र से लगभग 20 लाख बैरल ऑयल समतुल्य (BOE) या करीब 11.76 बिलियन क्यूबिक फीट गैस की रिकवरी संभव है।
अगर यह अनुमान वास्तविक उत्पादन में बदलता है तो इसका प्रभाव केवल असम तक सीमित नहीं रहेगा। इससे भारत की घरेलू गैस उपलब्धता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
वर्तमान समय में भारत अपनी प्राकृतिक गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा एलएनजी (LNG) आयात करके पूरा करता है। वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अक्सर भारत के लिए चुनौती बनते हैं। ऐसे में घरेलू गैस उत्पादन बढ़ना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
Hydrocarbon Vision 2030 में क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट?
केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्व भारत के लिए Hydrocarbon Vision 2030 तैयार किया था। इसका उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद तेल और गैस संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना, निवेश आकर्षित करना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
वेदांता की केर्न इसी नीति के तहत अपने डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (DSF) ब्लॉक का विकास कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर-पूर्व भारत में अब भी कई ऐसे ऊर्जा भंडार मौजूद हैं जिनका पूरी तरह दोहन नहीं हो पाया है। यदि इन संसाधनों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ता है तो यह क्षेत्र देश की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
AGCL के साथ साझेदारी से क्या फायदा हुआ?
कंपनी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक असम गैस कंपनी लिमिटेड (AGCL) के साथ साझेदारी मानी जा रही है।
इस साझेदारी के माध्यम से केर्न उत्तर-पूर्व भारत में गैस का व्यावसायीकरण करने वाली पहली कंपनी बनी। इसका असर अब जमीन पर दिखाई भी देने लगा है।
वर्ष 2023 से चाय बागानों को गैस की आपूर्ति की जा रही है। पहले इन क्षेत्रों में कोयले का उपयोग ज्यादा होता था। गैस उपलब्ध होने से स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिला है और कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिल रही है।
100 CNG बसों को मिल रही गैस
गुवाहाटी में चल रही लगभग 100 सीएनजी बसों को भी इसी गैस से ऊर्जा मिल रही है। यह उत्तर-पूर्व भारत में स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) को भी कैप्टिव पावर उत्पादन के लिए गैस उपलब्ध कराई जा रही है। इससे औद्योगिक गतिविधियों को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति मिल रही है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि जब किसी गैस परियोजना से घरेलू, परिवहन और औद्योगिक तीनों क्षेत्रों को लाभ मिलने लगे तो उसकी आर्थिक उपयोगिता कई गुना बढ़ जाती है।
भारत की ऊर्जा रणनीति में कितना बड़ा योगदान?
भारत सरकार आने वाले वर्षों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी ऊर्जा मिश्रण में बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। वर्तमान में देश की कुल ऊर्जा खपत में गैस की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है।
सरकार का मानना है कि गैस कोयले और पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक स्वच्छ विकल्प है। इसलिए गैस आधारित उद्योगों, सीएनजी नेटवर्क और पाइप्ड गैस कनेक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ऐसे में हजारीगांव जैसे प्रोजेक्ट केवल एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा रणनीति का हिस्सा बन सकते हैं।
NewsJagran Analysis
वेदांता की केर्न द्वारा हासिल किया गया गैस उत्पादन रिकॉर्ड केवल एक कॉर्पोरेट उपलब्धि नहीं है। इसकी अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है।
यदि हजारीगांव क्षेत्र वास्तव में अपनी अनुमानित क्षमता के अनुसार उत्पादन करने में सफल रहता है तो इससे असम और पूरे उत्तर-पूर्व भारत की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है। साथ ही भारत की गैस आयात निर्भरता में भी कुछ हद तक कमी आ सकती है।
हालांकि, इस प्रोजेक्ट की वास्तविक सफलता का आकलन आने वाले वर्षों में व्यावसायिक उत्पादन, वितरण नेटवर्क और गैस की बाजार मांग के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि वेदांता की यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं का संकेत दे रही है।


