Vedanta Demerger: जून तक शुरू हो सकती है चार नई कंपनियों की ट्रेडिंग
नई दिल्ली। अरबपति कारोबारी और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने वेदांता डीमर्जर (Vedanta Demerger) को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। लंबे समय से निवेशकों के मन में यह सवाल था कि वेदांता से अलग हुई चार कंपनियों की शेयर बाजार में अलग-अलग लिस्टिंग आखिर कब होगी। अब खुद अनिल अग्रवाल ने इस पर स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि वेदांता ग्रुप से अलग हुई चारों कंपनियां अगले महीने तक स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो जाएंगी। यानी जून 2026 के मध्य तक इन कंपनियों में ट्रेडिंग शुरू होने की उम्मीद है।
यह डीमर्जर भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन (Corporate Restructuring) में से एक माना जा रहा है। इसके जरिए वेदांता अपने अलग-अलग कारोबारों को स्वतंत्र कंपनियों के रूप में विकसित करना चाहती है, ताकि हर बिजनेस अपनी क्षमता के हिसाब से तेजी से विस्तार कर सके।
1 मई 2026 से लागू हुआ था Vedanta Demerger
वेदांता का डीमर्जर प्लान 1 मई 2026 से प्रभावी हो चुका है। इसके तहत कंपनी के चार प्रमुख कारोबारों को अलग इकाइयों में बांटा गया है। इनमें Vedanta Aluminium, Vedanta Oil & Gas, Vedanta Power, Vedanta Iron & Steel शामिल हैं। डीमर्जर लागू होने के बाद इन चार कंपनियों के शेयर मौजूदा वेदांता शेयरधारकों के डीमैट अकाउंट में क्रेडिट भी हो चुके हैं। हालांकि, अभी तक इन शेयरों में बाजार में ट्रेडिंग शुरू नहीं हुई है। इसी वजह से निवेशक लगातार लिस्टिंग टाइमलाइन को लेकर सवाल उठा रहे थे। अब अनिल अग्रवाल के ताजा बयान से यह साफ हो गया है कि अगले महीने तक इन सभी कंपनियों की अलग-अलग लिस्टिंग पूरी हो सकती है। इससे पहले वेदांता रिसोर्सेज के CEO देशनी नायडू भी कह चुके हैं कि जून के मध्य तक नई कंपनियों की ट्रेडिंग शुरू होने की उम्मीद है।
दुनिया की सबसे बड़ी प्राइवेट एल्युमिनियम कंपनी बनने का लक्ष्य
डीमर्जर के बाद सबसे ज्यादा चर्चा Vedanta Aluminium को लेकर हो रही है। अनिल अग्रवाल ने कहा कि कंपनी अगले तीन वर्षों में एल्युमिनियम उत्पादन को दोगुना करने की तैयारी में है। उन्होंने बताया कि फिलहाल कंपनी सालाना लगभग 30 लाख टन एल्युमिनियम का उत्पादन कर रही है। अब इसका लक्ष्य इसे बढ़ाकर 60 लाख टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाना है। अगर कंपनी यह लक्ष्य हासिल कर लेती है, तो यह दुनिया की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की एल्युमिनियम कंपनी बन सकती है। वैश्विक स्तर पर एल्युमिनियम की मांग लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, रेलवे, एयरोस्पेस और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एल्युमिनियम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में वेदांता इस अवसर को बड़े विस्तार के रूप में देख रही है।
Industrial Park Model पर काम करेगी कंपनी
अनिल अग्रवाल ने इंटरव्यू में कहा कि कंपनी केवल एल्युमिनियम उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती। वेदांता एल्युमिनियम के आसपास “Industrial Park Model” विकसित किया जाएगा। इसके तहत करीब 1,000 डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्रीज विकसित करने की योजना है। यानी ऐसी छोटी और मध्यम कंपनियां जो एल्युमिनियम आधारित प्रोडक्ट तैयार करेंगी।
इस मॉडल से रोजगार बढ़ेगा, MSME सेक्टर को फायदा होगा, लोकल मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होगी, निर्यात क्षमता बढ़ सकती है विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह मॉडल सफल होता है, तो वेदांता भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकती है।
Oil & Gas बिजनेस को बताया ‘दिल और जान’
वेदांता के तेल और गैस कारोबार को लेकर भी अनिल अग्रवाल काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि Oil & Gas बिजनेस उनका “दिल और जान” है। उन्होंने बताया कि कंपनी अगले 3 से 5 वर्षों में उत्पादन बढ़ाकर 5 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचाना चाहती है। इसके लिए लगभग 5 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा।
भारत अभी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाने वाली कंपनियों को सरकार भी प्रोत्साहन दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वेदांता उत्पादन बढ़ाने में सफल रहती है, तो इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।
Vedanta Power को लेकर क्या है प्लान?
वेदांता की पावर कंपनी फिलहाल लगभग 4,000 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है। अनिल अग्रवाल ने कहा कि कंपनी के पास पर्याप्त कोयला लिंकिंग उपलब्ध है, जिससे ईंधन आपूर्ति की बड़ी समस्या नहीं होगी। उन्होंने कोयले को अभी भी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और टिकाऊ ऊर्जा स्रोत बताया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ते रुझान के बीच भविष्य में पावर सेक्टर में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। भारत में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इंडस्ट्री विस्तार, EV चार्जिंग नेटवर्क और डेटा सेंटर जैसे सेक्टर आने वाले वर्षों में पावर डिमांड को और बढ़ा सकते हैं।
Steel कारोबार में भी बड़ा विस्तार
Vedanta Iron & Steel के बारे में जानकारी देते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि समूह फिलहाल लगभग 40 लाख टन स्टील का उत्पादन कर रहा है। भारत सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भारी निवेश कर रही है। सड़क, रेलवे, हाउसिंग और डिफेंस सेक्टर में स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वेदांता स्टील कारोबार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है Vedanta Demerger?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, डीमर्जर के बाद निवेशकों को अलग-अलग बिजनेस में निवेश का स्पष्ट अवसर मिलेगा। अभी तक वेदांता के सभी कारोबार एक ही कंपनी के तहत थे, जिससे वास्तविक वैल्यू सामने नहीं आ पा रही थी।
डीमर्जर के बाद:
- हर बिजनेस की अलग वैल्यू तय होगी
- निवेशकों को सेक्टर आधारित निवेश विकल्प मिलेगा
- मैनेजमेंट फोकस बढ़ेगा
- फंड जुटाना आसान हो सकता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर नई कंपनियां मजबूत प्रदर्शन करती हैं, तो लंबे समय में शेयरधारकों को इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि लिस्टिंग के बाद इन कंपनियों का बाजार मूल्यांकन कितना होता है और शुरुआती ट्रेडिंग में निवेशकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है।
क्या भारत का मेटल सेक्टर नए दौर में प्रवेश कर रहा है?
भारत तेजी से मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है। सरकार की “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” जैसी योजनाएं मेटल और माइनिंग सेक्टर को नई दिशा दे रही हैं। ऐसे समय में वेदांता का यह डीमर्जर केवल कॉरपोरेट पुनर्गठन नहीं, बल्कि भारत के संसाधन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े विस्तार की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। अगर कंपनी अपने उत्पादन लक्ष्य हासिल करती है, तो आने वाले वर्षों में वेदांता वैश्विक मेटल और ऊर्जा सेक्टर में भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनियों में शामिल हो सकती है।
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