Vedanta Gold Exploration: अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता ने भारत में सोने और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को तेज करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने देश की पहली हाई-स्पीड हाइड्रोस्टैटिक पोर्टेबल रिग लॉन्च की है, जो जमीन के अंदर 1,000 मीटर तक गहराई में ड्रिलिंग कर सकती है। खास बात यह है कि इस मशीन को दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में भी आसानी से पहुंचाया जा सकता है।
वेदांता का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब भारत अपनी बढ़ती औद्योगिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। कंपनी इस नई तकनीक के जरिए सोने के साथ-साथ निकेल, क्रोमियम और प्लैटिनम ग्रुप एलिमेंट्स (PGE) जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की तलाश करेगी।
छत्तीसगढ़ से हुई शुरुआत, सोने समेत इन खनिजों पर नजर
वेदांता ने अपनी नई पोर्टेबल ड्रिलिंग रिग को फिलहाल छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स में तैनात किया है। यहां कंपनी का मुख्य फोकस सोने के अलावा निकेल, क्रोमियम और प्लैटिनम ग्रुप के तत्वों की खोज पर है।
नई रिग की मदद से कंपनी ऐसे इलाकों में भी खनिज भंडार तलाश सकेगी, जहां सामान्य और भारी ड्रिलिंग मशीनों को पहुंचाना मुश्किल होता है। इससे एक्सप्लोरेशन की प्रक्रिया को अधिक तेज और लचीला बनाने में मदद मिल सकती है।
1,000 मीटर तक ड्रिलिंग, क्या है इस मशीन की खासियत?
पारंपरिक माइनिंग एक्सप्लोरेशन में इस्तेमाल होने वाली कई ड्रिलिंग रिग आमतौर पर करीब 300 से 400 मीटर तक की गहराई में ड्रिलिंग करती हैं। इसके मुकाबले वेदांता की नई पोर्टेबल रिग करीब 1,000 मीटर तक ड्रिलिंग करने में सक्षम है।
इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी पोर्टेबिलिटी है। इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना अपेक्षाकृत आसान है। इसका मतलब है कि अलग-अलग और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में खनिजों की खोज के लिए मशीन को तेजी से तैनात किया जा सकता है।
इससे एक्सप्लोरेशन में लगने वाला समय कम करने और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों को घटाने में मदद मिल सकती है। गहरी ड्रिलिंग की क्षमता कंपनी को जमीन के नीचे मौजूद संभावित खनिज भंडार की बेहतर तरीके से जांच करने का अवसर भी देती है।
क्रिटिकल मिनरल्स में वेदांता की बड़ी मौजूदगी
वेदांता भारत में क्रिटिकल और रणनीतिक खनिजों की खोज के क्षेत्र में भी तेजी से विस्तार कर रही है। कंपनी ने कई महत्वपूर्ण मिनरल ब्लॉक्स हासिल किए हैं, जिनमें सोना, तांबा, मैंगनीज, टंगस्टन, ग्रेफाइट, वैनेडियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और पोटाश जैसे खनिज शामिल हैं।
कंपनी के मुताबिक, इनमें से कई ब्लॉक्स में एक्सप्लोरेशन गतिविधियां शुरू की जा चुकी हैं। हाल ही में वेदांता ने आंध्र प्रदेश के पुन्नम में एक मैंगनीज ब्लॉक भी हासिल किया है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सोना और क्रिटिकल मिनरल्स?
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे सेक्टर तेजी से बढ़ रहे हैं। इन उद्योगों के लिए तांबा, निकेल, लिथियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और दूसरे क्रिटिकल मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सोने का इस्तेमाल सिर्फ ज्वेलरी में ही नहीं होता, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसकी मांग है। वहीं तांबा और निकेल जैसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बिजली के नेटवर्क, बैटरी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में अहम भूमिका निभाते हैं।
यही वजह है कि भारत सरकार घरेलू स्तर पर खनिजों की खोज और उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। अगर देश में नए खनिज भंडार मिलते हैं और उनका व्यावसायिक उत्पादन शुरू होता है, तो लंबे समय में आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
‘Vedanta 2.0’ विजन के तहत एक्सप्लोरेशन पर जोर
वेदांता अपने विस्तार को ‘Vedanta 2.0’ विजन से भी जोड़ रही है। कंपनी का जोर नई तकनीक, एक्सप्लोरेशन क्षमता बढ़ाने और सस्टेनेबल माइनिंग पर है।
वेदांता का माइनिंग कारोबार भारत के अलावा दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, लाइबेरिया और जाम्बिया जैसे देशों तक फैला हुआ है। ऐसे में नई ड्रिलिंग तकनीक कंपनी के घरेलू एक्सप्लोरेशन नेटवर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारत में खनिज खोज की दिशा बदल सकता है यह कदम
भारत के सामने बड़ी चुनौती सिर्फ खनिजों का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि जमीन के अंदर मौजूद नए संसाधनों की पहचान करना भी है। गहरी ड्रिलिंग और पोर्टेबल तकनीक इस प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर सकती है।
वेदांता की 1,000 मीटर तक ड्रिलिंग करने वाली नई रिग अभी शुरुआती चरण में छत्तीसगढ़ के प्रोजेक्ट्स में काम कर रही है। अगर यहां से सोने या अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार की पुष्टि होती है, तो यह तकनीक देश के दूसरे कठिन इलाकों में भी एक्सप्लोरेशन के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
इस लिहाज से वेदांता का यह कदम सिर्फ कंपनी की खनिज खोज रणनीति के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की क्रिटिकल मिनरल्स और घरेलू रिसोर्स सिक्योरिटी की रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।


