Gold Price: सोने की कीमत में लगातार तीसरे सप्ताह तेजी देखने को मिली है। कमजोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक और ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों ने पीली धातु को मजबूती दी है। स्पॉट गोल्ड करीब 2% बढ़कर 4,603 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि साप्ताहिक आधार पर इसकी बढ़त करीब 5% रही। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालिया तेजी सिर्फ छोटी अवधि की चाल नहीं हो सकती, बल्कि सोने में लंबी अवधि के बुल रन की शुरुआत का संकेत भी दे सकती है।
Highlights
- सोने की कीमत लगातार तीसरे सप्ताह बढ़ी
- स्पॉट गोल्ड करीब 4,603 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा
- एक सप्ताह में सोने की कीमत करीब 5% चढ़ी
- कमजोर डॉलर से गोल्ड को मिला सपोर्ट
- अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक फैसले का भी असर
- एक्सपर्ट्स लंबी अवधि में सोने को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं
तीन महीने के ऊंचे स्तर पर सोना
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत लगातार तीसरे सप्ताह बढ़ी है। इस तेजी के साथ कीमती धातु लगभग तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड करीब 2% की तेजी के साथ 4,603 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। साप्ताहिक आधार पर सोने में करीब 5% की तेजी दर्ज की गई।
घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में मजबूत तेजी देखने को मिली। एमसीएक्स पर शुक्रवार को सोना 1,62,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ।
सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमत में तेजी रही। गुडरिटर्न्स के मुताबिक 24 कैरेट सोना 1,520 रुपये की बढ़त के साथ 1,63,090 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। वहीं 22 कैरेट सोना 1,400 रुपये चढ़कर 1,49,500 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,140 रुपये की तेजी के साथ 1,22,320 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
हालांकि, अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच सोने की कीमत में अंतर हो सकता है। इसके अलावा मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्क जुड़ने के बाद ग्राहकों के लिए वास्तविक खरीद कीमत अलग रहती है।
सोने में तेजी की सबसे बड़ी वजह क्या है?
सोने की हालिया तेजी के पीछे कई वैश्विक कारक काम कर रहे हैं। इनमें अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड मार्केट से जुड़ी रणनीति प्रमुख है।
आमतौर पर डॉलर और सोने के बीच विपरीत संबंध देखा जाता है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है तो दूसरी करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए डॉलर में कीमत वाला सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इससे गोल्ड की मांग को सपोर्ट मिल सकता है।
हाल के दिनों में डॉलर में कमजोरी ने भी सोने की कीमत को सहारा दिया है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित रखने की कोशिशों ने भी निवेशकों का ध्यान सोने की तरफ बढ़ाया है।
अमेरिकी ट्रेजरी का बॉन्ड बायबैक बना सपोर्ट
अमेरिकी ट्रेजरी ने अगले क्वार्टर में लंबी अवधि की ट्रेजरी सिक्योरिटीज के बॉन्ड बायबैक का आकार बढ़ाने की घोषणा की है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रति ऑपरेशन बॉयबैक का आकार कम से कम 4 अरब डॉलर किया जाएगा।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी संकेत दिया है कि सरकार जरूरत पड़ने पर रीपरचेज का आकार और बढ़ा सकती है।
इस कदम का उद्देश्य लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड को नियंत्रित रखने में मदद करना है। बॉन्ड यील्ड में कमी आने पर सोने जैसे बिना ब्याज देने वाले एसेट को रखने की अवसर लागत कम हो जाती है। यही वजह है कि बॉन्ड मार्केट से जुड़े इस फैसले को गोल्ड के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
ब्याज दरों पर भी नजर
सोने की अगली चाल के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति भी बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। बाजार में फिलहाल यह उम्मीद मजबूत है कि फेड अगली बैठक में ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा।
आमतौर पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि गोल्ड से निवेशकों को नियमित ब्याज या यील्ड नहीं मिलती। ऐसे में जब बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों पर रिटर्न ज्यादा होता है तो सोने की आकर्षकता कम हो सकती है।
इसके उलट ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद या बॉन्ड यील्ड में गिरावट सोने के पक्ष में माहौल बना सकती है। यही कारण है कि निवेशक आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेड के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
महंगाई के खिलाफ हेज के तौर पर भी सोना
सोने को लंबे समय से महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के खिलाफ एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है। जब निवेशकों को वैश्विक अर्थव्यवस्था, करेंसी या वित्तीय बाजारों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती हुई दिखाई देती है तो वे अपने पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा गोल्ड जैसे एसेट में लगा सकते हैं।
हालांकि, केवल महंगाई ही सोने की कीमत तय नहीं करती। डॉलर, बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों की नीतियां, जियोपॉलिटिकल तनाव और निवेशकों की धारणा भी इसकी कीमत पर असर डालती है।
यही वजह है कि इस समय सोने की तेजी को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। मौजूदा रैली के पीछे कई वैश्विक कारकों का एक साथ काम करना महत्वपूर्ण है।
क्या सोने में लंबी तेजी शुरू हो गई है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने में शुरू हुई तेजी आगे भी जारी रहेगी। बाजार के कुछ बड़े एक्सपर्ट्स मौजूदा तेजी को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं।
जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रैटेजी क्रिस्टोफर वुड और अरबपति हेज फंड मैनेजर जॉन पॉलसन के अनुसार, सोने में आई पिछली गिरावट निवेशकों के लिए धीरे-धीरे खरीदारी का मौका हो सकती है।
इनके नजरिए के मुताबिक सोने में हालिया कमजोरी को लंबी अवधि के निवेश के लिए अवसर के रूप में देखा जा सकता है। यदि वैश्विक स्तर पर आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी रहती है, डॉलर कमजोर रहता है और बॉन्ड यील्ड पर दबाव बना रहता है तो गोल्ड को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है।
पहले भी दिखी है बड़ी तेजी
सोने में इस साल पहले भी जबरदस्त तेजी देखने को मिल चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी के अंत में सोने की कीमत 5,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
अब लगातार तीन सप्ताह की तेजी ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान सोने की ओर खींचा है। हालांकि, पिछले उच्च स्तरों को देखते हुए यह भी जरूरी है कि निवेशक केवल तेजी देखकर एकमुश्त निवेश करने के बजाय कीमतों और वैश्विक संकेतकों का आकलन करें।
आगे सोने की कीमत किस दिशा में जा सकती है?
आने वाले समय में सोने की कीमत की दिशा मुख्य रूप से चार चीजों पर निर्भर करेगी—अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वैश्विक आर्थिक एवं भू-राजनीतिक परिस्थितियां।
अगर डॉलर में कमजोरी बनी रहती है और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पर दबाव आता है तो सोने को फायदा मिल सकता है। इसके अलावा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ने पर भी गोल्ड की मांग मजबूत हो सकती है।
दूसरी तरफ, अगर डॉलर मजबूत होता है, बॉन्ड यील्ड बढ़ती है या केंद्रीय बैंक अपेक्षा से ज्यादा सख्त रुख अपनाते हैं तो सोने की तेजी पर ब्रेक लग सकता है। इसलिए मौजूदा स्तरों पर सोने में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
सोने की कीमत रिकॉर्ड और ऊंचे स्तरों के आसपास रहने के कारण निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। जिन लोगों का निवेश का नजरिया लंबी अवधि का है, वे अपने कुल पोर्टफोलियो में गोल्ड की उचित हिस्सेदारी पर विचार कर सकते हैं।
हालांकि, सोने में निवेश करने से पहले निवेश का उद्देश्य, जोखिम उठाने की क्षमता और समयावधि देखना जरूरी है। ज्वेलरी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए भी केवल बाजार भाव देखना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि अंतिम कीमत में जीएसटी, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क शामिल हो सकते हैं।
निष्कर्ष: सोने में लगातार तीसरे सप्ताह आई तेजी ने यह संकेत दिया है कि कीमती धातु में निवेशकों की दिलचस्पी फिर मजबूत हो रही है। कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेत फिलहाल गोल्ड के पक्ष में हैं। एक्सपर्ट्स का एक वर्ग मानता है कि यह लंबी अवधि की तेजी की शुरुआत हो सकती है, लेकिन सोने की कीमत आगे कहां जाएगी, यह वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर काफी हद तक निर्भर करेगा। इसलिए निवेशकों को तेजी के बीच जोखिम और अपने निवेश लक्ष्य दोनों को ध्यान में रखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध बाजार जानकारी और एक्सपर्ट्स के बयानों पर आधारित है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। किसी भी निवेश का फैसला करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


