Gold Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब तीन महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है और लगातार तीसरे सप्ताह बढ़त दर्ज कर रहा है। इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹1,62,440 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी ₹2,46,360 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। यानी चांदी अब ₹2.50 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर से ज्यादा दूर नहीं है।
इस तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण एक साथ काम कर रहे हैं। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी, बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक व भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों को सोने और चांदी की ओर आकर्षित किया है।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब कीमती धातुओं में इतनी बड़ी तेजी देखने को मिली है। जनवरी में भारत में सोना करीब ₹1.80 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है, जबकि चांदी करीब ₹4.25 लाख प्रति किलोग्राम तक उछली थी। ऐसे में मौजूदा तेजी ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान बुलियन मार्केट की ओर खींच दिया है।
सोने-चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
मौजूदा तेजी को समझने के लिए सिर्फ घरेलू बाजार को देखना पर्याप्त नहीं है। भारत में सोने-चांदी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर-रुपया विनिमय दर, अमेरिकी ब्याज दरों और वैश्विक निवेश धारणा का सीधा असर पड़ता है।
इस समय कई ऐसे फैक्टर एक साथ नजर आ रहे हैं, जो कीमती धातुओं के पक्ष में हैं।
1. कमजोर अमेरिकी डॉलर से मिला सोने को सपोर्ट
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी सोने की हालिया तेजी की प्रमुख वजहों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है। ऐसे में डॉलर कमजोर होने पर दूसरी मुद्राओं में खरीदारी करने वाले निवेशकों के लिए कीमती धातुएं अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती हैं।
इससे मांग बढ़ने की संभावना बनती है और कीमतों को सपोर्ट मिलता है। यही वजह है कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी को गोल्ड मार्केट के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।
चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के मुताबिक, कमजोर डॉलर के साथ वैश्विक स्तर पर बढ़ी अनिश्चितता ने कीमती धातुओं को अतिरिक्त सहारा दिया है।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव
सोने से निवेशकों को ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। इसलिए जब अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशकों के लिए बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं।
इसके उलट यील्ड में गिरावट या मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर सोने की मांग मजबूत हो सकती है।
मौजूदा समय में अमेरिकी ट्रेजरी मार्केट में होने वाले बदलावों पर निवेशकों की नजर है। अमेरिकी सरकार की ट्रेजरी सिक्योरिटीज की रीपरचेज रणनीति और लंबी अवधि की सिक्योरिटीज को लेकर फैसलों ने भी बाजार की निगाहें यील्ड पर टिकाई हुई हैं।
3. फेड की ब्याज दरों पर अनिश्चितता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली चाल सोने और चांदी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बाजार यह आंकलन करने में जुटा है कि आने वाले समय में अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव होगा या नहीं।
उपलब्ध बाजार अनुमान के मुताबिक, ट्रेडर्स का एक बड़ा हिस्सा अगली बैठक में दरों में बदलाव नहीं होने की संभावना देख रहा है। वहीं, दरों में बदलाव को लेकर भी बाजार में पर्याप्त अनिश्चितता बनी हुई है।
यही अनिश्चितता सोने के लिए सपोर्टिव माहौल बना सकती है। अगर बाजार में भविष्य में ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है, तो सोने की मांग को और मजबूती मिल सकती है।
भू-राजनीतिक तनाव ने बढ़ाई सेफ-हेवन डिमांड
जब दुनिया में आर्थिक या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक अक्सर ऐसे एसेट की तलाश करते हैं जिन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। सोना लंबे समय से ऐसे ही सेफ-हेवन एसेट के रूप में देखा जाता रहा है।
ईरान से जुड़े घटनाक्रम और संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर बाजार में चिंता बनी हुई है। तेल की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंता भी पैदा होती है।
ऐसे माहौल में निवेशक पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा बढ़ा सकते हैं। इससे सोने की कीमतों को अतिरिक्त सपोर्ट मिलता है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बड़ा सहारा
सोने की मौजूदा तेजी सिर्फ ट्रेडर्स और रिटेल निवेशकों की मांग पर निर्भर नहीं है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक पिछले कुछ वर्षों से अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
केंद्रीय बैंकों के लिए सोना अपने रिजर्व में विविधता लाने का एक माध्यम है। खासकर डॉलर आधारित संपत्तियों पर निर्भरता को संतुलित करने के लिए भी सोने की खरीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है।
पिंकी यादव के मुताबिक, ग्लोबल गोल्ड ETF में निवेश और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी बुलियन मार्केट के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट फैक्टर हैं। अगर यह मांग बनी रहती है, तो ऊंचे भाव पर भी सोने को सपोर्ट मिल सकता है।
चांदी भी क्यों भाग रही है?
सोने के साथ चांदी में भी तेज उछाल देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर की कीमत करीब 1.8% बढ़कर लगभग 69.31 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
चांदी को डॉलर में कमजोरी और ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों का फायदा तो मिलता ही है, लेकिन इसकी कहानी सोने से थोड़ी अलग है। चांदी एक कीमती धातु होने के साथ-साथ औद्योगिक धातु भी है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की मांग इसकी कीमतों को प्रभावित करती है। इसलिए जब निवेश मांग और औद्योगिक मांग दोनों मजबूत होती हैं, तो चांदी में तेजी ज्यादा तेज हो सकती है।
इसी वजह से MCX पर चांदी ₹2.50 लाख प्रति किलोग्राम के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गई है।
प्लैटिनम और पैलेडियम में भी तेजी
कीमती धातुओं की व्यापक तेजी सिर्फ सोने और चांदी तक सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्लैटिनम की कीमत करीब 2.6% बढ़कर 1,875.75 डॉलर प्रति औंस और पैलेडियम लगभग 1.7% बढ़कर 1,356.59 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया।
यह संकेत देता है कि फिलहाल वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं में निवेश धारणा मजबूत बनी हुई है।
आगे सोने और चांदी की कीमतों का क्या होगा?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा मुख्य रूप से कुछ बड़े संकेतकों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, महंगाई के आंकड़े, अमेरिकी रोजगार और अन्य आर्थिक डेटा तथा फेडरल रिजर्व के संकेत प्रमुख हैं।
इसके अलावा 27 से 29 अगस्त के बीच होने वाला जैक्सन होल सिम्पोजियम भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। निवेशक फेड के अधिकारियों के बयानों से अमेरिकी मौद्रिक नीति की अगली दिशा के संकेत तलाशेंगे।
अगर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में कमजोरी जारी रहती है तथा ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मजबूत होती है, तो सोने-चांदी को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। दूसरी ओर, डॉलर में तेज मजबूती और यील्ड बढ़ने से कीमती धातुओं पर दबाव भी आ सकता है।
भारत में कीमतों पर रुपये की भी नजर
भारतीय निवेशकों के लिए सिर्फ अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत देखना पर्याप्त नहीं है। घरेलू बाजार में सोने और चांदी के भाव पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर का भी सीधा असर पड़ता है।
अगर रुपया कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत स्थिर रहने के बावजूद भारत में सोना और चांदी महंगे हो सकते हैं। वहीं, रुपये में मजबूती घरेलू कीमतों पर कुछ दबाव डाल सकती है।
इसलिए भारतीय बाजार में आने वाले दिनों की तस्वीर समझने के लिए ग्लोबल बुलियन प्राइस के साथ डॉलर-रुपया रेट पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
ऊंचे भाव का फिजिकल डिमांड पर असर
सोने और चांदी के लगातार महंगे होने का एक दूसरा पहलू भी है। ऊंची कीमतें निवेशकों के लिए आकर्षण बढ़ा सकती हैं, लेकिन ज्वेलरी खरीदने वाले आम ग्राहकों के लिए यह बोझ बढ़ाती हैं।
भारत में सोने के रिकॉर्ड ऊंचे भाव के कारण कुछ रिटेल खरीदार खरीदारी टाल सकते हैं। दूसरी ओर, वैश्विक निवेश मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी कीमतों को सपोर्ट दे सकती है।
यानी मौजूदा समय में बुलियन मार्केट में एक तरफ रिकॉर्ड ऊंची कीमतें मांग को प्रभावित कर रही हैं, तो दूसरी तरफ वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियां निवेश मांग को मजबूत बनाए हुए हैं।
निष्कर्ष: सोने का ₹1.62 लाख के पार जाना और चांदी का ₹2.50 लाख के करीब पहुंचना किसी एक वजह का नतीजा नहीं है। कमजोर डॉलर, बॉन्ड यील्ड में बदलाव, फेड की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने मिलकर कीमती धातुओं को मजबूत किया है। अब बाजार की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और जैक्सन होल सिम्पोजियम पर रहेगी। निवेशकों को तेजी के बीच सिर्फ रिकॉर्ड कीमत देखकर फैसला लेने के बजाय अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।


