Nirmala Sitharaman US-Canada Visit: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगी। इस दौरान वह जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों (FMCBG) की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी। साथ ही दोनों देशों के साथ आर्थिक और वित्तीय सहयोग, निवेश के अवसरों और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर अहम बातचीत करेंगी।
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आगामी अमेरिका-कनाडा दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव देखने को मिल रहा है। हाल में दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में गतिरोध ने इस दौरे की अहमियत और बढ़ा दी है। ऐसे में सीतारमण की बैठकों पर वैश्विक निवेशकों और कारोबारी जगत की भी नजर रहेगी।
भारत के लिए यह दौरा केवल जी-20 बैठक तक सीमित नहीं है। वित्त मंत्री दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, निवेश के नए अवसर तलाशने और वैश्विक आर्थिक प्राथमिकताओं पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश करेंगी।
कनाडा में किन मुद्दों पर होगी बातचीत?
सीतारमण अपने कनाडा दौरे की शुरुआत टोरंटो से करेंगी। यहां वह कनाडा के वित्त और राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ पहली आर्थिक और वित्तीय बातचीत में हिस्सा लेंगी।
इस बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक और घरेलू मैक्रो-इकोनॉमिक परिस्थितियों पर चर्चा होगी। निवेश के अवसर और वित्तीय क्षेत्र में सहयोग भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे।
दोनों पक्ष एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और मजबूत सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा करेंगे। इसके अलावा भारत-कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की दिशा में चल रही बातचीत को भी आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा।
बिजनेस लीडर्स के साथ भी बैठकें करेंगी वित्त मंत्री
टोरंटो में निर्मला सीतारमण निवेश राउंडटेबल में भी हिस्सा लेंगी। इसमें एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़े कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ निवेश के अवसरों पर चर्चा होगी।
इसके अलावा वह भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों और कनाडा के कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ बिजनेस राउंडटेबल में शामिल होंगी। इस दौरान GIFT City-IFSC में उपलब्ध वित्तीय और निवेश के अवसरों को भी सामने रखा जाएगा।
वित्त मंत्री कनाडा-इंडिया बिजनेस काउंसिल और कनाडियन क्लब ऑफ टोरंटो से जुड़े कार्यक्रमों में भी भाग लेंगी। इसके साथ ही वह कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों और भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात करेंगी।
अमेरिका में भी व्यस्त रहेगा कार्यक्रम
कनाडा के बाद वित्त मंत्री अमेरिका जाएंगी। 28 अगस्त से 2 सितंबर के बीच उनके कार्यक्रम में शिकागो, एशविले और न्यूयॉर्क शामिल हैं।
शिकागो में सीतारमण निवेशकों के साथ राउंडटेबल बैठक करेंगी और कॉरपोरेट जगत के प्रमुख लोगों से मुलाकात करेंगी। वह यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के पोल्स्की सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन का दौरा भी करेंगी।
यहां उनका फोकस भारत में निवेश के अवसरों, आर्थिक विकास और नवाचार से जुड़े मुद्दों को लेकर कारोबारी समुदाय के साथ संवाद पर रहेगा।
G20 बैठक में भारत की अहम भागीदारी
31 अगस्त और 1 सितंबर को सीतारमण नॉर्थ कैरोलिना के एशविले में होने वाली G20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों (FMCBG) की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी।
G20 फाइनेंस ट्रैक में भारत की भागीदारी वैश्विक आर्थिक विकास और स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर देश का पक्ष रखने का महत्वपूर्ण मंच होगी। बैठक में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहयोग, वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकसित तथा उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत इस मंच के जरिए वैश्विक आर्थिक स्थिरता, विकास और वित्तीय सहयोग को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को भी सामने रख सकेगा।
न्यूयॉर्क में निवेशकों से करेंगी मुलाकात
दौरे के आखिरी चरण में निर्मला सीतारमण न्यूयॉर्क जाएंगी। यहां वह निवेशकों और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करेंगी।
वित्त मंत्री NASDAQ में आयोजित बेल-रिंगिंग सेरेमनी में भी हिस्सा लेंगी। यह कार्यक्रम भारत और अमेरिका के बीच वित्तीय बाजारों से जुड़े संबंधों और निवेश सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिका-कनाडा तनाव के बीच क्यों अहम है दौरा?
निर्मला सीतारमण का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में भारत दोनों देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को अलग-अलग स्तर पर मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, AI और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र रणनीतिक महत्व रखते हैं। इन क्षेत्रों में अमेरिका और कनाडा दोनों के साथ सहयोग बढ़ने से भारत को निवेश और आपूर्ति के नए विकल्प मिल सकते हैं।
इसके अलावा G20 मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी से वैश्विक आर्थिक नीतियों से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताओं को मजबूती से रखने का अवसर मिलेगा। यही वजह है कि वित्त मंत्री की यह यात्रा भारत के आर्थिक और कूटनीतिक हितों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


