Hyundai Motor India Share: हुंडई मोटर इंडिया के शेयर को लेकर ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का रुख सकारात्मक बना हुआ है। ब्रोकरेज ने कंपनी के स्टॉक पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। नोमुरा का मानना है कि आने वाले वर्षों में कंपनी की नई कारों की लॉन्चिंग, बढ़ती उत्पादन क्षमता और बेहतर वॉल्यूम ग्रोथ से कारोबार को मजबूती मिल सकती है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही यानी अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के दौरान नई लॉन्चिंग्स का असर कंपनी की बिक्री पर दिखाई दे सकता है। इससे Hyundai Motor India के वॉल्यूम में तेजी आने की उम्मीद है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 में घरेलू और एक्सपोर्ट बाजार को मिलाकर 8-10 प्रतिशत वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य रखा है।
FY26-30 में 26 नए मॉडल लाने की तैयारी
हुंडई मोटर इंडिया वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच करीब 26 नए मॉडल बाजार में उतारने की योजना बना रही है। नोमुरा के अनुसार, नई गाड़ियों की लॉन्चिंग कंपनी के लिए अगले कुछ वर्षों में ग्रोथ का अहम आधार बन सकती है।
वित्त वर्ष 2027 के फेस्टिव सीजन में कंपनी एक मिड-साइज ICE SUV लॉन्च कर सकती है। इसके बाद फेस्टिव सीजन के बाद एक कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक SUV पेश किए जाने की उम्मीद है। इन नए मॉडल्स से कंपनी को खासतौर पर SUV और इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अगले 1-2 वर्षों में हुंडई की हाइब्रिड मॉडल लॉन्च करने की योजना नहीं है। कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति के तहत वित्त वर्ष 2030 तक 5-6 हाइब्रिड प्रोडक्ट्स लाने की योजना बताई गई है।
2030 तक 15% से ज्यादा मार्केट शेयर का लक्ष्य
Hyundai Motor India ने वित्त वर्ष 2030 तक घरेलू ऑटो बाजार में 15 प्रतिशत से ज्यादा मार्केट शेयर हासिल करने का लक्ष्य रखा है। नोमुरा का मानना है कि लगातार नई लॉन्चिंग और उत्पादन क्षमता में विस्तार इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 में आई चुनौतियों के बाद जुलाई-सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही में कंपनी के वॉल्यूम में सुधार के संकेत मिले हैं। इसके बाद वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में नए मॉडल्स की लॉन्चिंग से बिक्री को और गति मिलने की उम्मीद है।
पुणे प्लांट की क्षमता बढ़ाने की योजना
कंपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। नोमुरा के मुताबिक, पुणे प्लांट में करीब 1.50 लाख यूनिट अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना है। इससे कैलेंडर वर्ष 2030 तक Hyundai Motor India की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 11 लाख यूनिट प्रति वर्ष हो सकती है।
कंपनी अक्टूबर 2027 तक पुणे प्लांट की क्षमता को मौजूदा लगभग 1.20 लाख यूनिट से बढ़ाकर करीब 1.70 लाख यूनिट करना चाहती है। उत्पादन क्षमता बढ़ने से कंपनी को घरेलू मांग के साथ-साथ एक्सपोर्ट बाजार की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल सकती है।
EBITDA मार्जिन में सुधार का अनुमान
नोमुरा को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-29 के दौरान Hyundai Motor India का घरेलू वॉल्यूम करीब 11 प्रतिशत CAGR की दर से बढ़ सकता है। ब्रोकरेज ने कंपनी के EBITDA मार्जिन को लेकर भी सकारात्मक अनुमान दिया है।
| वित्त वर्ष | अनुमानित EBITDA मार्जिन |
|---|---|
| FY27 | 11.5% |
| FY28 | 12.7% |
| FY29 | 13.4% |
कंपनी मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 11-14 प्रतिशत EBITDA मार्जिन का अनुमान बरकरार रखा है। अगर वॉल्यूम ग्रोथ और नई लॉन्चिंग उम्मीद के मुताबिक रहती हैं, तो ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार कंपनी की कमाई के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।
1 सितंबर से बढ़ेंगे Hyundai कारों के दाम
Hyundai Motor India अपनी सभी कारों की कीमतों में 1 सितंबर 2026 से 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने जा रही है। हालांकि, प्रत्येक मॉडल और वेरिएंट पर कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग हो सकती है।
इससे पहले कंपनी ने कीमतों में बदलाव को लेकर बाजार को जानकारी दी थी। नई कीमतों का असर आने वाले महीनों में कंपनी की औसत बिक्री कीमत और राजस्व पर भी दिखाई दे सकता है।
Hyundai Motor India Share Price
24 अगस्त 2026 को Hyundai Motor India का शेयर BSE पर गिरावट के साथ ₹2,205 के स्तर पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹1.79 लाख करोड़ से ज्यादा है। कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू ₹10 है और यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है।
शेयर ने पिछले 3 महीनों में करीब 19 प्रतिशत की तेजी दर्ज की है। ऐसे में नई लॉन्चिंग, उत्पादन क्षमता में विस्तार और मार्जिन में संभावित सुधार निवेशकों के लिए आगे के प्रमुख ट्रिगर रह सकते हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
नोमुरा की ‘Buy’ रेटिंग से Hyundai Motor India के शेयर को लेकर ब्रोकरेज का सकारात्मक नजरिया साफ होता है। हालांकि, शेयर बाजार में किसी भी स्टॉक का प्रदर्शन कई कारकों पर निर्भर करता है। कंपनी की वास्तविक बिक्री, नई गाड़ियों की बाजार में स्वीकार्यता, मार्जिन, कच्चे माल की लागत और ऑटो सेक्टर की मांग जैसे पहलुओं पर नजर रखना जरूरी होगा।
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