Gold Price Today: सोने की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड लंबे समय बाद $4,500 प्रति औंस के स्तर के ऊपर बना हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी के एक अहम फैसले के बाद बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर की कमजोरी ने सोने की चमक बढ़ा दी है। घरेलू बाजार में भी MCX गोल्ड रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब कारोबार कर रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सोने की कीमतों में आगे भी तेजी जारी रहेगी और इस समय निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत ने हाल के दिनों में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। 19 अगस्त को COMEX गोल्ड ने $4,571.80 प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ था। हालांकि इसके बाद कीमत में मामूली मुनाफावसूली देखने को मिली। गुरुवार को गोल्ड करीब 0.05 फीसदी की गिरावट के साथ $4,542.90 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। इसके बावजूद सोना $4,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर बना हुआ है, जो इसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
घरेलू बाजार में भी तेजी का असर साफ दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को करीब 14:58 IST पर MCX पर सोने की हाजिर कीमत लगभग ₹1,56,571 प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 5 अक्टूबर एक्सपायरी वाला MCX गोल्ड फ्यूचर्स करीब 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ ₹1,58,729 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इससे पहले 19 अगस्त को LBMA स्पॉट गोल्ड की PM Fixing कीमत $4,460.70 प्रति औंस दर्ज की गई थी।
अमेरिका के एक फैसले से क्यों चमका सोना?
सोने में आई इस तेज उछाल के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी का एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी ने लंबी अवधि की प्रतिभूतियों की बायबैक बढ़ाने का कदम उठाया है। बाजार ने इसे बॉन्ड मार्केट के लंबे सिरे पर लिक्विडिटी सुधारने और लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड पर दबाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा।
इस फैसले के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई। 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड घटकर करीब 4.64 फीसदी और 30 साल की यील्ड करीब 5.18 फीसदी पर आ गई। वहीं शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर में लगभग 0.76 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली।
यह स्थिति सोने के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है। दरअसल, सोना खुद कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में जब बॉन्ड यील्ड घटती है, तो सोने को रखने की अवसर लागत कम हो जाती है। दूसरी ओर, डॉलर कमजोर होने से डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटी विदेशी खरीदारों के लिए अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती है। यही वजह है कि यील्ड में गिरावट और डॉलर की कमजोरी ने सोने की मांग को मजबूत किया।
बोनांजा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के मुताबिक, यील्ड में गिरावट और डॉलर की कमजोरी ने बिना ब्याज वाले एसेट यानी सोने के लिए माहौल को और बेहतर किया है। बाजार ने अमेरिकी ट्रेजरी के कदम को लंबी अवधि की यील्ड में बढ़ोतरी को रोकने और बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी सुधारने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा।
सिर्फ अमेरिकी ट्रेजरी का फैसला नहीं है तेजी की वजह
हालांकि, सोने की मौजूदा तेजी को केवल अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले से जोड़ना सही नहीं होगा। बाजार में पहले से कई ऐसे फैक्टर मौजूद हैं, जो सोने की कीमत को सपोर्ट दे रहे हैं।
VT Markets के मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी का फैसला एक दिन की तेजी को समझाने में मदद करता है, लेकिन सोने की पूरी तेजी के पीछे यह अकेला कारण नहीं है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें भी सोने की कीमत को प्रभावित कर रही हैं।
इसके अलावा दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित कर रही है। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने को पारंपरिक रूप से सुरक्षित एसेट के तौर पर देखा जाता है। यही कारण है कि वैश्विक तनाव के बीच गोल्ड की मांग मजबूत बनी हुई है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी भी इसकी कीमतों को लंबे समय से सपोर्ट दे रही है। केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इससे गोल्ड की लंबी अवधि की मांग को मजबूती मिलती है।
क्या अब सोना खरीदना चाहिए?
सोने की कीमत रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंचने के बाद नए निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभी खरीदारी का सही समय है। विशेषज्ञों की सलाह है कि केवल तेजी देखकर बाजार में जल्दबाजी में प्रवेश करने से बचना चाहिए।
VT Markets के रुचित ठाकुर के मुताबिक, मौजूदा ऊंचे स्तरों पर तेजी का पीछा करना जोखिम भरा हो सकता है। यानी अगर किसी निवेशक ने अब तक सोने में निवेश नहीं किया है, तो एक ही बार में बड़ी रकम लगाना उचित रणनीति नहीं मानी जा सकती।
वहीं जिन निवेशकों के पास पहले से गोल्ड की होल्डिंग है, वे अपनी मौजूदा पोजीशन को बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सोने की कीमत बिना किसी गिरावट के लगातार ऊपर ही जाएगी। रिकॉर्ड स्तरों पर मुनाफावसूली के कारण बीच-बीच में करेक्शन भी देखने को मिल सकता है।
नए निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो?
अगर कोई नया निवेशक सोने में निवेश करना चाहता है, तो उसके लिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ज्यादा बेहतर रणनीति हो सकती है। तेज उछाल के तुरंत बाद पूरी रकम निवेश करने के बजाय कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे खरीदारी की जा सकती है।
इस तरह निवेशक एक ही कीमत पर पूरा निवेश करने के जोखिम को कम कर सकता है। हालांकि, निवेश की रणनीति व्यक्ति के लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि के हिसाब से अलग हो सकती है।
आगे सोने की कीमत किस दिशा में जाएगी?
आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय करने में कई महत्वपूर्ण संकेतों की भूमिका रहेगी। निवेशकों को खास तौर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।
अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में और गिरावट आती है और डॉलर कमजोर रहता है, तो सोने को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर सुरक्षित निवेश के रूप में गोल्ड की मांग बढ़ सकती है।
दूसरी तरफ, अगर डॉलर में मजबूती आती है, बॉन्ड यील्ड बढ़ती है या बाजार में सोने की कीमतों पर मुनाफावसूली बढ़ती है, तो गोल्ड में अस्थायी करेक्शन देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की अहम सलाह
फिलहाल सोना बेहद ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है। ऐसे में सिर्फ यह देखकर निवेश करना कि कीमत लगातार बढ़ रही है, जोखिम भरा हो सकता है। पुराने निवेशक अपनी होल्डिंग और अपने निवेश लक्ष्य के अनुसार फैसला ले सकते हैं, जबकि नए निवेशकों के लिए चरणबद्ध खरीदारी का विकल्प ज्यादा संतुलित हो सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि सोने की कीमतों में तेजी के बावजूद निवेशकों को अपनी पूरी पूंजी एक ही एसेट में लगाने से बचना चाहिए। पोर्टफोलियो में उचित डायवर्सिफिकेशन और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश करना लंबे समय में ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
नोट: सोने की कीमतों में तेजी के बावजूद भविष्य की दिशा निश्चित नहीं है। निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: NewsJagran.in पर प्रकाशित निवेश संबंधी जानकारी और विशेषज्ञों के विचार केवल सूचनात्मक उद्देश्य से दिए गए हैं। इन्हें निवेश की सलाह न माना जाए। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


