Tata Power Share News: टाटा ग्रुप की प्रमुख पावर कंपनी टाटा पावर को सरकारी कंपनी SECI (Solar Energy Corporation of India) से बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को 324 मेगावाट (MW) / 2,592 मेगावाट-घंटे (MWh) क्षमता वाले पंप स्टोरेज पावर प्रोजेक्ट के निर्माण और संचालन के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) जारी किया गया है। इस प्रोजेक्ट के जरिए कंपनी को अगले 40 वर्षों तक हर साल करीब ₹351 करोड़ की निश्चित आय मिलने की उम्मीद है। ऐसे में सोमवार को शेयर बाजार खुलने पर निवेशकों की नजर टाटा पावर के स्टॉक पर रहेगी।
Tata Power को मिला 40 साल का लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट
SECI की ओर से जारी लेटर ऑफ अवार्ड के तहत टाटा पावर अपने 324 MW / 2,592 MWh पंप स्टोरेज प्लांट के माध्यम से एनर्जी स्टोरेज सेवाएं उपलब्ध कराएगी। यह परियोजना भारत में बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को स्थिर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति देने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस समझौते के तहत कंपनी को 40 वर्षों तक एनर्जी स्टोरेज सर्विसेज उपलब्ध करानी होंगी। इसके बदले कंपनी को अनुबंध में तय निश्चित वार्षिक भुगतान प्राप्त होगा, जिससे लंबे समय तक स्थिर राजस्व सुनिश्चित होगा।
हर साल करीब ₹351 करोड़ की तय कमाई
कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार टाटा पावर को प्रति मेगावाट प्रति वर्ष ₹1.084 करोड़ का निश्चित भुगतान मिलेगा।
- कुल क्षमता: 324 मेगावाट
- प्रति मेगावाट वार्षिक भुगतान: ₹1.084 करोड़
- अनुमानित कुल वार्षिक आय: करीब ₹351.3 करोड़
- अनुबंध अवधि: 40 वर्ष
इस तरह यह परियोजना कंपनी के लिए लंबे समय तक नियमित और अनुमानित कैश फ्लो का मजबूत स्रोत बन सकती है।
36 महीने में शुरू करनी होगी सप्लाई
ऑर्डर की शर्तों के अनुसार, पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) प्रभावी होने की तारीख से 36 महीनों के भीतर टाटा पावर को अपनी स्टोरेज क्षमता से बिजली उपलब्ध करानी होगी।
इसके अलावा, SECI और Tata Power के बीच अंतिम Pump Storage Purchase Agreement (PSPA) तब हस्ताक्षरित होगा जब SECI संबंधित बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) या अन्य खरीदारों के साथ Pump Storage Sale Agreement (PSSA) पर हस्ताक्षर कर लेगी।
पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट क्या होता है?
पंप स्टोरेज पावर प्रोजेक्ट ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) की सबसे प्रभावी तकनीकों में से एक माना जाता है। इसमें बिजली की मांग कम होने पर पानी को ऊपरी जलाशय में पंप किया जाता है और पीक डिमांड के समय उसी पानी से टर्बाइन चलाकर बिजली बनाई जाती है।
इस तकनीक से:
- ग्रिड की स्थिरता बढ़ती है।
- सौर और पवन ऊर्जा का बेहतर उपयोग संभव होता है।
- बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनती है।
- पीक डिमांड के दौरान अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है।
एनुअल साइकिल लॉस कितना रहेगा?
कंपनी द्वारा साझा जानकारी के अनुसार, इस परियोजना में Annual Cycle Loss 24.61% रहेगा। यह पंप स्टोरेज सिस्टम के संचालन के दौरान ऊर्जा रूपांतरण में होने वाली सामान्य तकनीकी हानि को दर्शाता है।
शुक्रवार को कैसा रहा Tata Power का शेयर?
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में टाटा पावर का शेयर लगभग सपाट स्तर पर ₹377 के आसपास बंद हुआ। हालांकि बाजार बंद होने के बाद मिले इस बड़े ऑर्डर के चलते सोमवार को स्टॉक में निवेशकों की गतिविधि बढ़ सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि के लिए निश्चित आय वाला यह अनुबंध कंपनी के रिन्यूएबल और एनर्जी स्टोरेज बिजनेस को मजबूत करेगा।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह डील?
भारत तेजी से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है। ऐसे में एनर्जी स्टोरेज भविष्य के बिजली क्षेत्र का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। टाटा पावर को मिला यह 40 साल का अनुबंध न केवल कंपनी की आय को स्थिर बनाएगा, बल्कि उसे देश के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) में भी मजबूत स्थिति देगा। यही वजह है कि आने वाले कारोबारी सत्र में यह स्टॉक निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की निगाह में रह सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


