नई दिल्ली: टाटा समूह की एयरलाइन एयर इंडिया ग्रुप ने अपने विस्तार को लेकर बड़ा ऐलान किया है। कंपनी अगले 18 महीनों के भीतर अपने बेड़े में 60 नए विमान शामिल करने जा रही है। इस योजना का उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को मजबूत करना, यात्रियों को बेहतर सेवाएं देना और भारत के टियर-2 शहरों को सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जोड़ना है।
एयर इंडिया के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी (Chief Commercial Officer) और एयर इंडिया एक्सप्रेस के चेयरमैन निपुण अग्रवाल ने बताया कि वैश्विक विमानन उद्योग में सप्लाई चेन, इंजन उपलब्धता और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी अपने ट्रांसफॉर्मेशन प्लान पर तेजी से काम कर रही है।
18 महीने में 60 नए विमान होंगे शामिल
टाटा समूह द्वारा 2022 में एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद कंपनी लगातार अपने बेड़े और सेवाओं का आधुनिकीकरण कर रही है। इसी दिशा में अगले डेढ़ साल में 60 नए विमानों की डिलीवरी होने की उम्मीद है।
इन विमानों के शामिल होने से एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस दोनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी। इससे नई उड़ानें शुरू करने के साथ-साथ मौजूदा रूट्स पर भी अधिक फ्रीक्वेंसी उपलब्ध कराई जा सकेगी।
600 विमानों का विशाल ऑर्डर, अभी केवल 10% डिलीवरी
एयर इंडिया ग्रुप ने दुनिया के सबसे बड़े विमान ऑर्डरों में से एक के तहत लगभग 600 विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है। हालांकि, अब तक इस ऑर्डर का केवल करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ही कंपनी को मिला है।
वैश्विक स्तर पर विमान निर्माण कंपनियों के सामने उत्पादन और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों के कारण डिलीवरी में देरी हुई है। इसके बावजूद कंपनी का कहना है कि आने वाले वर्षों में लगातार नए विमान बेड़े में शामिल होते रहेंगे।
अगले 7-8 वर्षों तक हर साल जुड़ेंगे 50-60 विमान
निपुण अग्रवाल के अनुसार एयर इंडिया का विस्तार केवल अगले 18 महीनों तक सीमित नहीं है। कंपनी का अनुमान है कि अगले 7 से 8 वर्षों तक हर साल 50 से 60 नए विमान बेड़े में शामिल किए जाएंगे।
इनमें छोटे, मध्यम और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए बड़े आकार के आधुनिक विमान भी शामिल होंगे। इससे एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों नेटवर्क क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
टियर-2 शहरों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का लाभ
एयर इंडिया ग्रुप अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी टियर-2 शहरों से भी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की तैयारी कर रही है।
इस कदम से छोटे शहरों के यात्रियों को दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे बड़े हब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सुविधा मिलने से व्यापार, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद जारी है विस्तार
एयरलाइन उद्योग पिछले कुछ वर्षों से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें प्रमुख रूप से—
- विमान और इंजन की सप्लाई में देरी
- भू-राजनीतिक तनाव
- ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- परिचालन लागत में वृद्धि
इन परिस्थितियों के बावजूद एयर इंडिया का कहना है कि उसकी दीर्घकालिक रणनीति प्रभावित नहीं हुई है और कंपनी अपनी योजनाओं के अनुसार आगे बढ़ रही है।
पश्चिम एशिया तनाव का असर अब हो रहा कम
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा था। कुछ रूट्स पर उड़ानों की संख्या घटानी पड़ी और ईंधन लागत भी बढ़ी।
अब स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने के साथ एयर इंडिया उन उड़ानों को फिर से सामान्य स्तर पर लाने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य है कि यात्रियों को पहले जैसी बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाए।
यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने पर फोकस
पिछले कुछ वर्षों में एयर इंडिया को पुराने विमानों, देरी और सेवा गुणवत्ता को लेकर यात्रियों की शिकायतों का सामना करना पड़ा था। अब कंपनी इन समस्याओं को दूर करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है।
इसके तहत—
- नए और आधुनिक विमानों को बेड़े में शामिल किया जा रहा है।
- केबिन क्रू और ग्राउंड स्टाफ को नई ट्रेनिंग दी जा रही है।
- डिजिटल सेवाओं और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाया जा रहा है।
- समय पर उड़ान संचालन और सेवा गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
एयर इंडिया के लिए क्यों अहम है यह विस्तार?
विशेषज्ञों का मानना है कि नए विमानों की डिलीवरी से एयर इंडिया की प्रतिस्पर्धी क्षमता मजबूत होगी। इससे कंपनी घरेलू बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी विस्तार कर सकेगी। टियर-2 शहरों को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ने की रणनीति भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
निष्कर्ष
एयर इंडिया ग्रुप का अगले 18 महीनों में 60 नए विमान शामिल करने का मेगा प्लान कंपनी के अब तक के सबसे बड़े विस्तार कार्यक्रमों में से एक है। 600 विमानों के विशाल ऑर्डर, हर साल 50-60 नए विमान जोड़ने की योजना और टियर-2 शहरों तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार से आने वाले वर्षों में एयर इंडिया भारतीय विमानन बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।


