नई दिल्ली: पाकिस्तान के साथ व्यापार में लगातार गिरावट के बीच अफगानिस्तान अब भारत के साथ अपने आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती देना चाहता है। अफगानिस्तान की प्रमुख व्यापारिक संस्था अफगानिस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट (ACCI) ने भारत से व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें बिजनेस वीजा प्रक्रिया को आसान बनाना, व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल करना और प्रशासनिक बाधाओं को कम करना प्रमुख हैं।
यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान के साथ अफगानिस्तान का ट्रांजिट व्यापार रिकॉर्ड स्तर तक गिर चुका है और काबुल वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
भारत और अफगानिस्तान के बीच हुई अहम बैठक
इन प्रस्तावों पर काबुल में ACCI के चेयरमैन सैयद करीम हाशमी और अफगानिस्तान में भारत के राजदूत यतिन पटेल के बीच हुई बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। ACCI द्वारा जारी बयान के अनुसार दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।
बैठक में व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाने, निजी क्षेत्र के सहयोग को बढ़ावा देने तथा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
पाकिस्तान के साथ क्यों घट गया व्यापार?
पिछले कुछ वर्षों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच ट्रांजिट व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- वित्त वर्ष 2021 में व्यापार लगभग 5 अरब डॉलर था।
- वित्त वर्ष 2026 में यह घटकर केवल 36.7 करोड़ डॉलर रह गया।
- यानी पांच वर्षों में व्यापार में लगभग 93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट का प्रमुख कारण यह है कि अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर निर्भरता कम करते हुए ईरान और अन्य वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है।
चाबहार पोर्ट से मजबूत हो रही भारत की पहुंच
भारत लंबे समय से ईरान के चाबहार बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच विकसित कर रहा है। यह मार्ग पाकिस्तान को बायपास करता है और भारत को अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया के देशों तक व्यापारिक पहुंच उपलब्ध कराता है।
चूंकि पाकिस्तान भारतीय सामानों को अपनी भूमि के रास्ते अफगानिस्तान भेजने की अनुमति नहीं देता, इसलिए चाबहार पोर्ट भारत की रणनीतिक और व्यापारिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
2025-26 में कितना रहा भारत-अफगानिस्तान व्यापार?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 90.78 करोड़ डॉलर रहा। पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों का व्यापार सामान्यतः 1 अरब डॉलर के आसपास बना रहा है।
भारत अफगानिस्तान के लिए कृषि उत्पाद, दवाइयां, मशीनरी और अन्य आवश्यक वस्तुओं का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जबकि अफगानिस्तान से भारत में मुख्य रूप से सूखे मेवे, केसर, फल, कालीन और हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात होता है।
भारत से क्या-क्या मांग कर रहा है अफगानिस्तान?
बैठक के दौरान ACCI ने भारत के सामने कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे, जिनमें शामिल हैं—
- बिजनेस वीजा जारी करने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए।
- व्यापारिक प्रक्रियाओं में प्रशासनिक बाधाओं को कम किया जाए।
- अफगान निर्यातकों को भारतीय बाजार तक बेहतर पहुंच मिले।
- लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए।
- संयुक्त व्यापार प्रदर्शनियां और बिजनेस फोरम आयोजित किए जाएं।
- दोनों देशों के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों का नियमित आदान-प्रदान हो।
कृषि, खनन और हस्तशिल्प पर रहेगा फोकस
ACCI चेयरमैन सैयद करीम हाशमी ने भारत की अपनी हालिया यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कृषि, हस्तशिल्प, खनन और खनिज संसाधनों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि यदि लॉजिस्टिक्स, बाजार तक पहुंच और वीजा संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए तो अफगानिस्तान का निर्यात उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।
भारतीय राजदूत ने दिया सहयोग का भरोसा
भारत के राजदूत यतिन पटेल ने अफगानिस्तान के प्रस्तावों का स्वागत करते हुए कहा कि भारत व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच संयुक्त व्यापार प्रदर्शनियों, विशेष बिजनेस फोरम और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
जरांज-देलाराम हाईवे बना रणनीतिक कड़ी
भारत ने पश्चिमी अफगानिस्तान में 218 किलोमीटर लंबा जरांज-देलाराम हाईवे भी बनाया है। यह सड़क ईरानी सीमा को अफगानिस्तान के रिंग रोड नेटवर्क से जोड़ती है और मानवीय सहायता तथा व्यापारिक आपूर्ति को आसान बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत की मध्य एशिया कनेक्टिविटी रणनीति का अहम हिस्सा है और भविष्य में भारत-अफगानिस्तान व्यापार को नई गति दे सकती है।
भारत-अफगानिस्तान संबंधों के लिए क्या मायने?
पाकिस्तान के साथ व्यापार में तेज गिरावट के बाद अफगानिस्तान अब भारत को एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में देख रहा है। यदि बिजनेस वीजा, लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे प्रस्तावों पर प्रगति होती है, तो आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। साथ ही चाबहार पोर्ट और भारत द्वारा विकसित कनेक्टिविटी परियोजनाएं इस साझेदारी को और मजबूत आधार प्रदान करेंगी।


